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मतदान का बहिष्कार – सुरेन्द्र त्रिपाठी

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मतदान का बहिष्कार

उमरिया 02 नवम्बर – जैसे – जैसे चुनाव कि तिथि नजदीक आती जा रही है वैसे – वैसे लोगों में प्रशासनिक और राजनैतिक गतिविधियों को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है, उमरिया जिले के बांधवगढ़ विधान सभा 89 के ग्राम पंचायत पतरेई के ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लेकर मतदान का बहिष्कार करने का दिए चेतावनी | जिले के कलेक्टर एवं निर्वाचन आयोग को भी दिए सूचना |

यह है उमरिया जिले के बांधवगढ़ विधानसभा क्षेत्र 89 का ग्राम पंचायत पतरेई यहाँ 2 माह से बिजली का ट्रांसफार्मर जला हुआ है किसानों की धान की फसल पानी के बिना सूख गई, किसान शासन से कर्ज लेकर धान लगाये थे, बिजली न मिलने से किसान तबाह हो गए   आलम यह है कि गांव के पूरी पंचायत के लोग बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर और डिवीजनल इंजीनियर के यहां अपनी मांग को लेकर लगातार गुजारिश करते रहे गुहार लगाते रहे लेकिन किसी के कान में जूं नहीं रेंगा जब फसल सूख चुकी है तो गांव के लोगों को यह लगता है कि अब भूखों मरने की नौबत आ गई है

ऐसे में नाराजगी जाहिर करते हुए ग्रामीण आर या पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं, ग्रामीणों ने कहा कि इस बार बिजली नहीं तो वोट नहीं
पूर्व सरपंच गुलज़ार सिंह ने तो यहां तक आरोप लगाया कि बिजली विभाग के अधिकारी चाहे वो जे ई हों या ए ई हों या डी ई हों बात सुनने को तैयार नहीं हैं यदि किसी को लेकर जाते हैं तो कहते हैं कि नेता गिरी करते हो आचार संहिता लग जाने दो फिर चाहे मुख्य मंत्री या प्रधान मंत्री का भी फोन आयेगा कोई फर्क नहीं पडेगा ट्रांसफार्मर लगाने और उनकी फसल बचाने के एवज में 15 हजार रुपये भी ले लिए और ट्रांसफार्मर भी  नहीं लगाये,

अब हम लोग मतदान नहीं करेंगे यदि ट्रांसफार्मर लग भी जाएगा तो हम लोग मतदान नहीं करेंगे जब तक हमारी फसलों का मुआवजा नहीं मिलेगा तब तक हम मतदान नहीं करेंगे साथ ही कहे कि हमारे गाँव के 5 साल के बीच में कभी विधायक चेहरा दिखाने नहीं आये मात्र उप चुनाव में आये थे | वहीँ गाँव के ही किसान जगदीश सिंह कहे कि हमारी पूरी फसल बिजली के बिना चौपट हो गई जे ई बार – बार टाल देता है हम लोग व्यवस्था करके 20 हजार रुपये दिए उसके बाद चंदिया, उमरिया और सतना में ट्रांसफार्मर नहीं होने की बात करता है  अब तो भूखे मरने की नौबत हो गई शासन से जो कर्ज लिए हैं उसको कैसे अदा करेंगे खेतों में बोर तो है लेकिन बिजली नहीं है, हमारे गाँव में 3 ट्रांसफारमर हैं लेकिन सभी जले हुए हैं अब हम लोग मतदान नहीं करेंगे |

