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खुले में शौच ने ली 2 नाबालिक किशोरियों की जान, जानें ODF का सच

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ODF ग्राम पंचायत की 2 नाबालिक किशोरियां खुले में शौच के लिए गईं और लौटते समय TRAIN से कट कर हुई दोनो की DEATH

खुले में शौच ने ली 2 नाबालिक किशोरियों की जान, जानें ODF का सच

UMARIA – जिले में दिल दहला देने वाली घटना कल देर शाम घट गई। वाकया यह रहा कि दो नाबालिक किशोरियां अपने घर से शौच के लिये रेल्वे लाइन को पार कर गईं और वापस आ रही थीं तभी UP लाइन से शालीमार एक्सप्रेस और DOWN लाइन पर लाइट इंजन आ गया और UP लाइन के चालक द्वारा हॉर्न देने के बाद भी दोनो किशोरियों ने न तो हॉर्न की आवाज सुनी और न ही ट्रेन की तरफ देखीं, जिसका परिणाम हुआ कि उनके शरीर के परखच्चे उड़ गए।

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मामला यह रहा कि जिले से गुजरने वाली बिलासपुर कटनी रेल खण्ड के नौरोजाबाद रेल्वे स्टेशन से कुछ दूर ग्राम सस्तरा के पास UP लाइन के POLE नम्बर 955/17 से 19 के बीच ग्राम सस्तरा निवासी 16 वर्षीया नाबालिक अंजू कोल पिता रामकिशोर कोल एवं 11 वर्षीया नाबालिक पार्वती कोल पिता लक्ष्मी कोल कल देर शाम घर से शौच के लिए रेल्वे लाइन पर करके गई थीं और वापस लौटते समय UP लाइन से आ रही शालीमार एक्सप्रेस ट्रेन का हॉर्न नही सुन सकीं और लाइन पार करने के दौरान RUN OVER हो गईं।

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इस मामले में नौरोजाबाद T I अरुणा द्विवेदी बताईं कि दोनो मृतिका अपने घर से शौच के लिए रेलवे लाइन पार करके गई हुई थीं और वापस लौटते समय UP लाइन पर जा रही शालीमार एक्सप्रेस एवं DOWN लाइन पर लाइट इंजन आ गया और दोनो कुछ समझ पाती तब तक यह दुर्घटना घटी गई, दोनो के शरीर के टुकड़े 3 POLE के बीच फैले हुए थे और वहीं पर कीपैड वाले मोबाइल के टुकड़े भी पड़े थे एवं शरीर को एकत्रित करवा कर रात में मर्चुरी में रखवा दिया गया था और दिन में पोस्टमार्टम करवा कर शव परिजनों को सौंप दिया गया है, वहीं मर्ग कायम कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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ग्राम पंचायत सस्तरा के सचिव गौरव श्रीवास्तव ने बताया कि ग्राम पंचायत सस्तरा पिछले वर्ष ODF घोषित हुआ है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिले में जितनी भी ग्राम पंचायतें ODF घोषित हुई हैं वो सारी की सारी हवा हवाई हैं। वहीं यदि देखा जाय तो स्वच्छता अभियान के जिला समन्वयक भी जिले में फर्जी तौर पर ग्राम पंचायतों को ODF घोषित करने में भरपूर सहयोग देकर ODF का दर्जा दिलवा दिए हैं। जबकि सच्चाई यह है कि कहीं भी लोग ग्रामीण क्षेत्रों में उन शौचालयों का उपयोग नही करते और सभी बाहर की तरफ ही जाते हैं, ऐसे में सरकार के करोड़ों रुपये पानी मे डूब गए। यदि थानों में दर्ज अपराधों को देखा जाय तो ODF की कलई खुल जाएगी और ODF घोषित होने के सारे दावे फर्जी साबित हो जाएंगे।

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