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महिला आदिवासी जनप्रतिनिधि से एसडीएम ने किया अभद्रता

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उमरिया – जिले के मानपुर एसडीएम नेहा सोनी पर आदिवासी नेत्री और जनपद सदस्य ने अपशब्दों का प्रयोग करने एवं जातिगत प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए जिले के कलेक्टर को ज्ञापन देकर न्याय की मांग की है।

कलेक्टर को ज्ञापन देते

उमरिया जिले के मानपुर तहसील में पदस्थ एसडीएम नेहा सोनी पर फिर एक बार आदिवासी नेत्री और जनपद पंचायत सदस्य ने प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए जिले के कलेक्टर को कांग्रेस नेताओं के साथ ज्ञापन सौंपकर उचित कार्रवाई की मांग की है। हालांकि एसडीएम नेहा सोनी का यह कोई पहला मामला नही है, पूर्व में भी ये गुना जिले में पदस्थ रहने के दौरान भी विवादों में घिरी रहीं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि प्रदेश के मुखिया आदिवासियों के मसीहा कहलाते हैं, आदिवासी हित की बात करते हैं, अब सभी को लाड़ली बहन का दर्जा दे दिए और उन्ही की आदिवासी विभाग की मंत्री के विधानसभा क्षेत्र की रहने वाली उन्ही के समाज की जनपद सदस्य को एसडीएम जातिगत और अपशब्दों का प्रयोग कर प्रताड़ित कर रही है।

ग्राम झाल में विवाद


जिससे क्षुब्ध होकर जिले के कलेक्टर को ज्ञापन देकर उचित कार्रवाई की मांग की है।

आदिवासी नेत्री जनपद सदस्य रोशनी सिंह बताई कि 22 मार्च को ग्राम झाली टोला झाल निवासी नत्थू लाल पाल पिता देवीदीन पाल को सुबह 6:30 बजे बाघ सड़क से घसीट कर ले जाकर जंगल में मार दिया जिसकी सूचना गांव वालों को लगी पूरे गांव वाले एकत्रित हो गए और उन्होंने वन विभाग को सूचना दिया मगर वन विभाग के अधिकारी 11:30 बजे दिन वहां पहुंचे तब मेरे को भी सूचना दी गई मैं वहां पहुंची और वहां से तत्काल कलेक्टर साहब को फोन की कि सर यहां ऐसी ऐसी स्थिति हो गई जिस पर कलेक्टर साहब द्वारा कहा गया कि आप जनप्रतिनिधि हैं गांव के लोगों को समझाइए हम वहां तत्काल अभी मानपुर एसडीएम को भेज रहे हैं। तब तक लगभग 3:00 बज गए थे और कहीं कुछ भी कार्यवाही नहीं हो रही थी गांव वाले लगातार आक्रोशित हो रहे थे कि कलेक्टर साहब आए तो हम उन्हीं को अपनी बात सुनाएंगे मगर मानपुर एसडीएम जब पहुंची।

रोशनी सिंह पीड़ित जनप्रतिनिधि

तो वहां भीड़ भीड़ देखकर अपना आपा खो दी और सभी से कहने लगी कि यहां भीड़ क्यों लगाए हो फिर की क्या जरूरत है जबकि लगातार चार पांच घटनाएं वहां हो चुकी हैं ग्रामीणों ने मेरे से कहा कि मैडम आप जाकर के बात करिए एसडीएम साहब से जब हम एसडीएम साहब से बात करने गए कि कलेक्टर साहब को आप फोन करिए वह यहां आए गांव वाले अपनी समस्या उनको सुनाना चाहते हैं तो एसडीएम साहब ने मेरे को बुरी तरह से अपमानित किया और कहा कि आप अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए यहां आ गई हैं आपके यहां क्या जरूरत है आप यहां से तत्काल चली जाइए तब मैं बोली कि मैडम मैं जनप्रतिनिधि हूं और मेरे को गांव वालों ने बुलाया है तो बोली जनप्रतिनिधि हो या कुछ भी हो रहोगी तो गोंड़ ही। ग्रामीणों ने इसका विरोध भी किया मेरे को बहुत ही अधिक बुरा लगा जिसके चलते आज मैं यहां कलेक्टर साहब को ज्ञापन देने आई हूं कि इस ढंग से सार्वजनिक जगह पर मुझ आदिवासी जनप्रतिनिधि का अपमान किया गया है इसलिए श्रीमान से निवेदन है कि इसकी जांच के करा कर उचित कार्यवाही की जाए।

ओमकार सिंह बबलू जिला पंचायत सदस्य

वहीं इस मामले पर जिला पंचायत सदस्य ओमकार सिंह बबलू ने बताया कि एसडीएम नेहा सोनी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के समय मे करकेली में भी यही रवैया अपनायी थीं और भारतीय जनता पार्टी की सरकार अधिकारियों से जो कृत्य करवा रही है उसको कांग्रेस कभी बर्दाश्त नही करेगी हमारा निवेदन है कि इसको रोका जाय नही तो कांग्रेस पार्टी उग्र आंदोलन करेगी।
इस मामले में जिले के कलेक्टर कृष्ण देव त्रिपाठी ने बताया कि ज्ञापन प्राप्त हुआ है उसकी जांच कराई जाएगी और जो भी जांच में सामने आएगा वैसी कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि जहां एक तरफ बाघ के हमले से लगातार लोगों की जान जा रही है वहीं एसडीएम का इस तरह का रवैया आम जनता में आक्रोश फैला रहा है जबकि प्रशासनिक अधिकारियों को आम जनता के साथ सहानुभूति पूर्वक बात करके उनकी समस्याओं को हल करना चाहिए।

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