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बाघ के हमले से युवक गम्भीर एक दिन में दूसरी घटना

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उमरिया वन परिक्षेत्र के पठारी बीट से सटे राजस्व क्षेत्र में बाघ ने युवक पर हमला कर दिया जिससे युवक घायल हो गया।

इस घटना में घायल ग्राम उजान निवासी प्रभु पिता माया राम बैगा उम्र 35 वर्ष ने बताया कि हम अपने भाई के साथ जंगल मे लकड़ी बीनने गए थे और वहां से लौटते समय अचानक बाघ ने हमला कर दिया जिससे हम दूर गिर गए, मौत सामने देख हिम्मत जुटा कर चुपचाप पड़े रहे, इतने में बाघ हमारे पास आया और कोई हरकत न देख वापस जंगल की तरफ चला गया। वन विभाग को सूचना दिए और वन विभाग की टीम पहुंच कर करकेली अस्पताल लायी फिर वहां से उपचार करके जिला अस्पताल भेज दिए हैं।
वहीं जब एसडीओ वन कुलदीप त्रिपाठी और उमरिया रेंजर सिद्धार्थ सिंह से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया तो दोनो से सम्पर्क नही हो पाया।

मौके से घायल को जिला अस्पताल लेकर आये पठारी बीट के फारेस्टगार्ड अभिषेक पांडेय ने बताया कि वन विभाग के नियमानुसार तात्कालिक सहायता राशि के रूप में 1 हजार रुपए दे दिए गए हैं और जितने दिन अस्पताल में भर्ती रहेगा, उतने दिन 500/- प्रतिदिन के हिसाब से दिया जाएगा साथ ही यदि अन्यत्र इलाज कराने की जरूरत पड़ेगी तो जितने का बिल देंगे, उतनी रकम विभाग द्वारा दिया जाएगा।

अब सवाल यह उठता है कि एक दिन में दो अलग – अलग क्षेत्र में बाघ के हमले की दो घटनाएं हुई हैं, जिसमे एक की मौत और दूसरे में गम्भीर घायल हुआ है।
वन विभाग के रिटायर्ड एसडीओ और वन्य जीव विशेषज्ञ की एन एस कोरचे की माने तो, बाघ का कुनबा तेजी से बढ़ रहा है और उनको रहने के लिए पर्याप्त जगह नही है। एक बाघ को कम से कम 10 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र चाहिए वह भी तब जब उनको पर्याप्त मात्रा में शिकार मिले नही तो 45 से 50 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र चाहिए। अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का कोर जोन मात्र 700 वर्ग किलोमीटर का है और बफर जोन जहां मानव और वन्य जीव दोनो हैं 800 वर्ग किलोमीटर का है, कुल मिलाकर 1500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 135 बाघ कैसे रह सकते हैं। इनके लिए कम से कम 6750 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र चाहिए। ऐसे में बाघ शिकार की तलाश में जंगल से सटे गांव की तरफ रुख करते हैं तो सामने मानव आ जाता है और वहीं यह स्थिति बनती है।
दूसरी तरफ कुछ जानकारों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते भी बाघों के स्वभाव में परिवर्तन हो रहा है और उनको पर्याप्त मात्रा में शिकार नही मिल रहा है जिसके चलते बाघों के स्वभाव में परिवर्तन हो रहा है और अपनी भूख मिटाने के लिए बस्ती की तरफ का रुख करते हैं, ताकि पालतू जानवरों का शिकार कर सकें और उसी बीच सामने मनुष्य आ जाता है जिसके चलते यह स्थिति बनती है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वन क्षेत्र की सीमा बढ़ाये या फिर बाघों को उन जंगलों में शिफ्ट करे जहां पर्याप्त जगह हो, तभी यह द्वंद रुक सकेगा नही तो लगातार बढ़ता ही जायेगा।

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