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महाकाल लोक घोटाला भगवान को धोखा देते हैं इंसान को ये क्या छोड़ेंगे

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महाकाल लोक घोटाला शिवराज सरकार का सबसे बड़ा पाप बिना जांच किये ही घोटालेबाजों को क्लीनचिट देकर शिवराज सरकार ने खुद को घोटाले का सूत्रधार साबित किया महाकाल लोक का उद्घाटन प्रधानमंत्री ने किया था, लेकिन घोटाले पर उनकी चुप्पी उसकी भूमिका पर भी सवाल खड़े करती है

महाकाल लोक में हुये घोटाले की उच्च स्तरीय जांच हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश से करायी जाये

उमरिया – कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए कहा कि जब पापियों के पाप का घड़ा भर जाता है, तो भगवान स्वयं माया रचकर पाप का भंडाफोड़ कर देते हैं, बीते रविवार उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर में भी ऐसा हुआ प्रतीत होता है। उस दिन 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली जिसे विज्ञान की भाषा में तेज आंधी या तूफान नहीं माना जा सकता, फिर भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उद्घाटन किये गये महाकाल लोक की भ्रष्टाचार से बनायी गई मूर्तियां गिर गयी। श्रद्धालु जानते हैं कि इससे हिन्दुओं की आस्था के केंद्र भगवान महाकाल के विग्रह और मुख्य मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, महाकाल की कृपा से शिवराज मामा के भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ जरूर हो गया।

अक्टूबर 2022 में जब प्रधानमंत्री ने महाकाल लोक का उद्घाटन किया था, तो झूठ की राजनीति करने वाली भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री माननीय कमलनाथ जी को श्रेय देने से पूरी तरह इंकार कर दिया था। लेकिन अब जब बजरंगवली के भक्त श्री कमलनाथ जी की सेवा से प्रसन्न होकर पवन पुत्र हनुमान जी ने हवा चलाकर कर सारी सच्चाई उजागर कर दी। शिवराज सरकार के मंत्री भूपेन्द्र सिंह को अपने पाप छुपाने के लिए प्रेसवार्ता करके यह बताना पड़ा कि महाकाल लोक के भव्य निर्माण का संकल्प माननीय कमलनाथ जी का था। इसी प्रेसवार्ता में मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया है और इस बात को उन्होंने जोर देकर पत्रकारों से कहा।

आज इस पत्रकार वार्ता के माध्यम से हम महाकाल लोक घोटाले में भाजपा के कारनामों को मप्र की जनता तक लेकर आये हैं। सिलसिलेवार इन तथ्यों को जानने पर सबको पता चल जायेगा कि महाकाल की महिमा का भव्य निर्माण करने का संकल्प श्री कमलनाथ जी का ही था और महाकाल लोक के नाम पर खुद का प्रचार करने और जमकर घोटाला करने का संकल्प कमीशनराज मामा का था।

महाकाल लोक में हुये घोटालों के लेकर तथ्य इस प्रकार हैं :-
दिनांक 4 सितम्बर 2018 को निविदा क्रमांक 52 / यूएससीएल / 1819 तत्कालीन शिवराज सरकार ने योजना बनायी, जिसकी अनुमानित लागत 97 करोड़ 71 लाख रुपये थी।

कमलनाथ सरकार के आने के बाद कमलनाथ जी ने इस राशि को अपर्याप्त मानते

हुये इस राशि को बढ़ाकर 300 करोड़ रू. स्वीकृत किये कार्यादेश 7 मार्च 2019
को कांग्रेस सरकार द्वारा जारी किया गया। एफआरपी की प्रतिमाओं की मजबूती हेतु आंतरिक लोहे का ढांचा बनाया जाता है, जो महाकाल लोक की प्रतिमाओं में नहीं बनाया गया। प्रतिमाओं के निर्माण में उपयोग की जाने वाली नेट की मोटायी 1200 से 1600 ग्राम जीएसएम की होना चाहिए, किंतु महाकाल लोक में स्थापित की गई प्रतिमाओं में 150 से 200 ग्राम जीएसएम की ही चाईनीज नेट उपयोग की गई।

