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Bandhavgarh टाइगर रिजर्व मे हुई फिर Male Tiger की मौत जाने पीछे की वजह

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चार दिन में तीन Tiger की मौत, दो वनकर्मी घायल होने की घटना ने वन्य जीव प्रेमियों को अन्दर तक हिला दिया और park प्रबंधन पर भी सवालिया निशान लगा दिया।

Umaria – जिले के Bandhavgarh Tiger Reserve से फिर एक दुखद खबर सामने आई जहां पनपथा कोर के हरदी बीट के R F 455 अंतर्गत हाथी झील के पास आज फिर एक 10 वर्षीय Male Tiger मृत अवस्था में मिला। 4 दिन में 3 Tigers की मौत ने वन्य जीव प्रेमियों को भीतर तक हिला दिया है।
पिछले एक साल में Bandhavgarh Tiger Reserve मे 20 से अधिक Tigers की मौत हो चुकी है।

Bandhavgarh टाइगर रिजर्व मे हुई फिर Male Tiger की मौत जाने पीछे की वजह

इस मामले में पनपथा S D O फते सिंह निनामा ने बताया कि 29 फरवरी को जिस Tiger का शव मिला था, उसकी जांच करने पर पता चला था कि आपसी लड़ाई में उसकी मौत हुई थी, हमारे कर्मचारी लगातार दूसरे बाघ की तलाश कर रहे थे उसी दौरान 3 मार्च को दो कर्मचारी घायल हो गए थे। आज सुबह हमारे गश्ती दल को R F 455 में हाथी झील के पास लगभग 10 वर्षीय बाघ का शव मिला है। जिससे साफ हो गया कि यही वो दूसरा Tiger है जिसका झगड़ा हुआ था। उच्च अधिकारियों और NTCA के प्रतिनिधि की मौजूदगी मे मृत Tiger का पोस्टमार्टम करवा कर अंतिम संस्कार कर दिया गया।

Pradesh को जहां bandhavgarh के चलते tiger state का दर्जा मिला था, वहीं कुप्रबंधन के चलते जिस तेजी से बाघों की death हो रही है, उस गति में वह दिन दूर नही जब लोग किताबों में पढ़ेंगे कि कभी bandhavgarh tiger reserve विश्व मे बाघों के सबसे अधिक घनत्व के लिए जाना जाता था। ऐसा लगता है कि प्रदेश सरकार और सरकार में बैठे नुमाइंदे सभी आंख बंद कर फील गुड करने में लगे हैं या फिर कहीं अघोषित नीति तो नही है कि धीरे – धीरे tiger reserve को खत्म कर सारी वन भूमि का पट्टा देकर तुष्टिकरण की राजनीति की जाय, या फिर Forest department में कोई ऐसा काबिल अधिकारी ही नही है जो धरातल पर patrolling कर पार्क एवं वन्य जीवों की रक्षा कर सकें।
यह तो तय है कि यदि tigers के मरने की गति यही रही तो जल्द ही tiger reserve समाप्त हो जाएगा।

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