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आक्रोशित ग्रामीण करेंगे मतदान का बहिष्कार

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एक तरफ केन्द्र और प्रदेश सरकार जोर शोर से शिक्षा को बढ़ावा देने में लगी हैं वहीं दूसरी तरफ हफ्तों से स्कूल बंद पड़ी है। जिले की जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) को कोई परवाह ही नही है।


उमरिया – जिले के करकेली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम धनवाही में आंगनबाड़ी और प्राथमिक कक्षा के बच्चों के लिए स्कूल बंद हो जाने से छात्र और अभिभावक परेशान हैं। पूरा मामला है ग्राम पंचायत घुलघुली अंतर्गत आने वाले ग्राम धनवाही में जिस जगह पर आंगनबाड़ी एवम प्राथमिक पाठशाला वर्षों से बनी हुई है, उस जगह को साउथ ईस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड के जोहिला एरिया अंतर्गत आने वाली कंचन ओपन कास्ट कोयला खदान द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया है।


ग्राम धनवाही निवासी आक्रोशित देवकी विश्वकर्मा का कहना है कि हमारे बच्चों के लिए संचालित स्कूल और आंगनबाड़ी कालरी वाले बन्द करवा दिए हैं और अधिकारी कहते हैं बच्चों को घुलघुली भेजो, हम छोटे छोटे बच्चों को 5 किलोमीटर दूर नही भेजेंगे और चुनाव में अगर वोट डालने दूर जाना होगा तो हम लोग मतदान नही करेंगे।


वहीं लक्ष्मी प्रसाद बैगा ने भी प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि हमारे बच्चों को पढ़ने की व्यवस्था गांव में नही हुई तो हम दूर नही भेजेंगे, और यदि हमारे यहां का पोलिंग बूथ गांव से बाहर हुआ तो हम लोग चुनाव का बहिष्कार करेंगे। नेता अपने मतलब पर गांव में दौड़े चले आते हैं और बच्चों की पढ़ाई से उनका कोई मतलब नहीं है, कालरी वाले ब्लास्टिंग करते हैं स्कूल लगना बन्द कर दिए हैं।


ग्रामीण लवकुश विश्वकर्मा ने बताया कि हम लोगों को पता ही नही था कि स्कूल को कोल माइंस ने अधिग्रहीत कर लिया है। जब कोल माइंस ने स्कूल संचालन बन्द तब हम लोगों को पता चला। जिस वजह से कोल प्रबन्धन उक्त विद्यालय में शैक्षिक कार्य नही होने दे रहा है, उनका कहना है कि उक्त स्थल अधिग्रहित और प्रतिबंधित क्षेत्र है।

यहाँ छात्रों का शैक्षिक कार्य न कराये। हम लोग पूर्व में भी जिला प्रशासन को ज्ञापन के माध्यम से अवगत करा चुके हैं लेकिन जिला प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नही दिया गया है। इतना ही नही हमारे गांव का पोलिंग बूथ भी हटाया जा रहा है, यदि गांव से दूर पोलिंग बूथ बनेगा तो हम लोग मतदान का बहिष्कार करेंगे।


अतिसंवेदनशील इस मामले में जिले के कलेक्टर बुद्धेश कुमार वैद्य ने बताया कि मेरे संज्ञान में यह मामला आया हुआ है हमने आज ही डीपीसी से जानकारी लिया है हम बच्चों की व्यवस्था बना रहे हैं उनकी पढ़ाई बाधित नही होगी। बच्चों के भविष्य को ध्यान रखते हुए उचित निर्णय लिया जायेगा।

गौरतलब है कि कोल माइंस प्रबंधन का कहना है कि हमारे द्वारा स्कूल भवन बनाने का पैसा शिक्षा विभाग के खाते में दो वर्ष पूर्व ही हस्तांतरित कर दिया गया है और उसके बाद स्कूल भवन नही बना तो हमारी कोई जिम्मेदारी नही है। ऐसे में स्पष्ट हो गया कि जिले की परियोजना समन्वयक सर्व शिक्षा अभियान सुमिता दत्ता की घोर स्वेच्छाचारिता के चलते सभी को अंधेरे में रखा गया और आज जब ग्रामीण आंदोलित हो गए तब मामला 15 दिन पूर्व आये जिले के कलेक्टर के संज्ञान में आया। ऐसे में डीपीसी के ऊपर भी कार्रवाई होना चाहिए ताकि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने की सजा उनको मिल सके।

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