Home भ्रष्टाचार आपरेटर प्रबंधक और प्रशासक को बचा रहा सहकारिता विभाग

आपरेटर प्रबंधक और प्रशासक को बचा रहा सहकारिता विभाग

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उमरिया – जिले में न्याय और कानून व्यवस्था की हालत बद से बदतर हो गई है। फरियादी शिकायत करते रहते हैं, अधिकारियों के कान पर जूं तक नही रेंगती है। एक तरफ मुख्यमंत्री और भाजपा के नेता सभी एक स्वर से सुशासन के दावे करते नही थकते दूसरी तरफ पीड़ित न्याय की गुहार लगाते नही थकता, कार्यालयों के चक्कर लगा लगा कर ग्रामीण परेशान होता रहता है लेकिन उसकी समस्या यथार्थ में हल होने का नाम नही लेती है, हां कागजों में जरूर हल हो जाती है। जिले में भ्रष्टाचार की तो बात ही करने लायक नही है, शायद उमरिया जिला मध्यप्रदेश में सर्वोपरि है। यहां तो जिसकी शिकायत की जाती है जांच भी उसी को दी जाती है, चाहे वह नगर पालिका हो या खाद्य विभाग हो या सहकारिता विभाग हो सभी के हाल एक जैसे हैं।

जी हां हम बात कर रहे हैं सहकारी समिति कोटरी के खरीदी केंद्र बरा की जहां आपरेटर राम कुशल साहू, सहकारी समिति कोटरी के प्रबंधक रजनीश दत्त तिवारी और प्रशासक चन्द्र मणि द्विवेदी के साथ मिल कर अपनी मां मांगी बाई साहू के नाम से फर्जी रजिस्ट्रेशन 22 फरवरी 2023 को कर लिया जिसका किसान कोड क्रमांक 226452100007 है, और 8 मई 2023 को 67 क्विंटल गेंहू बेच कर पैसा भी मांगी बाई साहू के खाते में प्राप्त कर आपरेटर, प्रबंधक और प्रशासक बंदरबांट कर लिए।
जब इसकी शिकायत जिले के कलेक्टर और खाद्य विभाग को की गई तो औपचारिकता करते हुए खाद्य विभाग ने एआरसीएस को जांच करवाने के लिए पत्र लिख कर औपचारिकता पूरी कर दी गई।
वहीं एआरसीएस ने आरोपी प्रशासक चन्द्र मणि द्विवेदी को ही जांच सौंप दिया, बाद में जब एआरसीएस से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि ईमानदार सहकारिता निरीक्षक तोमर जी को जांच सौंप दिया गया है। जो जांच मिलने के 4 दिन बाद ही इंदौर में लोकायुक्त द्वारा ट्रैप किये गए मामले में निलंबित हो गए। उसके बाद दूसरे सहकारिता निरीक्षक संजय सराफ को जांच सौंपी गई। जब उनसे बात किया गया तो उन्होंने भी वही ढाक के तीन पात वाला जबाब दिया कि जांच की जा रही है।
इस मामले में जब प्रभारी एआरसीएस अभय सिंह से बात किया गया तो उन्होंने भी गोलमोल जबाब दिया कि उसमें तो मात्र आपरेटर दोषी है वैसे जांच करवाई जा रही है।
अब सवाल यह उठता है कि जब प्रदेश सरकार द्वारा सारी व्यवस्था आन लाइन की गई है तो जांच में हीलाहवाली क्यो ?

जबकि जिले के कलेक्टर द्वारा स्पष्ट पत्र जारी किया गया था कि कोई भी या किसी भी तरह की गड़बड़ी पाई जाती है तो प्रशासक, प्रबंधक सभी जिम्मेदार माने जाएंगे, ऐसे में दो माह से सारे प्रूफ दस्तावेजों की जांच करने में हीलाहवाली समझ से परे हैं, हालांकि यह मामला भी प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री के विधानसभा क्षेत्र का ही है।
दूसरी तरफ ऐसा लगता है कि सुशासन का ढिंढोरा पीटने वाले मुख्यमंत्री भी चुनावी वर्ष में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में लगे हैं और आम जनता के सामने दिखावा करने के लिए ढिंढोरा पीटते हैं कि हम प्रदेश में भ्रष्टाचारियों को छोड़ेंगे नही। उनकी घोषणा से तो लगता है कि सभी भ्रष्टाचारियों को पकड़ कर रखेंगे कि लगे रहो कमाई करते रहो हम जनता को मूर्ख बनाते रहेंगे। हालांकि इस मामले में ईमानदारी से जांच नही हुई तो क्षेत्र की जनता न्यायालय तक जाने का मन बना चुकी है।

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