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विश्व आदिवासी दिवस पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने फोड़ा बम

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जन जातीय कार्य मंत्री पर 30% कमीशन लेकर बस्ती विकास योजना मद में विद्युतीकरण के नाम पर 100 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार करने का लगाया आरोप

उमरिया – गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राधेश्याम ककोडिया ने विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर प्रेस कांफ्रेंस कर प्रदेश की जन जातीय कार्य विभाग मंत्री और मानपुर 90 विधानसभा क्षेत्र से विधायक मीना सिंह पर आरोप लगाते हुए बताया कि प्रदेश में इनसे भ्रष्ट मंत्री कोई नही है।

आइए आपको प्रदेश की ईमानदार भाजपा सरकार का चेहरा दिखाते हैं। अभी मात्र एक ही विभाग की बात करें। वह भी उसकी जिस पर सीधे मुख्यमंत्री की नजर रहती है वह है प्रदेश का जन जातीय कार्य विभाग, इस विभाग में मात्र एक ही मद में लगभग इस पंचवर्षीय में 80 से 100 करोड़ का घोटाला हो गया।

प्रदेश सरकार का सबसे महत्वपूर्ण विभाग है जनजातीय कार्य विभाग और जिसकी मंत्री हैं उमरिया जिले के मानपुर विधानसभा क्षेत्र 90 से विधायक मीना सिंह। इस विभाग के मंत्री के पास हर वर्ष बस्ती विकास योजना मद में व्यय करने के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये रहते हैं, जिसमे से 20 % राशि मंत्री स्वविवेक से व्यय कर सकते हैं। अब देखा जाय तो 5 वर्ष में स्वविवेक से व्यय करने वाली राशि ही 80 से 100 करोड़ रुपये होती है। डेढ़ वर्ष के लिए प्रदेश में बनी कांग्रेस की सरकार में रहे अजाक मंत्री ओमकार मरकाम द्वारा इस मद की राशि का उपयोग नही किया गया, इसलिए सारी राशि बची रह गई और उसका उपयोग वर्तमान मंत्री मीना सिंह व्यय कर रही हैं। वहीं बस्ती विकास मद से अनुसूचित जनजाति बस्ती विकास योजना अंतर्गत विद्युतीकरण कार्य हेतु मात्र उमरिया जिले के दो जनपद पंचायत मानपुर और पाली में मिला कर 9 करोड़ 7 लाख 80 हजार रुपया वर्ष 2022 में स्वीकृत किया गया था। जिसमें कुल 87 कार्यों हेतु स्वीकृति दी गई थी।
जनपद पंचायत पाली एवं मानपुर की पंचायतों में कार्य कराए जाने थे।
जनपद पंचायत पाली में 62 कार्य, एवं जनपद पंचायत मानपुर में 25 कार्य स्वीकृत किये गए हैं।
जिसमे जनपद पंचायत पाली में 6 करोड़ 52 लाख 80 हजार रुपये का कार्य स्वीकृत हुआ है।
जनपद पंचायत मानपुर में 2 करोड़ 55 लाख का कार्य स्वीकृत हुआ है।
वहीं देखा जाय तो जनपद पंचायत मानपुर में 1 करोड़ 90 लाख रुपये आहरित करवा लिए गए।
सारे कार्यों के लिए एजेंसी ग्राम पंचायत को बनाया गया था। जानकारी मिली है कि प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री द्वारा सरपंचों को फोन पर धमकी देकर सारी राशि का भुगतान भी करवा लिया गया है।
सारे मामले में यह भी जानकारी मिली है कि जनजातीय कार्य विभाग के पास अभी तक ग्राम पंचायतों से कार्य करवाने के लिए प्रस्ताव भी नही प्राप्त हुआ है। अब सवाल यह उठता है कि जब ग्राम पंचायत प्रस्ताव ही नही दी तो किस आधार पर सारे कार्य स्वीकृत हो गए। नियमानुसार सबसे पहले ग्राम सभा की बैठक में प्रस्ताव पारित किया जाता है कि पंचायत में इस जगह पर इस कार्य की आवश्यकता है। उसके बाद उसी प्रस्ताव को संबंधित विभाग को भेजा जाता है उसके बाद टीएस और एएस की प्रक्रिया होती है।
हालांकि देखा जाय तो तकनीकी स्वीकृति लोकनिर्माण विद्युत यांत्रिकी विभाग द्वारा दी गई है और उन्ही को मूल्यांकन कर सीसी जारी करनी है।
संबंधित विद्युत विभाग एवं लोक निर्माण ई & एम विभाग के अधिकारियों को लालच और धमकी देकर फर्जी भौतिक सत्यापन करवा लिया गया है।


