Home भ्रष्टाचार लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई ने खोली शासन प्रशासन की पोल

लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई ने खोली शासन प्रशासन की पोल

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एक लाख 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते जिला आबकारी अधिकारी को लोकायुक्त रीवा की टीम ने किया ट्रैप, 6 घंटे तक चली कार्रवाई, व्हीआईपी व्यवस्था के लिए मांगी थी रिश्वत।

आज आपको लोकायुक्त रीवा के द्वारा की गई ट्रैप की कार्रवाई में जिस सच्चाई का खुलासा हुआ है हम उसको बताने जा रहे हैं। वैसे तो आये दिन कहीं न कहीं लोकायुक्त की टीम किसी न किसी अधिकारी, कर्मचारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों ट्रैप करती रहती है। लेकिन आज की कार्रवाई में जो खुलासा हुआ है उसमें सरकार और अधिकारियों के सारे कारनामे सुन कर दंग रह जाएंगे।

मामला है उमरिया जिले की आबकारी अधिकारी रिनि गुप्ता के द्वारा शराब ठेकेदार से 1 लाख 20 हजार रुपये रिश्वत लेने का। हालांकि अभी तक जिले में इतनी बड़ी रकम लेते कोई अधिकारी ट्रैप नही हुआ है। पहली बार इतनी बड़ी रकम लेने का मामला सामने आया है।
रीवा लोकायुक्त की 15 सदस्यीय टीम में डीएसपी प्रवीण सिंह परिहार के नेतृत्व में सारी कार्रवाई करते हुए ।

निरीक्षक प्रमेन्द्र कुमार परमार ने बताया कि उमरिया जिले के विंध्या समूह के शराब ठेकेदार अनीश सिंह बघेल के कार्यकर्ता नृपेंद्र सिंह से जिला आबकारी अधिकारी रिनी गुप्ता द्वारा 30 हजार रुपये प्रति माह व्हीआईपी खर्च एवं अधिकारियों के खर्च के लिए रुपये मांगे जा रहे थे जिस पर 4 माह की रकम एकमुश्त 1 लाख 20 हजार रुपये के रिश्वत की मांग की गई थी, और ठेकेदार द्वारा रकम न दे पाने पर ठेकेदार को बार बार टार्चर कर रही थी, और 14 पेटी डियूटी पेड शराब जप्त कर ली थी। जिससे जिला आबकारी अधिकारी के टार्चर से परेशान होकर ठेकेदार के कार्यकर्ता नृपेन्द्र सिंह द्वारा 28/08/2023 को लोकायुक्त कार्यालय रीवा आकर एसपी गोपाल सिंह धाकड़ से सम्पर्क कर शिकायत किया गया, बताया गया कि उमरिया की जिला आबकारी अधिकारी रिनी गुप्ता परेशान कर रही हैं और पैसा मांगा जाता है और नौरोजाबाद के पास विंध्या समूह की दुकान पर जाकर अवैध रूप से 14 पेटी शराब जप्त कर लिया गया है जब इस बात का सत्यापन कराया गया तो आरोपिया रिनी गुप्ता द्वारा बहुत सारी बातें कही गई जिसमें मुख्य रूप से कहा गया कि व्हीआईपी डियूटी का 30 हजार रुपए महीने का 4 माह का 1 लाख 20 हजार रुपया मांगे गए जो आज 1 लाख 20 हजार रुपये लेते हुए ट्रैप किया गया, और जो परीक्षण किया गया उसमें जो बात सामने आई, उसमें कहा गया कि उमरिया में जो भी व्हीआईपी कार्यक्रम होता है उसमें पैसा देना पड़ता है और अधिकारियों को ऊपर से नीचे तक पैसा देना पड़ता है। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

वहीं विंध्या शराब दुकान के संचालक नृपेंद्र सिंह ने बताया कि हमसे जिला आबकारी अधिकारी द्वारा व्हीआईपी खर्च जैसे मुख्यमंत्री के कार्यक्रम और एडीएम साहब जिनके नाम का भी जिक्र किया था एवं जिले के अधिकारियों को ऊपर से लेकर नीचे तक सभी को मैनेज करना पड़ता है जिसके लिए 40 हजार रुपए प्रति माह मांगा जा रहा था, बाद में 30 हजार रुपये प्रतिमाह पर आ गईं थी 4 माह का 1 लाख 20 हजार रुपये मांग रही थीं, कहीं कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में, निर्वाचन में, ऊपर से लेकर नीचे तक अधिकारियों के खर्च के लिए हमको देना पड़ता है। इन्होंने कहा है कि एडीएम साहब मीटिंग में बोले हैं कि लक्ष्मी पुत्र विभाग है जो खर्च के लिए पैसे दें, हम नही दे पाए तो 14 पेटी डियूटी पेड़ माल उठा लाई हैं। बार बार सिस्टम में आने को कहती रही हैं इसलिए हमने 4 माह का 1 लाख 20 हजार रुपया दिया है।

गौरतलब है कि लोकायुक्त के इस छापे ने प्रदेश सरकार की बड़ी ईमानदारी पूर्ण बातों और अधिकारियों के ईमानदारी की कलई खोल दी है, इतना ही नही यह भी सच है कि किसी भी व्हीआईपी या भोपाल से किसी उच्च अधिकारियों का दौरा कार्यक्रम होता है तो उनको जो टीए – डीए मिलता है उसका तो कहीं उपयोग होता नही है बल्कि भारी – भरकम खर्च ऐसे ही वसूले जाते हैं, फर्क इतना है कि अन्य निर्माण विभाग घटिया कार्य करवा कर खर्च को मैनेज करते हैं, लेकिन इस विभाग में कोई निर्माण कार्य न होने के कारण ठेकेदार को ही प्रताणित किया जाता है। यही कारण है कि करोणों के भवन पहली ही बरसात में चूने लगते हैं और 4 वर्ष में भवन धराशायी हो जाता है।
यदि नेता, मंत्री, मुख्यमंत्री और अधिकारी अपने कार्यक्रमों के लिए बजट की खुद व्यवस्था करें तो इतना भ्रष्टाचार नही होगा।

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