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झोला छाप की क्लिनिक सील

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कर्मचारी चला रहे थे क्लिनिक बीएमओ ने बनाया पंचनामा भारी मात्रा में अंग्रेजी दवाई हुई जप्त क्लिनिक का नही है पंजीयन

उमरिया – जिले के नौरोजाबाद स्थित 5 नंबर कालोनी में झोला छाप डॉक्टर क्लिनिक खोलकर मरीजों का उपचार वर्षों से करते आ रहे हैं। खास बात तो यह है कि क्लीनिक संचालक समीर अधिकारी के पास खुद कोई डिग्री नही है और न ही क्लिनिक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यालय में पंजीकृत है। क्लिनिक पर कथित डॉक्टर समीर अधिकारी रहे या न रहे क्लिनिक का संचालन बराबर होता है।


इतना ही नही भारी मात्रा में अंग्रेजी दवाइयां भी रहती हैं। साथ ही क्लिनिक के भीतर फर्जी डिप्लोमा होल्डर पैथालाजिस्ट भी अपनी पैथालॉजी खोल कर रखा है।
जैसा डॉक्टर वैसी पैथालॉजी, डॉक्टर जांच लिख दिया और ब्लड टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई, बस इलाज शुरू मरीज मरे या जिये पैसा तो देगा।
लगातार लोग सीएमएचओ के पास शिकायत करते रहे लेकिन उनके द्वारा कोई कार्रवाई नही किये जाने पर जब मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 में शिकायत होने पर जिले के कलेक्टर के संज्ञान में मामला पहुंचने पर, उनके द्वारा सीएमएचओ को निर्देशित किया गया तब उन्होंने करकेली बीएमओ डॉक्टर व्ही एस चंदेल के नेतृत्व में टीम गठित कर छापामार कार्रवाई कर क्लिनिक को सील करवाया गया। सील करने के दौरान भारी मात्रा में अंग्रेजी दवाइयां पाई गईं जिनको भी जप्त किया गया।

बीएमओ डॉक्टर व्ही एस चंदेल ने बताया कि जांच कार्रवाई के दौरान चिकित्सक समीर अधिकारी अपने क्लिनिक से गायब हो गए थे। इस दौरान क्लिनिक खुली थी जिससे आशंका व्यक्त की जा रही है कि चिकित्सक की उपलब्धता न होने के बाद भी मौजूद कर्मचारी मरीजों का उपचार कर रहे थे, जो एक गम्भीर मामला है।
ऐसा नही है कि जिले में एक ही डॉक्टर समीर अधिकारी है, गांव – गांव में बहुत से ऐसे झोला छाप बंगाली डॉक्टर डेरा जमाए बैठे हैं, कोई इलेक्ट्रो होम्योपैथी की फर्जी डिग्री रखा है तो कोई बिना डिग्री के ही अपनी दुकान चला रहा है।
जिले के सीएमएचओ को इनकी तरफ देखने की फुरसत ही नही है।
झोला छाप डॉक्टर तो बड़ी दिलेरी से कहते हैं कि हमारा क्या होगा हम तो सीएमएचओ साहब से हर महीने मिल आते हैं।
हालांकि उनके रवैये को देखते हुए तो ऐसा लगता है कि झोला छाप का कहना भी सही है।
जिले में फैले झोला छाप डॉक्टरों के मकड़जाल को देखते हुए तो लगता है कि सीएमएचओ की मिलीभगत से सभी लोग फलफूल रहे हैं।


स्वास्थ्य जैसी अनिवार्य सेवाओं में इतनी बड़ी चूक शर्मनाक के साथ स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को कहीं न कहीं कटघरे में खड़ा करती है। क्योंकि सीएचसी और पीएचसी में जहां डॉक्टरों की पदस्थापना हैं वहां डॉक्टर मिलते ही नही हैं, सभी लोग मिलजुल कर जिला मुख्यालय में ही अपनी डियूटी लगवा कर जिला मुख्यालय के मजे ले रहे हैं।