प्रतिमाओं को बिना बेस (फाउंडेशन) के 10 फीट ऊंचे पेडिस्टल पर सीमेंट से जोड़ा गया। इसी कारण 30 किलोमीटर प्रतिघंटे की हल्की रफ्तार से चली हवा में ही प्रतिमाएं गिरकर क्षतिग्रस्त हो गई। निविदा की शर्त क्रमांक 2 जो कि पृष्ठ क्रमांक 107 पर अंकित है, में स्पष्ट निर्देश हैं कि मूर्तियों की गुणवत्ता की जांच हेतु कार्यस्थल पर ही प्रयोगशाला स्थापित करनी होगी, जो कि नहीं की गई। यदि इस्तेमाल की जाने वाली सामग्रियों का परीक्षण प्रयोगशाला में किया जाता तो प्रतिमाएं न ही गिरती और न ही खंडित होतीं। दिनांक 11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महाकाल लोक का
आनन-फानन में उद्घाटन किया और घोषणा की थी कि ये मूर्तियां न कभी गिरेंगी और न ही कभी बदरंगी होगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस दावे को चुनौती देते हुये ठीक एक माह बाद दिनांक 24 नवम्बर 2022 को स्मार्ट सिटी प्रशासन ने पीयू कलर्स बेदरकोट प्रायमर आदि का 96 लाख रू. का टेंडर निकाला, जबकि उक्त मूर्तियां तीन वर्ष की गारंटी अवधि में थीं।
मूर्तियों के इतने कम समय में बदरंग होने की वजह निविदा शर्त के अनुसार मूर्तियों की घिसाई न होना और प्रायमर तथा वेदरप्रूफ पीयू रंग का पर्याप्त इस्तेमाल न होना है। मूर्तियों में जब साधारण रंग लगाया जाता है तभी वे बदरंग होती हैं। अब सवाल यह उठता है कि 24 नवम्बर 2022 के टेंडर के माध्यम से खरीदी गई सामग्री कहां गई। उसका उपयोग क्यों और किसलिए नहीं हुआ और क्या उक्त टेंडर के माध्यम से कागजी खरीदी की गई, यह जांच का विषय है।
उज्जैन शहर में ही एक ही तरह की एक ही ठेकेदार द्वारा लगायी गई मूर्तियों के निर्माण की लागत में व्यापक अंतर सामने आया है। उज्जैन के स्थानीय सिंधी समाज द्वारा 25 फीट ऊंची मूर्ति का निर्माण 4 लाख 11 हजार रु. में करवाया गया। जबकि महाकाल लोक में 15 फीट ऊंची प्रतिमा का भुगतान 10 लाख 2 हजार रू. किया गया। साधारण गणित के आधार पर 15 फीट ऊंची प्रतिमा की कीमत अधिकतम 3 लाख रू. होना चाहिए।
कार्यादेश की शर्त क्रमांक 2 के अनुसार प्रतिमाओं की डीएलपी (डिफेक्ट लायवेंटी पीरीयड) तीन वर्ष होने के कारण क्षतिग्रस्त मूर्तियों को महाकाल लोक के एक कोने में रिपेयर किया जा रहा है। जबकि खंडित मूर्तियों को धर्मक्षेत्र में स्थापित करना वर्जित माना जाता है।
उज्जैन कलेक्टर द्वारा पांच-सात दिनों में ही मूर्तियों की पुर्नस्थापना की घोषणा की गई, जिससे स्पष्ट है कि खंडित मूर्तियों को ही जोड़तोड़ कर पुर्नः स्थापित किया जायेगा।
महाकाल लोक के लोक की भव्यता जिसे आदरणीय कमलनाथ जी आध्यामिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनाना चाहते थे, की आड़ में वर्तमान भाजपा सरकार ने दर्शनार्थियों से कई प्रकार के शुल्क वसूलकर महाकाल मंदिर में ही अव्यवस्थाओं का बोलवाला कर दिया है। आम श्रद्धालु जिससे अपने आप को ठगा महसूस करता है।
एक महिला महामण्डलेश्वर के साथ भस्म आरती के दौरान बदसलूकी हुई जिस कारण उन्हें प्रेसवार्ता लेकर भविष्य में भस्म आरती में न आने का संकल्प लेना पड़ा। प्रशासन की इस मनमर्जी से महाकाल महत्म्य का भी नुकसान हुआ है। रात्रि 10 बजे के बाद श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाते। स्थानीय श्रद्धालु लंबे समय से अपने लिये अलग दर्शन की व्यवस्था की मांग कर रहे है।


हमारा स्पष्ट कहना है कि माननीय कमलनाथ जी की मांग के अनुसार हाईकोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश से महाकाल लोक घोटाले की उच्च स्तरीय जांच करायी जाये, ताकि अपराधियों और पापियों को दंड दिया जा सके और सनातन धर्म को मानने वाले प्रदेश के जनमानस की आस्था को पहुंची चोट पर मरहम लगाया जा सके।

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