Home प्रदेश कब तक अवैध शराब लेगी लोगों की जान

कब तक अवैध शराब लेगी लोगों की जान

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बीती रात भीषण कार दुर्घटना में 5 की मौत जिसमे 4 अधिकारी शामिल रहे, बताया गया है सभी ढाबे से पी खा कर चले थे जिसके चलते कार पेड़ से टकरा गई।

उमरिया – जिले से गुजरने वाली एन एच 43 में पाली थाना अंतर्गत आने वाली पुलिस चौकी घुनघुटी क्षेत्र के ग्राम मझगंवा के पास बीती रात टर्निंग में कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई जिसमें सवार 5 लोगों की मौत हो गई। 3 का पोस्टमार्टम पाली में कराया गया है और 2 लोग जिनके बचने की उम्मीद थी उनको तत्काल शहडोल ले जाया गया था जहां इलाज शुरू होते ही उनकी मौत हो गई थी।


घटना के बारे में घुनघुटी चौकी प्रभारी एएसआई शैलेन्द्र चतुर्वेदी ने बताया था कि 5 लोग कार क्रमांक एमपी 18 जेडबी 2942 सेलटोस कार से उमरिया की तरफ से शहडोल जा रहे थे। कार में सवार शहडोल में पदस्थ पुष्पेंद्र तिवारी खनिज इंस्पेक्टर, अवनीश दुबे जिला प्रबंधक लोक सेवा शहडोल, प्रकाश जगत जिला पंचायत शहडोल, दिनेश सारीबा सब इंजीनियर गोहपारू एवं अमित शुक्ला जो पुष्पेंद्र तिवारी के भाई लगते थे। इन सभी की उम्र 30 से 35 वर्ष के बीच है। सभी की मौत हो गई है। मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। सबसे बड़ी बात यह रही कि सभी लोग मझगवां स्थित मदारी ढाबे में बर्थडे पार्टी सेलिब्रेट करने आये थे जिसमें 10 लोग दो गाड़ियों से रहे, सभी लोग पार्टी मनाते रहे मस्ती करते रहे, ढाबे वाला भी मन लगा कर शराब परोसता रहा और कुछ लोग को कम नशा हुआ और कुछ को ज्यादा, जिनको कम हुआ वो तो बच गए लेकिन जिनको ज्यादा हुआ वो काल के गाल में समा गए। 5 हंसता खेलता परिवार एक झटके में उजड़ गया।
वैसे यह कोई पहला मामला नही है, आये दिन मौत होती है लेकिन इस 5 लोगों की सामूहिक मौत ने सभी की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। सभी की जुबान पर एक ही सवाल है कि आखिर सरकार और अधिकारी सभी अवैध शराब बिक्री और पैकारी पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं। आये दिन किसी न किसी घर का चिराग नशे के आगोश में समा कर बुझ रहा है। शासन और प्रशासन दिखावे के लिए नशा मुक्ति अभियान चला कर, शपथ दिला कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेती है। दूसरी तरफ कमीशनखोरी और महीने की अवैध कमाई के चलते उनको अवैध पैकारी नजर ही नही आती है और खुले आम गांव गांव, ढाबों, होटलों, किराना दुकानों, पान ठेलों, गुमटियों में अवैध देशी और अंग्रेजी शराब की बिक्री नजर नही आती है। यदि नजर आती है तो गांवों में आदिवासियों द्वारा बनाई जाने वाली शराब, जिस पर प्रतिदिन माइनर एक्ट की कार्रवाई कर कोरम पूरा कर दिया जाता। शराब ठेकेदारों द्वारा कराई जा रही अवैध पैकारी नजर भी कैसे आयेगी, वो तो महीने की एक मुश्त रकम जो पहुंचा रहे हैं। प्रदेश के मुखिया का ज़मीर तो इस मामले में कुछ बोल ही नही रहा है, वो तो कम्पोजिट शराब दुकान खुलवा दिए ताकि एक ही जगह सब कुछ मिल जाय।
माताएं, बहने, बहू, बेटियां पुकार रही हैं, मामाजी अब तो पैसे की तरफ न दौड़ो, शराब दुकानों को बन्द करवा दो, अवैध पैकारी बन्द करवा दो, ताकि बेटे, भाई, पति, दामाद सभी की जान बच सकें, असमय विधवा होने से बहू, बेटियां बच सकें, मांओं की गोद सूनी होने बच सकें।

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