पैथालॉजी संचालक

अब अगर जिले में संचालित पैथालॉजी की बात करें तो जिला मुख्यालय को छोड़ कर 1 चंदिया में और नौरोजाबाद में 1 मात्र ललिता पैथालॉजी ही वैध रूप से संचालित हैं। जिले में बाकी सारी पैथालॉजी अवैध रूप से चल रही हैं जिनकी जांच रिपोर्ट का कोई भरोसा ही नही है, वो तो बस झोला छाप के इशारों पर संचालित हैं।
इन सब को देखने के बाद बड़ा सवाल यह है कि उक्त क्लिनिक और क्लिनिक के भीतर चल रही कोई कुशवाहा पैथालॉजी जिला स्वास्थ्य कार्यालय में पंजीबद्ध नही होने के बाद बीते क़ई वर्षों से संचालित इस क्लिनिक के संचालन को हरी झंडी कौन दे रहा था और किसके संरक्षण में यह क्लीनिक और पैथालॉजी संचालित हो रही है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी उक्त क्लीनिक दूसरे मामलों में दो बार सील की जा चुकी है।

शिकायत के बाद ही क्यों होती है कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग की सबसे बड़ी लापरवाही सामने आ रही है नियम को ताक पर रखकर स्वास्थ्य विभाग के द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों को बढ़ावा देने का काम जिले मे हो रहा है और साथ ही झोलाछाप डॉक्टर धड़ल्ले से अंग्रेजी दवाई कर रहे है इतना ही नही बड़ी से बड़ी बीमारियों का इलाज भी कर रहे हैं यह अलग बात है कि जब केस बिगड़ जाता है तो उसको जिला अस्पताल में भर्ती करवा कर गायब हो जाते हैं।
ऐसा लगता है कि झोला छाप को जिले के सीएमएचओ की मूक सहमति मिली हुई है। जब उसकी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 में किया जाता है तो स्वास्थ विभाग के उच्च अधिकारी कार्रवाई करने के नाम पर पल्ला झाड़ते हुए नजर आते हैं।
सीएचएमओ डॉक्टर राम किशोर मेहरा ने भी कार्रवाई किया, क्लीनिक में छापामार कार्रवाई हुई और साथ में अंग्रेजी दवाई भी बरामद की गई और उसके बाद समीर अधिकारी को नोटिस भी दिया गया और न्यायालय में परिवारवाद भी प्रस्तुत किया गया जो कि न्यायालय में विचाराधीन है उसके बावजूद समीर अधिकारी की क्लीनिक किस आधार पर संचालित हो रही थी उसकी क्लीनिक क्यों खुली हुई थी क्लीनिक को सील क्यों नहीं किया गया यह प्रश्न स्वास्थ विभाग पर उठता है।
क्या किसी की मौत का इंतजार कर रहे हैं सीएमएचओ

स्वास्थ विभाग से दिया गया जवाब 13 मार्च बीएमओ शिकायत की जांच करें एवं निराकरण करें संतुष्टि पूर्वक कार्यवाही को बंद करवाएं दूसरा जवाब 20 मार्च कार्यालय पत्र क्रमांक 250/ 2023 दिनांक 25/01/ 2023 के अनुसार नोटिस दी गई इस संबंध में नोटिस का जवाब आया है जिसमें अपनी प्रसिद्धि से इलाज किए जाने का अनुरोध किया गया है। जिले में झोलाछाप प्रैक्टिस कर रहे हैं इन लोगों के खिलाफ परिवाद की कार्रवाई रिक्त है ना तो कार्यालय के पत्र में कोई ठोस कार्रवाई के लिए जिक्र किया गया न ही सीएम हेल्पलाइन में कोई उचित जानकारी दी गई क्या स्वास्थ्य विभाग गहरी निंद्रा में सो रहा है या तो किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है यह तो समझ से परे है मध्य प्रदेश के कई जिलों में ऐसे झोलाछाप क्लीनिक को सील करने का काम जिला प्रशासन द्वारा लगातार किया जा रहा है कहीं न कहीं देखा जा रहा है कि ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों के चलते कई लोगों की मौत सामने नजर आ रही है उसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग अपने कार्यवाही से भागता हुए नजर आ रहा है।

