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बांधवगढ़ में आये नए मेहमान

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उमरिया – जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में विलुप्त हो चुके बारहसिंघा को फिर से बसाने की तैयारी पूरी हो गई और कान्हा टाइगर रिजर्व से बारहसिंघा की पहली खेप आज बांधवगढ में शिप्ट हो गई।

बारहसिंघा

जिसमें 8 नर और 11 मादा बारहसिंगा शामिल हैं, जिनको बाड़े में रख कर उनकी देखभाल की जायेगी।

बारहसिंघा निवास

बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व से विलुप्त हो चुके बारहसिंघा को एक बार फिर से बांधवगढ में बसाने की वन विभाग की बहुप्रतीक्षित योजना आज मूर्तरूप ले चुकी है, बारहसिंघा की पहली खेप को शिप्ट करने के कार्यक्रम में शामिल होकर प्रोजेक्ट की शुरुआत बांधवगढ़ पार्क प्रबंधन के अधिकारियों ने की।

विचरण करते बारहसिंघा

बारहसिंगा को कान्हा टाइगर रिजर्व से बांधवगढ़ लाने तक में वन्य प्राणी चिकित्सको के साथ ही विशेषज्ञ टीम की देखरेख में उन्हें बाँधवगढ़ लाया गया। आपको बता दें कि बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के मगधी एरिया मे बारहसिंघा को बसाने के लिए लगभग 50 हेक्टेयर से अधिक के जंगल मे खास तरीके का इंक्लोजर तैयार किया गया है जिसमें बारहसिंघो को रखा जाएगा, इंक्लोजर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसके अंदर कोई दूसरे जानवर प्रवेश न कर सके,यहां तक की जमीन पर रेंगने वाले सांप और अजगर भी इस इंक्लोजर के अंदर नहीं जा पाएंगे, वहीं इस एंक्लोजर की ऊंचाई इतनी रखी गई है कि कोई बाघ भी छलांग लगाकर अंदर प्रवेश नही कर सके।

सुधीर मिश्रा एसडीओ

वहीं सुधीर मिश्रा एसडीओ बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व ने बताया कि पहले वर्ष में हमको 85 बारहसिंघा लाने की अनुमति मिली है अभी हम 19 लाये हैं अभी और लाएंगे। अब इनको पकड़ने के लिए इंजेक्शन और अन्य तकनीक का उपयोग नही किया जाता है। बोमा एक तकनीक होती है उसी तकनीक से पकड़ कर लाया गया है। हमने बाड़े को इस ढंग से बनाया है कि उसमें मांसाहारी जानवर और अजगर वगैरह भी नही घुस सकते हैं साथ ही हाथी भी उस बाड़े को नुकसान नही कर सकते हैं, अभी 3 साल तक इनको इसी बाड़े में रखेंगे।

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