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रेल प्रशासन ने गिराया माकान जानिये पूरा सच क्या है

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अतिक्रमण के नाम पर रेलवे प्रशासन ने 7 मकानों को जमींदोज कर दिया, अभी 28 और बाकी हैं, हलांकि रेल्वे के अधिकारी कुछ भी बोलने से कतराते रहे।

उमरिया – जिला मुख्यालय का रेल्वे स्टेशन अमृत भारत योजना के तहत चयनित किया गया है। इस योजना अंतर्गत उमरिया रेलवे परिसर का भी कायाकल्प होना है। जिसके तहत आज आराजी खसरा नम्बर 1334 रेल्वे की भूमि पर हुए 4 एकड़ 74 डिसमिल रकवे पर से अतिक्रमण हटाने की शुरुआत की गई।


जिसमें राजेश अग्रवाल, भाजपा नेत्री उमा महोबिया, कमलेश तिवारी, ममता जायसवाल, कविता सिंह, भाजपा नेत्री सुमित्रा विश्वास, संजय दुबे, धर्मेन्द्र गुप्ता, स्वर्गीय नरेश आहूजा के मकानों को आज अँधेला होने के बाद तक धराशाई किया गया। वहीं सुरक्षा के लिहाज से रेल्वे और स्थानीय पुलिस प्रशासन बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

मामला है उमरिया रेल्वे स्टेशन परिसर का जहां आराजी खसरा नम्बर 1334 रकवा 4 एकड़ 74 डिसमिल छटन कैम्प की मध्यप्रदेश शासन की भूमि पर रेलवे ने अपना स्वामित्व बताते हुए जिला न्यायालय से भूमि खाली कराने का आदेश लेकर रेल पुलिस बल और जिला पुलिस बल एवं राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी में लोगों के घर को देर शाम तक अँधेला होने के बाद जमींदोज कर दिया।

रेल विभाग के एईएन और पीडब्ल्यूआई सतीश साहू ने अमले के साथ सारी कार्रवाई को अंजाम दिया, हालांकि दोनो अधिकारी कुछ भी बोलने से कतराते रहे। दोनो ने कहा कि हम लोग बोलने के लिए अधिकृत नही हैं और कोई जिम्मेदार अधिकारी नही रहा।


वहीं रेल्वे की तरफ से नियुक्त अधिवक्ता पुष्पराज सिंह ने बताया कि 1334 नम्बर की भूमि रेल्वे की है और इस पर अतिक्रमण था, जिसको लेकर माननीय न्यायालय उमरिया ने तमाम अतिक्रमणकारियों की स्टे याचिका खारिज करते हुए रेलवे के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रेलवे को स्वतंत्र कर दिया जिसके बाद सभी को नोटिस देकर मकान खाली कराने कहा गया मगर किसी ने माकान खाली नही किया आज रेल्वे ने 3 जेसीबी मशीनों की मदद से बहुमंजिला इमारतों को ध्वस्त कर दिया गया, यहां कुल 35 लोगों का अवैध कब्जा है जिसको आज खाली करवाया जा रहा है।

तो वहीं महिलाओं और 90 वर्षीया वृद्धा को पकड़ कर घर से बाहर निकाल दिया गया।


वहीं सुरक्षा के लिहाज से रेल्वे जीआरपी पुलिस और महिला पुलिस सहित बड़ी संख्या में रेलवे के कर्मचारी अधिकारी मौजूद रहे, वहीं कई मकानों को तोड़ने के दौरान विरोध का भी सामना करना पड़ा।
इतना ही ज्ञान गंगा पैरामेडिकल कालेज को हटाते वक्त रेल प्रशासन और जिला प्रशासन को धमकी देते हुए भाजपा नेत्री उमा महोबिया अपने ऊपर पेट्रोल डाल कर आत्मदाह का भी प्रयास करने लगी जिस पर महिला पुलिस ने रोका।


तो वहीं दूसरी भाजपा महिला नेत्री सुमित्रा विश्वास भी इस प्रक्रिया को गलत बताते हुए विरोध करती रहीं।
इतना ही राजेश अग्रवाल ने भी बताया कि हमारा घर वैध ढंग से बना है लेकिन रेल प्रशासन जबरन आराजी खसरा क्रमांक 1335 में बने माकान को भी तोड़ रहा है।

