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सात दिन में नही छोड़े तो होगा जेल भरो आंदोलन – गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी

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उमरिया – जिला मुख्यालय स्थित रानी दुर्गावती चौक में 26 सितम्बर को गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी द्वारा प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री मीना सिंह द्वारा किये गए बस्ती विकास योजना में 100 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच की मांग को लेकर धरना, प्रदर्शन, आंदोलन किया जा रहा था, उसी दौरान दोपहर में कुछ लोगों द्वारा पुलिस से मारपीट की गई, बाद में मामला शांत हो गया, शाम को कुछ उत्तेजक भाषण के बाद गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी द्वारा रैली निकालने की तैयारी की गई जिसको बाजार में व्यापारियों के साथ अभद्रता होने की आशंका में पुलिस द्वारा रोका गया और तभी किसी के द्वारा मारो – मारो शब्द का स्तेमाल किया गया और इतना बड़ा कांड हो गया। जिसमें गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी के पचासों कार्यकर्ता जेल भेज दिए गए वहीं इस घटना का फायदा उठा कर कोई असामाजिक तत्व पुलिस की पिस्टल छीन ले गया।

इन्ही सब घटनाओं के बाद मंगलवार को गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमान सिंह पोर्ते की अगुवाई में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इरफान मलिक सहित कई पदाधिकारी जिले के कलेक्टर को ज्ञापन दिए और जेल में निरुद्ध गोंड़वाना के कार्यकर्ताओं से मुलाकात भी किये और जिला प्रशासन को चेतावनी भी दिए कि यदि हमारे कार्यकर्ताओं को 7 दिवस में रिहा नही किया गया तो हम भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते रहेंगे और हमारा आंदोलन जारी रहेगा इतना ही हम जेल भरो आंदोलन भी करेंगे।

ज्ञापन के बाद गोंगपा पदाधिकारी न्यायिक अभिरक्षा में जेल में बंद कार्यकर्ताओं से भी मिलने गए थे।

ज्ञापन के दौरान गोंगपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इरफान मलिक ने कहा कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी हिंसा पर विश्वास नही करती बल्कि संवैधानिक मूल्यों पर लोकतांत्रिक तरीके से राजनीति करने पर विश्वास रखती है।उन्होंने कहा कि 26 सितंबर को भ्र्ष्टाचार के विरुद्ध हमारी पार्टी धरना प्रदर्शन कर रही थी,पर दूसरे दलों और असमाजिक तत्वों ने हिंसा कारित की, जो दुर्भाग्यपूर्ण है और कहा कि 7 दिवस के अंदर यदि पार्टी कार्यकर्ताओं को अगर रिहा नही किया गया तो पार्टी जेल भरो आंदोलन करेगी, और भ्र्ष्टाचार के विरुद्ध पुनः आंदोलन प्रारम्भ करेगी।

ज्ञापन के दौरान गोंगपा के प्रदेश अध्यक्ष अमान सिंह पोर्ते ने कहा कि हम 26 सितंबर को धरना प्रदर्शन के माध्यम से अपने हक और अधिकार के लिए लड़ना चाह रहे थे,पर कुछ शरारती तत्वों ने हिंसा भड़काई, जिसके बाद पुलिस और पार्टी कार्यकर्ताओं में झड़प हुई है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को सताया जा रहा है। शेर पालने के लिए आदिवासी समाज को जंगल से बाहर किया जा रहा है, इसके अलावा कोयला निकालना हो या बांध बनाना हो हम आदिवासी को परेशान किया जा रहा, इतना ही नहीं शासन द्वारा निर्धारित राशि का भी बंदर बांट किया जा रहा है, हम अपने अधिकार और हक के लिए लोकतांत्रिक तरीके से लड़ रहे है, 26 सितंबर को भी इन्ही समस्याओं को लेकर पार्टी प्रदर्शन कर रही थी। गौरतलब है कि 26 सितंबर को पुलिस और गोंगपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई थी, जिसके बाद हमारे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, इतना ही नही जिसको भी पीली तौलिया डाले देखते हैं उसको गिरफ्तार कर जेल भेज रहे हैं जो गलत है।

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