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जानिये मानपुर विधानसभा क्षेत्र के पाली जनपद का विकास एक नजर में

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उमरिया – जिले की दोनो विधानसभा में एक है मानपुर विधानसभा क्षेत्र 90 जिसमें दो जनपद पंचायत आती है, पहली है मानपुर और दूसरी है पाली। जहां लगातार 2003 से भाजपा का कब्जा है। 2008 में परिसीमन होने के बाद वर्तमान में प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री मीना सिंह लगातार विधायक हैं और इस बार भी विधानसभा क्षेत्र मानपुर 90 से ही भाजपा की प्रत्याशी होने के साथ अपना नामांकन दाखिल कर चुकी हैं।

इतना ही नही मानपुर विधानसभा क्षेत्र के सम्पूर्ण विकास की बात भी कर रही हैं, उनका कहना है कि अब जनता जो काम कहेगी वह किया जाएगा। विकास के कार्य तो बहुत हो चुके हैं, स्कूल, कालेज, आईटीआई सब खुल चुका है, स्कूलों के भवन बन चुके हैं, पुल पुलिया, बांध बन चुके हैं।

पिछले अंक में आपने मानपुर जनपद पंचायत के विकास को जाना है, अब आइए आपको पाली जनपद पंचायत के सारे विकास की हकीकत बताते हैं,

पाली नगर परिषद से नगर पालिका हो गई लेकिन विकास इतना हुआ कि पाली नगर के लोग बरसात के मौसम में परेशान हो जाते हैं, उनके घरों में पानी घुसता है, बेचारे अपने घरों के सामान को इधर से उधर करते रहते हैं।
पाली नगर में बस स्टैंड नही है। शुलभ शौचालय तो बना है लेकिन इतनी दूर कि बस से उतरने वाली सवारी को नजर ही नही आता है।
अब थोड़ा आगे चलें तो नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 3 और 4 विंझला में जाने के लिए पहले रामपुर फाटक से 1 किलोमीटर की दूरी थी अब जीरो पॉइंट से घूम कर जाने में 7 किलोमीटर की दूरी हो गई।पाली नगर में कोई सामुदायिक भवन नही है, नाम मात्र के लिए बना है तो वह भी स्कूल बाउंड्री के भीतर है जो आम जनता के काम नही आता।

पोंडी और गोरईया के बीच रपटा पुल आज तक नही बन सका, अभी तक 4 पिलर ही खड़े हो पाए हैं। लोग आने जाने को परेशान होते हैं।

अब बिजली की तरफ देखें तो पाली जनपद के ग्राम सांस, चिनकी, गढ़रोला, गढ़कुर, जमुहाई, खाम्हा, गजवाही, पटपरिहा के लोग आज तक बिजली नही देखे, किस रंग की होती है, उसका उजाला कैसा होता है।

घुनघुटी रेल्वे स्टेशन जाने वाली 2 किलोमीटर सड़क आज तक नही बनी।

सड़कों का विकास इतना हुआ है कि पाली से शहडोल जाने में लोग कतराते हैं।

कुमुरदु में कांग्रेस सरकार ने विशाल गौशाला का निर्माण तो करवाया दिया लेकिन भाजपा की सरकार गौमाता को भोजन नही दे सकी जिसके चलते सभी गाय सड़कों पर नजर आती हैं।

संजय गांधी ताप विद्युत गृह की नींव 20 जुलाई 1981 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा रखी गई और पहली यूनिट नवम्बर 1991 में क्रियाशील हो गई, उसके बाद लगातार अन्य यूनिटों की स्वीकृति लगातार कांग्रेस सरकार में मिलती गई और सभी यूनिट क्रियाशील होती गई। उसके बाद सितंबर 2008 में लालकृष्ण आडवाणी जीआये थे तब शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री और कैलाश विजयवर्गीय ऊर्जा मंत्री रहे, आडवाणी जी ने 500 मेगावाट की यूनिट को लोकार्पित किया था और उसी मंच से प्रदेश के घोषणावीर मुख्यमंत्री ने 500 मेगावाट के नई यूनिट की घोषणा तो कर दिया लेकिन आज तक पता नही है, साथ ही आये दिन कोई न कोई यूनिट बन्द ही रहती है, वहां पार्टी के बहुत से नेता फर्जी ठेकेदारी भी करते हैं, और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं क्षेत्र की विधायक ने आज तक पहल ही नही किया, कि जिले का विकास हो।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन तो बहुत बड़ा बना हुआ है लेकिन वहां बैठने और मरीजों का इलाज करने का अमला ही नही है। एक्सरे मशीन कभी चालू नही होती है।

कालेज तो खुला है लेकिन कामर्स का विषय नही है और प्रोफेसर नही हैं।

सीएम राइज स्कूल की घोषणा बन्नौदा के लिए हुई लेकिन भवन का भूमिपूजन पाली बाईपास बरबसपुर के पास किया गया।

भडारी डैम के लिए 35 आदिवासी परिवारों को आदिवासी हितैषी सरकार और क्षेत्र की आदिवासी विधायक एवं जनजातीय कल्याण मंत्री के ही विधानसभा क्षेत्र में बेदखल कर उस भूमि को दे दिया गया जिसके चलते 35 आदिवासी परिवार बेघर हो गए। जिसके सारे साक्ष्य मौजूद हैं।

ग्राम पंचायत कुरकुचा जहां के भाजपा जिला उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह सैय्याम और जिला पंचायत सदस्य बेला अर्जुन सिंह सैय्याम के गांव की स्कूल में बारिश के मौसम में कीचड़ भरा रहता है जो विकास का बड़ा नमूना है।
अभी के लिए फिलहाल इतना ही, जल्द मिलेंगे और कुछ विकास के साथ…..

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