Home निलम्बित कलेक्टर ने उपयंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी को किया निलंबित

कलेक्टर ने उपयंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी को किया निलंबित

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जिले में जिधर नजर दौड़ाएं उसी तरफ भ्रष्टाचारी भरे हुए हैं उसी कड़ी में जिले के कलेक्टर का बड़ा एक्शन, एक भ्रष्टाचारी निलम्बित।

उमरिया – कलेक्टर बुद्धेश कुमार वैद्य ने आर.के. गुप्ता, उपयंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग उमरिया को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम-9 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय कार्यालय कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जिला उमरिया नियत किया गया है। निलंबन अवधि में इन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
कलेक्टर बुध्देश कुमार वैद्य ने कार्यालय सहायक यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी उपखंड उमरिया का आकस्मिक निरीक्षण किया, जिसमें पाया गया कि कार्यालय में कान्ट्रेक्टर लेजर, एम.बी. मूवमेन्ट रजिस्टर संधारित नहीं किया गया है, साथ ही कई कार्यों (यथा ग्राम बड़वार मेसर्स राजेश सिंह) में आर.के. गुप्ता, उपयंत्री द्वारा सहायक यंत्री एवं उपयंत्री दोनों के रूप में मापों का सत्यापन पर हस्ताक्षर किया जाना पाया गया है। बिल एमबी के अवलोकन में यह तथ्य प्रकाश में आया कि मापों की राशि अंकित करने के दौरान नियमों के विपरीत गुप्ता द्वारा मेजरमेंट एमबी की प्रविष्टियां बिल एमबी में नहीं दर्ज की।
मेसर्स आर.के. गुप्ता कान्सट्रेक्शन, रावेन्द्र गुप्ता का अनुबंध कार्य 5 अगस्त 2021 को पूर्ण किया जा चुका है तथा संविदाकार द्वारा कार्य हैण्डओव्हर भी किया जाना पाया गया परन्तु दस्तावेजों के परीक्षण उपरांत संविदाकारों का भुगतान आज दिनांक तक लंबित पाया गया। लंबित भुगतान के संबंध में आर.के. गुप्ता, उपयंत्री (प्रभारी सहायक यंत्री) द्वारा दिया गया जवाब संतोषप्रद नहीं था। दस्तावेजों के परीक्षण एम.बी. में बिल भुगतान राशि रूपये 2006000 (बीस लाख छह हजार रुपये) के पश्चात माप पुस्तिकाओं में देयकों/ व्हाउचर्स की एन्ट्री नहीं की गई।
मेसर्स आर. के. गुप्ता कान्सट्रेक्शन, रावेन्द्र गुप्ता के अनुबंध का कार्य दस्तावेजो के अनुसार पूर्ण पाया गया परंतु संविदाकार का भुगतान उक्त पैकेज में भी लंबित पाया गया। अनुबंध रजिस्टर के अवलोकन से स्पष्ट है निर्माण कार्यों के लिये आंमत्रित निविदाओं में राशि 20 प्रतिशत अधिक की जाकर स्वीकृति प्रदान की गई जबकि सामान्य तौर पर निविदाये एसओआर दर से कम किया जाने का ट्रेंड रहा है। अनुबंध एलएओ जारी होने के बाद 15 दिन के अंदर संविदाकार के द्वारा अनुबंध का संपादन किया जाना अनिवार्य है। जबकि इस अनुबंध के अंतर्गत अनुबंध एक माह के उपरांत संपादित किया जाना पाया गया है। उक्त अनुबंध में निर्धारित समयावधि पूर्ण होने के उपरांत भी वित्तीय एवं भौतिक प्रगति शून्य है। शून्य प्रगति के उपरांत भी संविदाकार से किसी प्रकार का स्पष्टीकरण अभिलेखीय नहीं है। अनुबंध में कार्यपूर्णता उपरांत बिना पूर्णता प्रमाणपत्र जारी किये ही पंचायत को हैण्डओव्हर कर दिया गया। आंगनबाडियों में जल आपूर्ति के संबंध में जारी कार्यादेशों में एक माह में कार्य पूर्ण किये जाने के आदेश जारी किये गये थे किंतु कई कार्य तीन वर्ष उपरांत भी पूर्ण नहीं कराया गया है और न ही संबंधित ठेकेदार को निलंबित किया गया तथा न ही उन कार्यों की समय वृद्धि प्रस्ताव / आदेश संलग्न पाया गया। जिसके लिये श्री गुप्ता प्रथम दृष्टया दोषी पाये गये है।
ज्यादातर कार्य 80 प्रतिशत होने के उपरांत रोके गये है उन्हें आज दिनांक तक पूर्ण नहीं कराया गया और ऐसे कार्यों को विभागीय समीक्षा बैठकों में समीक्षा के लिये भी श्री गुप्ता के द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया है। पाई गई अनियमितता के लिये आर.के. गुप्ता, उपयंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग उमरिया प्रथम दृष्ट्या दोषी पाये गये है जो म.प्र. सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम-3 के विपरीत होकर कदाचरण की श्रेणी में आता है।
गौरतलब है कि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मेसर्स आर के गुप्ता कंस्ट्रक्शन रावेन्द्र गुप्ता, इनके भाई हैं और मेसर्स आर के गुप्ता कंस्ट्रक्शन का सारा काम भी खुद ही करते हैं। वैसे इनके कार्यो की गहनता से जांच करवाई जाए तो करोड़ों के घोटाले सामने आएंगे।

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