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जंगली हाथी के हमले से महिला समेत दो घायल जानिये इसके पीछे की वजह

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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे वन्य जीव और मानव के बीच द्वंद का प्रमुख कारण शासन की नीतियां

उमरिया – जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अंतर्गत आने वाले मानपुर रेंज के ग्राम बड़ारी में जंगली हाथी ने कोहराम मचाया। गांव की ही महिला नान बाई पति प्रहलाद सिंह उम्र 45 वर्ष सहित खेल्ला पिता स्व सम्मू पनिका उम्र 55 वर्ष को गम्भीर रूप से घायल कर दिया है। इस घटना में महिला नान बाई ज्यादा गम्भीर होने के कारण मानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रिफर की गई है।


108 के ईएमटी मुस्ताक खान ने बताया कि जंगली हाथी ने महिला की कमर को गंभीर रूप से जख्मी किया है। हादसे में मानपुर अस्पताल में इलाजरत वृद्ध खेल्ला पनिका के भी कमर और पैर में गम्भीर चोट आई है, हालांकि खेल्ला का इलाज मानपुर में ही हो रहा है। इस घटना में जंगली हाथी ने पहले वृद्ध महिला को घायल किया है, बाद में शौच के लिए जाते समय खेल्ला को भी घायल किया है। वहीं 108 के ईएमटी मुस्ताक खान ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते के साथ ग्राम बड़ारी पहुंच कर दोनो घायल को तत्काल मानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया है।


गौरतलब है कि जंगली हाथी को गुरुवार को वन अमला द्वारा शहडोल सीमा से सटे ग्राम सन्ना बिसनपुरवा के जंगल की तरफ हांका गया था, परन्तु रात भर चलने के बाद पुनः मानपुर से महज 5 किमी दूर ग्राम बड़ारी पहुंच गया और एक ही गांव के दो लोगों को घायल किया है।
खास बात यह है कि बुधवार को यह हाथी मानपुर तहसील के पास खुटार में खेत में टहल रहे वृद्ध अरुणव दयानंद पयासी को मौत की नींद सुला दिया था और उनके पोते नयन पयासी को भी घायल कर दिया था। तभी से इस जंगली हाथी को मानपुर क्षेत्र की हरियाली भा गई और लगातार ग्रामीणों पर हमला कर रहा है।

जानकारों की माने तो छत्तीसगढ़ में वनों की अंधाधुंध कटाई होने के बाद इन हाथियों को रहवास की कमी पड़ गई जिसके कारण से घने जंगल की तलाश में मध्यप्रदेश की तरफ रुख कर दिए और यहां भी सरकार की तुष्टीकरण की नीति के चलते लगातार वनों का क्षेत्रफल घटता जा रहा है। बिना जांचे परखे वन भूमि के पट्टे दिए जाने लगे या फिर जो टीम गठित की गई वह अपना फीलगुड कर जमीनों का सत्यापन कर दी और उसके पट्टे आबंटित कर दिए गए। जबकि ईमानदारी से देखा जाय तो 4 से 5 प्रतिशत लोग ही वास्तविक हकदार हैं, बाकी फर्जी लोग ले देकर पट्टा बनवा लिए, जिसका जीवंत उदाहरण आपको देखने को मिल जाएगा, वन विकास निगम में आर एफ 64 मझौली खुर्द और सीतापाल में जहां वन विकास निगम द्वारा अपनी आयु पूर्ण कर चुके वृक्षों की कटाई करवाई गई और उसके बाद उसी भूमि पर वहीं के लोग अतिक्रमण कर कोदो, कुटकी की बुआई कर दिए और उस भूमि पर अपना हक जताने लगे। यह एक जगह नही हर तरफ की स्थिति है।


अब दूसरी तरफ देखें तो वर्ष 2018 में लगभग 40 से 50 हाथियों का झुंड बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की सीमा में आ गए और जंगलों में अपना ठिकाना बना लिए लेकिन समय के साथ वो टुकड़ों में बंटते गए और कुछ अपने झुंड से अलग हो कर रहवासी इलाके में पहुंच गए। वहां उनको भोजन की जरूरत पड़ने पर खेतों में जाकर फसल को नुकसान पहुंचाने लगे। ग्रामीण और वन विभाग उनको जंगल की तरफ ढकेलने लगे लेकिन वन भूमि पर खेती होने के कारण उनको रास्ता नही मिला तो मानव और हाथी द्वंद शुरू हो गया। वह द्वंद इतना बढ़ गया कि सामने यह स्थिति आने लगी। हालांकि सरकार द्वारा 3 हाथियों को पकड़ने का आदेश कर दिया गया है जिसमे 1 अनूपपुर जिले से और 2 उमरिया जिले में चिन्हित किये गए हैं और उन पर काम भी शुरू कर दिया गया है।
वहीं दूसरी तरफ शासन की नीति भी मनुष्य को वन्य जीवों का दुश्मन बनाने में सहायक है। जानकारी के अनुसार राजस्व सीमा में वन्य जीवों द्वारा फसल की क्षतिपूर्ति तब दी जाती है जब 50%फसल का नुकसान हो वह भी दो साल बाद राजस्व विभाग द्वारा दिया जाता है, जबकि इसमें यदि संसोधन कर दिया जाय और जितनी फसल वन्य जीवों द्वारा चौपट की जाय उतने का आंकलन कर तत्काल क्षतिपूर्ति दी जाय तो यह द्वंद कम हो सकेगा।

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