सारे कार्यों को यदि आप लोग मौके पर जाकर देखें तो जितनी स्वीकृति मिली थी उतने कार्य हुए ही नही हैं, यदि सारे कार्यों का आकलन करें तो बामुश्किल 10 से 20 प्रतिशत कार्य हुआ है। जिसके कारण लगाए गए ट्रांसफार्मर और केबल कितना लोड लेगी और कितने दिन हमारे आदिवासी भाईयों को लाइट मिलेगी। वहीं खास बात यह है कि जहां बिजली की जरूरत है वहां विद्युतीकरण हुआ ही नही।
अब अगर देखा जाय तो प्रदेश के मुख्यमंत्री हर जगह भाषण देते है कि हम भ्रष्टाचारियों को बख्शेंगे नहीं।
इसी तरह हर पंचायतों में सरपंच और सचिव पर मंत्री मीना सिंह द्वारा बिना मूल्यांकन, बिना सीसी जारी हुए सारी रकम निकलवा ली गई है।
अब दूसरी तरफ देखा जाय तो मंत्री मीना सिंह द्वारा खुले आम 30% कमीशन लेकर कार्यों का बंदरबांट किया गया है। जिला प्रशासन को सारी जानकारी होने के बाद भी मुख्यमंत्री के दबाब के चलते कोई भी कार्रवाई नही की जा रही है। जिससे साफ जाहिर हो रहा है खरीद फरोख्त कर बनाई गई सरकार में सारे भ्रष्ट मंत्रियों को विभाग आबंटित कर पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार करने की खुली छूट दी गई है। वैसे तो जब मुख्यमंत्री ही भ्रष्ट हैं तो सारे मंत्री तो भ्रष्ट होंगे ही। साफ देखा जा सकता है कि जनजातीय कार्य मंत्री मीना सिंह द्वारा बस्ती विकास योजना मद में 100 करोड़ रुपये का प्रूव्ड घोटाला कर सारा रुपया मुख्यमंत्री के साथ मिल कर डकार लिया गया है।
आदिवासी हित की बात करने वाले मुख्यमंत्री और आदिवासी विभाग की मंत्री, आदिवासी विधानसभा से चुनी गई विधायक और खुद आदिवासी होकर आदिवासियों के हित पर कुठाराघात करने वाली मंत्री से और क्या अपेक्षा कर सकते हैं।


गोंडवाना गणतंत्र पार्टी इस मामले को छोड़ेगी नही, आदिवासी जनजातियों के विकास के लिए हमेशा से गोंडवाना गणतंत्र पार्टी प्रतिबद्ध है और प्रतिबद्ध रहेगी, क्योंकि जल जंगल और जमीन की लड़ाई और जनजातियों के मान सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए हर समय हमें इसकी लड़ाई लड़नी पड़ेगी तो हम लड़ेंगे।


वहीं दूसरी तरफ विशाल रैली निकाल कर महामहिम राष्ट्रपति के नाम जिले के कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा गया, हालांकि आदिवासियों की रैली में भाजपा के भी आदिवासी नेता शामिल हुए लेकिन जैसे ही अपनी मांगों को लेकर पूरा आदिवासी समुदाय क्षेत्रीय विधायक और जनजातीय मंत्री मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू किए सभी भाजपाई आदिवासी नेता रैली से गायब हो गये।
इस रैली ने साफ कर दिया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भले ही जितना चुनावी प्रलोभन दें लेकिन जनजातीय मंत्री द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार के प्रति आदिवासी समुदाय में भारी आक्रोश है।

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