यह तो हुई सार्वजनिक बिजली व्यवस्था की बात हुई अब अगर बात करें खेत में निजी ट्रांसफार्मर लगवाने की वहां भी बिजली विभाग की मनमानी किसी से छिपी मनमानी बिजली विभाग की मनमानी किसी से छिपी मनमानी किसी से छिपी नहीं है ग्रामीण अपने खेत तक ट्रांसफार्मर और बिजली का खंबा ले जाकर ट्रांसफार्मर लगाने के लिए लगातार कोशिश में है बिजली विभाग से गुहार लगा रहे हैं लेकिन मदमस्त बिजली विभाग के अधिकारी न तो ट्रांसफार्मर लगा रहे हैं और ना ही उनकी सुन रहे हैं इसके पीछे कौशल सिंह गोंड का आरोप है कि बिजली विभाग के अधिकारियों को 25 अक्टूबर को 5000 रुपये देकर आये हैं और अब 6 माह बाद हमारे खेत में ट्रांसफार्मर लगेगा | वहीँ आर के जायसवाल का आरोप है कि हमारे गाँव की पूरी फसल चौपट हो गई अब हमारे पास मवेशियों के लिए भी कुछ नहीं है, हम लोग अपने घरों के जेवर गिरवी रख कर, शासन से के सी सी के माध्यम से कर्ज लेकर फसल बोये तो पूरी ख़त्म हो गई अब हम लोग मतदान का बहिष्कार करेंगे यदि ट्रांसफार्मर लग भी गया तो भी जब तक फसल का मुआवजा नहीं मिलता है तब तक हम मतदान नहीं करेंगे, इतना ही नहीं हमारी मांग है कि दोषी अधिकारियों को दण्डित किया जाय और जिनकी फसल सूख गई है उनको मुआवजा दिया जाय |

किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है पूरे देश में किसानों के आत्महत्या की खबर आए दिन सुनने को मिलती है यहां भी किसान कर्ज लेकर खेती कर अपना गुजर-बसर करते हैं लेकिन फसल सूखने के बाद अब किसान दोहरी मार झेल रहे हैं एक तो भूखे मरने की नौबत जिसमें बच्चे बूढ़े परिवार के हर सदस्य अनाज के बिना परेशान होंगे दूसरी समस्या जो कर्ज लेकर बैठे हैं अब उस कर्ज की अदायगी न करने पर किसानों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। ऐसे में किसान अब खुलेआम ये कह रहे हैं कि सूखे से बदहाल हुई फसलों पर अगर सरकार मुआवजा देगी तो ठीक वर्ना चुनाव का सामूहिक बहिष्कार करेंगे। वहीँ प्रधान मंत्री आवास योजना के माकान भी पानी की कमी के चलते अधूरे बने पड़े हैं, रिटायर्ड शिक्षक बेटाई सिंह का कहना है कि माकान बनाने का सारा सामान एकत्रित है लेकिन 2 माह से ट्रांसफार्मर जले होने के कारण पानी नहीं मिल रहा है जिसके चलते घर अधूरा बना है अब अगर ट्रांसफार्मर लग भी जाएगा तो भी हम लोग मतदान का बहिष्कार करेंगे क्योंकि हमारी पूरी फसल भी सूख गई है और जब तक हमको फसल का मुआवजा नहीं मिलेगा तब तक हम मतदान नहीं करेंगे |

वहीँ जीतेन्द्र सिंह का कहना है कि बिजली के बिना हम कहीं के नहीं रह गए अब तो हम लोग मतदान का बहिष्कार करेंगे ही और अब हमको प्रदेश से बाहर भी जाना पडेगा अपना परिवार पालने के लिए | इतना ही नहीं ग्राम पंचायत की सरपंच कल्पना तिवारी का कहना है कि हमारे गाँव की पूरी फसल बिजली के बिना सूख गई अब लोग भूखो मरने के कगार पर आ गए हैं इए में हमारे पंचायत के लोग मतदान नहीं करेंगे यदि ट्रांसफार्मर लग  भी जाएगा तो भी मतदान नहीं करेंगे जब तक ग्रामीणों के फसल का पूरा मुआवजा नहीं मिल जाता है.