वहीं रेल्वे के अधिवक्ता पुष्पराज सिंह ने बताया कि यह मामला व्यवहार न्यायाधीश के यहां चला था उसमें 35 लोग पाए गए थे और जिन लोगों ने बनाया है उनका माकान अवैध रूप से मान लिया गया है उनके विरुद्ध कार्रवाई कर रेल्वे अपना कब्जा करे। वहीं जब हाई कोर्ट से स्टे होने की बात की गई तो उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि कोई भी स्टे 6 माह से अधिक मान्य नही है और इनके पास जो आदेश है वह 2017 का है। उमरिया जिला न्यायाधीश वर्ग 1 एवं व्यवहार न्यायाधीश वर्ग 1 का जो आदेश हुआ है उसके विरुद्ध इनके पास कोई स्थगन आदेश नही है। इसके बाद इन लोगों ने उच्च न्यायालय में स्थगन के लिए लगाया लेकिन कोर्ट ने यह माना कि उमरिया रेल्वे स्टेशन को भारत सरकार द्वारा अमृत भारत योजना के तहत कायाकल्प किया जाना है इसलिए स्टे आदेश नही दिया और इनके पास कोई स्थगन आदेश नही है, इसलिए रेल्वे अपना कब्जा ले।

वहीं एसडीएम बांधवगढ़ अमित सिंह ने बताया कि रेल्वे की भूमि है जो खसरा नम्बर 1334/1 है जिसको लेकर वर्ष 1992 से प्रकरण लगातार चल रहा था उसमें डीजे कोर्ट से एक डिस्मेंटल का आर्डर हुआ है, उसी आर्डर के परिपालन में रेल्वे द्वारा कार्रवाई की जा रही है, शान्ति व्यवस्था बनी रहे इसलिए हमारे एसडीओपी साहब, टीआई साहब, तहसीलदार और पुलिस बल सभी यहां उपस्थित हैं। वहीं जब पूंछा गया कि पीड़ितों का कहना है कि यह भूमि नजूल में आती है तो, एसडीएम ने कहा कि जब यह मामला डीजे कोर्ट में रहा होगा तो निश्चित रूप से ये बिंदु वहां भी रखे गए होंगे और सभी के बाद विधिसंगत पाया गया होगा तो आदेश हुआ होगा और विधिसंगत कार्रवाई की जा रही है।

अब जरा पीड़ित पक्ष की भी सुन लें क्या कहता है पीड़ित और क्या प्रमाण है उनके पास।


पीड़ित राजेश अग्रवाल ने बताया कि यह भूमि शुरू से पट्टे की रही वर्ष 1925 में शिव मंगल सिंह रीवा के नाम पर दर्ज थी उसके बाद राम अवतार के नाम पर आ गई बाद में रीवा राजदरबार का लगान न पाने के कारण रीवा राजदरबार द्वारा आराजी खसरा नम्बर 1334 रकवा 4 एकड़ 74 डिसमिल भूमि को नीलाम कर दिया गया और उस नीलामी में ज्वाला प्रसाद कायस्थ द्वारा खरीद लिया गया उनकी मृत्यु के उपरांत फौती नामांतरण में उनकी पत्नी शिवरानी देवी के नाम दर्ज हुई बाद में उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र सुखराम कायस्थ के नाम पर आ गई जो सन 1953 से लगातार 1986 तक उन्ही के नाम पर रही बाद में 12/05/1986 को रजिस्टर्ड विक्रय पत्र के माध्यम से मेरे द्वारा क्रय की गई और बाद में बाकायदा नामांतरण करवाया गया साथ ही नगर पालिका में भी नामांतरण करवाया गया और डायवर्सन करवाने के बाद भवन निर्माण की स्वीकृति भी ली गई उसके बाद 35 लोगों को यह भूमि बेची गई। जिसका बाकायदा नामांतरण भी करवाया गया। इसके बाद रेल्वे ने डीजे कोर्ट शहडोल में दावा दायर किया लेकिन उनके पास कोई साक्ष्य नही होने के कारण केस हार गए और फिर हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट सभी जगह से हारते चले गए। इसके बाद रेल्वे ने अपने सम्पदा न्यायालय में बेदखली के लिए मामला दायर किया और वहां भी हार गए। इतने पर भी रेल्वे ने सीजेएम उमरिया में सिविल शूट दायर किया और वहां से भी उनको हार का मुंह देखना पड़ा।

इसी बीच रेल्वे और राजस्व विभाग मिल कर दूसरा खेल खेलने लग गए, जिसमें तत्कालीन राजस्व अमला पट्टे की भूमि होने के बाद भी कलेक्टर न्यायालय में कलेक्टर ने सोमोटो में मामले को लेकर वर्ष 2004 – 05 में दर्ज भूमि का स्वरूप ही बदल दिया, जिसमे माकान दर्ज था उसको बाद में 2013 – 14 में आदेश पारित कर तालाब दर्ज कर दिया। जिसके विरुद्ध उच्च न्यायालय में मामला दायर किया गया और वहां से स्थगन आदेश भी जारी किया गया और अब फैसला आने ही वाला है लेकिन जिला न्यायालय ने आदेश किया और डिक्री नही दिया उसके बाद रेल्वे गुंडागर्दी के दम पर सभी घर गिरा दी है जबकि अभी भी राजस्व रिकार्ड में रेल्वे का नाम दर्ज नही है।

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