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बाघ के हमले से वृद्ध की मौत किसी ने दिखाई मानवता तो किसी ने अमानवीयता

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उमरिया – जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र में लगातार तीसरे दिन फिर बाघ ने किया वृद्ध पर हमला किया था, टाइगर रिजर्व के पतौर रेंज अतंर्गत आने वाले ग्राम बमेरा में बाघ ने घर के बगल से बने सार में घुस कर कल रात भैंस के ऊपर हमला किया था, भैंसों की आवाज सुन कर देखने के लिए मवेशी मालिक 60 वर्षीय कम्मा यादव सार में गया तो बाघ ने वृद्ध पर हमला कर दिया जिससे वृद्ध गम्भीर रूप से घायल हो गया था और जिला अस्पताल से उसको जबलपुर रिफर कर दिया गया था जिसकी रास्ते मे ही मौत हो गई।

वहीं पतौर रेंजर अर्पित मेराल सूचना मिलते ही तत्काल अपनी गाड़ी से मौके पर पहुंचे वहां टाइगर मौजूद था और विभाग की गाड़ी को वहीं पर टाइगर को भगाने के लिए छोड़ कर घायल कम्मा यादव को लेकर आये थे, यहां डॉक्टरों ने हालत गम्भीर बता कर जबलपुर रिफर कर दिया था। दुखद यह रहा कि काफी प्रयास के बाद सिहोरा पहुंचते ही कम्मा यादव की मौत हो गई।

गौरतलब है कि गम्भीर घायल कम्मा यादव को रेंजर ने तो सूचना मिलते ही तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया साथ ही मानवता दिखाते हुए जबलपुर खुद अपनी गाड़ी से रवाना हो गए लेकिन जिला अस्पताल में मौजूद डियूटी डॉक्टर ने भर्ती करते समय ही बताया था कि अत्यधिक रक्तस्राव हो चुका है, जबलपुर तक पहुंच सकते हैं। अब अगर देखा जाय तो कहीं न कहीं जिला अस्पताल की भी लापरवाही नजर आ रही है, यदि डॉक्टर जिनको धरती का भगवान कहा जाता है, यहीं उसको रक्त की व्यवस्था कर देते तो शायद एक परिवार उजड़ने से बच जाता। ऐसा नही है कि यहां सर्जन नही हैं या ब्लड बैंक नही है, सभी सुविधा होने के बाद जिला अस्पताल से औपचारिकता निभा कर जबलपुर रिफर कर दिया गया। जिला अस्पताल तो रिफरल अस्पताल है ही।

अब 108 एम्बुलेंस वालों की अमानवीयता किस तरह है यह गौर करने काबिल है। नियमानुसार जहां के लिए रिफर किया जाता है वहां तक मरीज को पहुंचना उनका दायित्व है भले ही बीच रास्ते मे मरीज की मौत हो जाय। मृत्यु की पुष्टि भी डॉक्टर द्वारा की जाती है। वहीं 108 के प्रोटोकॉल की बात करें तो पीसीआर बुक में ईआरसीटी दर्ज करनी चाहिए। वहीं मृतक के पुत्र ने बताया कि आक्सीजन भी नही था और 108 के ईएमटी ने स्वयं निर्णय लेकर सिहोरा अस्पताल में घायल को मृत बता कर छोड़ दिया जबकि 108 वालों को वापस जिला अस्पताल उमरिया तक लाना चाहिए था लेकिन अमानवीयता की सारी सीमा को लांघते हुए गरीब ग्रामीण को छोड़ कर वापस भाग आये।


वहीं जब पतौर रेंजर जबलपुर पहुंच कर पता लगाएं तो किसी तरह कम्मा यादव के परिजनों से बात हुई तो तुरंत जबलपुर से सिहोरा पहुंच कर स्वयं के पास से 5 हजार रुपये में वाहन करके शव और उनके परिजनों को उमरिया जिला अस्पताल लाये जहां पोस्टमार्टम करवा कर मृतक के शव को घर तक पहुंचाए।

ग्राम बमेरा पहुंचने से पहले 4 गांव के लोग एकत्रित होकर पार्क प्रबंधन का विरोध करते रहे जिस पर रेंजर द्वारा समझाइस देकर 8 लाख रुपये जल्द दिलवाने की बात की गई। तब जाकर काफी मशक्कत के बाद मामला शांत हुआ।
एक तरफ प्रदेश के मुखिया जनता को सारी सुविधा देने का दम्भ भरते हैं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के ब्लैक लिस्टेड 108 संचालक को प्रदेश में 108 एम्बुलेंस की सुविधा प्रदान करने की जिम्मेदारी सौंप दिए हैं जिसका परिणाम आये दिन देखने को मिलता है। यही कारण है कि आये दिन 108 एम्बुलेंस सुर्खियों में बनी रहती है। आये दिन हो रही घटनाओं की तरफ प्रदेश सरकार का ध्यान नही जा रहा है बस उनका ध्यान कर्ज लेकर घोषणा करने और वोट बैंक की राजनीति करने में है, ऐसे में आने वाले चुनाव में जनता सारा हिसाब लेगी।

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