इण्डिया न्यूज ने बिजली विभाग के चंदिया में पदस्थ जे ई मनोज दुबे से ग्रामीणों की समस्या के बारे में चर्चा की तो उन्होंने गेंद ग्राम पंचायत व सरपंच के पाले में डाल कर खुद को पाक साफ बताया कहा कि पूरा विवाद सरपंच के द्वारा करवाया जाता है हमारे भाजपा के मंडल अध्यक्ष राम नारायण पयासी और दिवाकर सिंह जी के द्वारा विवाद को निपटवाया गया है, गौर तलब है कि एक तरफ तो जे ई साहब आचार संहिता की धमकी ग्रामीणों को देते हैं दूसरी तरफ आचार संहिता लगे होने के बाद भाजपा के नेताओं की शरण में जाकर अपना काम करते हैं |

कांगेस नेता पुष्पराज सिंह आरोप लगाते हुए कहे कि बिजली विभाग के डिवीजनल इंजीनियर शिवेंद्र सिंह बघेल उमरिया में बीते 5 सालों से कुंडली मार कर बैठे हैं और जिला अधिकारियो के कृपापात्र होने की वजह से चुनाव के समय भी निरंकुश हो कर अपनी मनमानी बदस्तूर कर रहे हैं | जबकि निर्वाचन आयोग के निर्देश थे कि जिन जगहों में उप चुनाव हुए हैं वहां जो अधिकारी रहे होंगे उनको उस जगह से हटाया जाना चाहिए था लेकिन शिवेंद्र सिंह जो उमरिया जिले में 19 सितम्बर 2013 से पदस्थ हैं अगर देखा जाय तो ये 2013 के विधान सभा चुनाव और 2014 के लोक सभा चुनाव और पिछले साल हुए दोनों उप चुनाव सांसद और विधायक में यहीं पदस्थ रह कर सारा काम किये हैं इनके विरुद्ध निर्वाचन आयोग ध्यान दे और कार्यवाई करे |

ये सच है जब बाड़ ही खेत खाए तो रखवाली कौन करेगा जिन लोगों को ग्रामीणों ने अपना नुमाइंदा चुन कर विधानसभा तक भेजा, 2017 में हुए बांधवगढ़ विधानसभा के उप चुनाव में सूबे के मुखिया से लेकर कई मंत्री और संतरी आये और वादों का पिटारा लुटा कर चलते बने, चुनाव जीतते ही सारे वादे हवा में उड़ गए, ऐसे में ग्रामीण अब खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। यही वजह है कि पूरा गांव चुनाव के बहिष्कार को आमादा है | बांधवगढ़ विधायक शिव नारायण सिंह कहते हैं कि हम तो हर गाँव में जाते हैं लोग नहीं मिल पाते हैं हमारा क्या कसूर है, अगर गाँव में जाते तो कोई तो मिल ही जाता ऐसा नहीं है कि इनके डर से पूरे गाँव के लोग नदारद हो जाते वहीँ बिजली विभाग का पक्ष लेते हुए स्वीकार भी कर रहे हैं कि पूरे क्षेत्र में ट्रांसफार्मर जले हुए हैं लोग परेशान हैं बदल जाएगा, लोड बढ़ने के कारण ऐसा हुआ है, केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार की योजनाये हैं हर घर तक बिजली पंहुचाना है जिसके कारण लोड बढ़ गया है |

इस मामले में जिले के कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी माल सिंह का कहना है कि ग्रामीणों की समस्या तो है लेकिन ट्रांसफार्मर बदल जाएगा और लोग मतदान करेंगे |

गौरतलब है कि जिले में जिधर नजर दौडाएं गाँव अँधेरे में डूबे हैं और हर जगह ट्रांसफार्मर जले हुए हैं, किसान सूखे की स्थिति के  चलते रो रहा है और जिला प्रशासन अधिकारीयों को मनमानी करने का खुला संरक्षण दे रखा है, जिसका परिणाम है लोग अब मतदान का बहिष्कार करने को तैयार हैं वहीँ दूसरी तरफ निर्वाचन आयोग के निर्देश पर शत – प्रतिशत मतदान कराने के लिए मतदाता जागरूकता कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं, ऐसे में निर्वाचन आयोग की मंशा कैसे पूरी होगी यह समझ से परे है |

 

 

1 COMMENT

  1. Esi prakar hal Gram panchyat Paljha ka bhi hai jaha 2mah se light to LED balv jal gata hai jabki koi motor pump nahi chal rahe hai jiske karn puri fasal khtam hai ….Bijli bil maf nahi karna chahiye to yadi aisa karna tha to bijli bil le lete magar bijli to deni chahiye. ..

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