आखिर क्यों करते हैं झोलाछाप अंग्रेजी दवाई

झोलाछाप डॉक्टर समीर अधिकारी के क्लीनिक में सीएमएचओ डॉ राम किशोर मेहरा के द्वारा अपनी टीम के साथ पूर्व में छापामार की बड़ी कार्यवाही की गई थी इस कार्रवाई पर समीर अधिकारी की क्लीनिक से कई अंग्रेजी दवाई भी बरामद किया गया था जिसे सीएमएचओ ने जप्त किया था और साथ में नोटिस भी दिया गया था। उस समय सीएमचओ डॉक्टर राम किशोर मेहरा के द्वारा बताया गया कि हमारे द्वारा लगातार ऐसे फर्जी क्लीनिक और डॉक्टरों के ऊपर कार्यवाही की जा रही है धीरे-धीरे पूरे जिले में ऐसे फर्जी चल रहे क्लीनिक और चला रहे डॉक्टरों के ऊपर कार्यवाही के साथ-साथ क्लीनिक को बंद किया जाएगा सीएमएचओ ने नौरोजाबाद पांच नंबर कॉलोनी में झोलाछाप डॉक्टर बंगाली के क्लीनिक में अंग्रेजी दवाइयों मिल है वह कार्यवाही नोटिस के बाद भी क्लीनिक धड़ल्ले से चल रही थी इनकी फर्जी क्लीनिक पूर्व में भी बंद किया गया था एसडीएम ने छापामार कार्यवाही की थी और बंगाली दवा खाने को सील किया गया था लेकिन कुछ राजनैतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण दबाव बनाकर फिर से क्लीनिक संचालित होने लगी आखिर कब ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों की दुकान हमेशा के लिए बंद होगी कई वर्षों से इनके द्वारा फर्जी तरीके से इलाज के नाम से भोली भाली जनता को लूट के कई लाखों रुपए की संपत्ति एकत्रित किये हुए हैं आखिर कब तब बंगाली दवाखाने में पूर्णतया प्रतिबंध लगेगा और मामला पंजीबद्ध होगा अब देखना यही है स्वास्थ विभाग की टीम के द्वारा की गई कार्रवाई में आगे क्या होता है।

झोलाछाप के ना रहने पर क्लीनिक में नौकर और कथित पैथालाजिस्ट भी बन जाते है डॉक्टर 

एक तरह डॉक्टर को भगवान का दर्ज़ा दिया जाता है लोग अपने बिमारी को ठीक करने के लिए जाते है लोग अपनी छोटी और बड़ी बीमारियों को ठीक करने के लिए झोलाछाप के पास जाता है कि हम कम पैसे में अपना इलाज करवा कर ठीक हो जाएंगे लेकिन उनको पता ही नहीं रहता कि वह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है और उस बीमारी को ठीक करने के चक्कर में और अन्य बीमारी शरीर के अंदर प्रवेश करती जा रही है। आप जानकर आप हैरान हो जाएंगे जब झोलाछाप डॉक्टर अपने दुकान में नहीं रहत है और कहीं बाहर चले जाते है तो उनकी क्लीनिक में उपस्थित नौकर ही चलाते हैं और जब बीमारी समझ में नहीं आता है तो फोन में झोलाछाप डॉक्टर से सलाह लेकर और दवाई गोली नौकर के द्वारा दिया जाता है।

आठवीं फेल भी बने आरएमपी

मजे की बात तो यह है कि कुछ ऐसे ही झोलाछाप है जो आठवीं 10वीं या 12वीं फेल है फिर भी यह झोलाछाप डॉक्टर अपने नाम के आगे आरएमपी लिखते हैं मुख्यालय में बैठे अधिकारियों की सांठगांठ के चलते बेखौफ फर्जी दुकाने चल रही हैं।


वहीं इस सारे मामले में जब जब सीएमएचओ डॉक्टर राम किशोर मेहरा से जानकारी चाही गई तो उनका फोन ही कव्हरेज के बाहर बता रहा है।

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