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चलते चलते प्रदेश सरकार ने जिला परिवहन विभाग की कमान भ्रष्टाचारी को सौंपी

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उमरिया – जिले के भ्रष्टाचार के किस्से तो आप सुन ही रहे हैं, लगातार हर विभाग में संरक्षित भ्रष्टाचार हो रहा है। मानपुर विधानसभा तो सुर्खियों में रहा। गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी ने प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री के द्वारा किये गए घोटाले को उजागर किया। कृषि विभाग के मुखिया का भी घोटाला आपने देखा और सुना, सम्भाग के ईमानदार कमिश्नर ने जिनको भ्रष्टाचार में लिप्त पाकर निलंबित किया, उन्ही को बिना जांच पूरी हुए, वहीं कमिश्नर बहाल कर उसी पद पर पुनः आसीन कर आहरण संवितरण अधिकार भी दे दिया। सहकारिता विभाग में हर कदम पर भारी भ्रष्टाचार मचा हुआ है, कोटरी खरीदी केन्द्र प्रभारी रजनीश दत्त तिवारी, प्रशासक चन्द्र मणि द्विवेदी और आपरेटर राम कुशल साहू के द्वारा किये गए घोटाले के मामले में प्रभारी एआरसीएस अभय सिंह और जांचकर्ता संजय सराफ दोनो मिल कर तीनो लोगों को बचाने में लगे हैं, जिसके चलते अभी तक जांच पूरी नही हुई, वहीं इस बार फिर से इन्ही भ्रष्टाचारियों को फिर वही प्रभार देने की तैयारी चल रही है। जिला आबकारी अधिकारी रिनि गुप्ता 1 लाख 20 हजार की रिश्वत लेते पकड़ी गई, उनका प्रमोशन कर ग्वालियर उड़न दस्ता में पदस्थ कर दिया गया था लेकिन मीडिया द्वारा मामला उछाले जाने के बाद कार्यालय में अटैच किया गया। एक नही जिले में छोटे से लेकर बड़े भ्रष्टाचारियों तक सभी को खुला संरक्षण मिला हुआ है। जनजातीय कार्य विभाग के भ्रष्टाचारियों की जांच में दोष सिद्ध पाए जाने पर फिर से उसी जगह बैठा दिया गया। जनजातीय कार्य विभाग में पदस्थ बाबू बिजेन्द्र सिंह को पूर्व कलेक्टर ने परियोजना कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया था लेकिन जिले के प्रभारी मंत्री ने पुनः उसी कुर्सी पर बैठा दिया। स्वास्थ्य विभाग में जिला स्वास्थ्य अधिकारी अपने खास लोगों को खुला संरक्षण दे रहे हैं, वो डियूटी न भी करें तो कोई फर्क नही पड़ता है। जिला महिला एवं बाल विकास विभाग में यही हाल है। ग्रामीण राज्य आजीविका मिशन में देखें तो बच्चों के ड्रेस में घोटाला लेकिन सभी निश्चिंत हैं क्योंकि सभी संरक्षित हैं। पीआईयू विभाग द्वारा जो करोणों के भवन बनवाये गए हैं वो जनवरी में लोकार्पित हुए और जुलाई में चूने लगे हैं। अब कहाँ तक गिनवायें, हर विभाग का यही हाल है। अरे हां नगर पालिका तो मुख्य है, जहां परिषद होते हुए भी सीएमओ मनमानी कर रहीं हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनो के विरोध का कोई असर नही हुआ, ऊपर से जो सेटिंग है। ऐसा नही है कि प्रदेश सरकार तक शिकायत नही हुई है, हर जगह शिकायत हुई लेकिन नतीजा शिफर रहा है।
उसका कारण रहा सरकार ही भ्रष्ट है तो ईमानदार चाह कर भी कुछ नही कर सकता, क्योंकि इसको मजबूर कर दिया जाता है कि सिस्टम में चलो नही तो फेंक दिया जाएगा।

अब देखिए प्रदेश के बेहद ईमानदार मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री की बड़ी ईमानदारी कल परिवहन विभाग के ट्रांसफर सूची निकली जिसमें छठवें नम्बर नाम दिया हुआ है, श्री संतोष पाल सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, जिनके यहां 9 जुलाई 2022 को न्यायालय के द्वारा दिये गए आदेश पर ईओडब्ल्यू की रेड पड़ी थी और 11 अगस्त तक रिपोर्ट पेश करने की तारीख नियत की गई थी, उसके आधार पर इनकी वास्तविक कमाई की 650 गुना ज्यादा की बेनामी संपत्ति पाई गयी थी। 5 कालोनियों में 6 आलीशान माकान, चरगवां के पास डेढ़ एकड़ में बने लग्जरी फार्महाउस और दो कार दो टू व्हीलर सहित कई जमीन के दस्तावेज मिले हैं. टीम ने 3 जगहों पर छापेमारी की है. टीम ने संतोष पाल के घर से 16 लाख रुपये नकद और जेवरात बरामद हुए थे। उस समय इनको आफिस अटैच कर दिया गया था लेकिन कल निकली सूची में प्रदेश के ईमानदार मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री की कृपा से इनको अब उमरिया जिले का जिला परिवहन अधिकारी बना दिया गया है ताकि यहां के सीधे सादे वाहन मालिकों के खून चूस सकें। इस मामले में जब परिवहन आयुक्त ग्वालियर संजय कुमार झा को मोबाइल नंबर 9868815333 पर फोन लगाया गया तो उनने फोन उठाना मुनासिब नही समझा, जिससे लगता है कि प्रदेश की जनता के सामने ईमानदारी का दिखावा कर उनकी चमड़ी नोची जा रही है।
अब अगर इनको उमरिया जिले का आरटीओ बना दिया गया है तो वह दिन दूर नही कि ये भी बांधवगढ़ में अन्य ईमानदार नेताओं और अधिकारियों की तरह वाहन मालिकों के खून चूस कर अपनी लाज बनवा लें।

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