Home वाइल्डलाइफ बाघिन के हमले से फिर एक की मौत एक गम्भीर ग्रामीण आक्रोशित

बाघिन के हमले से फिर एक की मौत एक गम्भीर ग्रामीण आक्रोशित

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उमरिया – जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा रेंज अन्तर्गत कोर एरिया में आने वाले ग्राम चंसुरा के पतेरा टोला में फिर बाघिन के हमले से एक महिला की मौत हो गई और एक गम्भीर रूप से घायल है। वहीं बाघिन मृतिका के शव को लगभग 3 घंटे तक मुंह मे दबाए बैठी रही। ग्रामीणों ने बताया कि बाघिन के साथ उसके 2 शावक भी हैं।

घटना के बारे में ग्रामीण प्रवीण जायसवाल ने बताया कि उस जगह से सड़क निर्माण होना था और भूरी बाई कोल पति मिजाजी कोल उम्र लगभग 45 वर्ष और तेरसिया बाई कोल पति राम बहोर कोल उम्र लगभग 30 वर्ष 3 अन्य महिलाओं के साथ जंगल से लकड़ी लेने जा रही थीं तभी बाघिन दो बच्चों समेत सामने आई और भूरी बाई कोल को घसीट कर झाड़ियों में ले जाकर रख दी और तेरसिया बाई के ऊपर भी हमला कर दी जिसमे तेरसिया बाई गम्भीर रूप से घायल हो गई, किसी तरह चिल्लाते हुए भागी तो ग्रामीण भी आवाज लगाने लगे। इतना ही दुबारा बाघिन झपट्टा मारी तो तीसरे व्यक्ति को भी घायल करने की फिराक में रही लेकिन वह किसी तरह बच गया।
वहीं वन विभाग की टीम काफी मशक्कत के बाद मृतिका भूरी बाई के शव को खींच कर बाहर निकाली और अपने वाहन में रख कर ले भागी जिससे ग्रामीण आक्रोशित होकर एसडीओ को घेरे हुए हैं और वन विभाग के कोई भी अधिकारी इस मामले में अभी कुछ भी बोलने को तैयार नही हैं, हालांकि मानपुर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी।
ताजा जानकारी के अनुसार मृतिका का शव लेकर गई वन विभाग की गाड़ी का टायर भी कोठिया के पास पंचर हो गया है जिसके चलते शव गाड़ी में रखा हुआ है और परिजन परेशान हैं।


गौरतलब है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इन दिनों कई ऐसे गैरजिम्मेदार अधिकारी हैं जिनके चलते आये दिन कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित होती रहती है। आज भी वही देखने को मिल रहा है। घटना/दुर्घटना तो संयोगवश हो जाती है लेकिन जिस परिवार के साथ ऐसी स्थिति होती है तो स्वाभाविक है कि परिजन भर नही पूरा गांव आक्रोशित होता है। ऐसी परिस्थिति में वहां पदस्थ अधिकारियों का दायित्व बनता है कि पीड़ित परिवार के साथ सहानुभूति से पेश आएं लेकिन ऐसा नही होता है जिसके चलते ग्रामीण आक्रोशित हो जाते हैं। अपनों को खोने का गम वही जानता है जिसके साथ घटना घटती है।


इस मामले में जब पनपथा रेंजर राज कृष्ण मराबी से बात किया गया तो उन्होंने अनुभूति कार्यक्रम में होने का बहाना बता कर टाल दिया वहीं जब एसडीओ वन फते सिंह निनामा से बात किया गया उन्होंने भी मामले को टालते हुए कहा कि 5 महिलाएं जंगल लकड़ी बीनने जा रही थी और यह घटना हो गई, कह कर फोन काट दिए।
गौरतलब है कि इनके ऐसे ही गैरजिम्मेदाराना रवैये के कारण आये दिन ग्रामीणों और वन विभाग के बीच झड़प होती रहती है।
ऐसे में सरकार को विशेष ध्यान देकर ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए साथ ही ऐसे गैरजिम्मेदार अधिकारियों को भी आम जनता के साथ सही रवैया अपनाने का प्रशिक्षण भी देना चाहिए।

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