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नहीं थम रहा भाजपा प्रत्याशी के विरोध का सिलसिला – सुरेन्द्र त्रिपाठी

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उमरिया 05 अप्रैल – शहडोल संसदीय क्षेत्र से भाजपा द्वारा  घोषित प्रत्याशी हिमाद्री सिंह एवं भाजपा के निर्णय के विरोध का सिलसिला थामने का नाम नही ले रहा है, अब तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी पार्टी कार्यकर्ता और ग्रामीण खुल कर विरोध करने के साथ पार्टी से बगावत की भी बात कर रहे हैं साथ ही पार्टी पर आरोप भी लगा रहे हैं कि पैसे लेकर दिया गया टिकट, वहीँ उमरिया जिला मुख्यालय में भी पार्टी नेतृत्व से पुनः विचार करने की मांग की गई, नहीं तो नोटा का बटन दबाने की बात ज़ोरों पर है |

शहडोल संसदीय क्षेत्र से भाजपा द्वारा घोषित की गई प्रत्याशी हिमाद्री सिंह के विरोध का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है अब तो गांव देहात की जनता के साथ बूथ कार्यकर्ता भी विरोध के लिए मैदान में उतर आये हैं, उमरिया जिले में सन 1977 से ज्ञान सिंह के साथ– साथ रहे भाजपा नेता राम कृपाल नापित तो खुले शब्दों में कह रहे हैं कि लोकसभा उप चुनाव के समय तत्कालीन मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह उमरिया आये थे तब यही हिमाद्री सिंह बोली थीं कि “मेरा बाप कांग्रेसी, मेरी माँ कांग्रेसी और मैं भी कांग्रेस का ही काम करूंगी मेरा डी एन ए ही कांग्रेस का है, मेरा खून ही कांग्रेस का है”, उनको 3 दिन में दिल्ली से भोपाल लाया गया 19 तारीख को और 20 को शपथ दिलाया गया और 23 को टिकट मिल गई, उनका खून ही बदल गया और हमारे पार्टी का भी खून भी बदल गया असली बीजेपी अब नहीं है असली बीजेपी उस समय थी जब लाल कृष्ण आडवानी, अटल जी, मुरली मनोहर जोशी ये वो महारथी थे जो इन चीजों में ध्यान नहीं देते थे पैसे में ध्यान नहीं देते थे कि ये कंडीडेट बीजेपी का है, ये कांग्रेस का है, ये बहुजन का है, इसके पास पैसा है, इससे पैसा लो इसको टिकट दिलाओ चाहे वो जीते या नहीं हमारा जेब तो पैसे से भर गया | ये टिकट तो पैसे में दी गई है 3 दिन में ऐसा नहीं होता है, पूरी जनता साथ है ज्ञान सिंह के यदि टिकट नहीं दिया गया तो हम सब बगावत करेंगे |इतना ही नही लोक सभा उप चुनाव के समय हिमाद्री सिंह मुख्य मंत्री शिव राज सिंह को पत्र भी लिखी थी जिसमें जिक्र की थी कि 1972 में मेरे पापा जी को श्रीमती इंदिरा गांघी ने कांग्रेस की सदस्यता दिलाई थी इसलिए मैं कांग्रेस की ही रहूंगी फिर आज क्या हो गया |

 

इतना ही नहीं सेक्टर प्रभारी मदन लाल साहू का कहना है कि जब–जब संकट की घड़ी आई पार्टी द्वारा ज्ञान सिंह को लड़ाया गया और हम सब साथ रहे अब ऐसा कौन सा संकट आया कि जो उनकी टिकट काट दी गई, हम सब ज्ञान सिंह के साथ हैं हमारी मांग है कि ज्ञान सिंह को टिकट दिया जाय नहीं तो अगर हमारे नेता बगावत पर उतर आयेंगे तो हम सभी बगावत करेंगे | वहीँ बूथ प्रभारी धीरेन्द्र सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अभी हिमाद्री सिंह को टिकट दी है जबकि एक दिन ज्वाईन करवाए और दूसरे दिन टिकट दे दी गई है, ज्ञान सिंह ने अपना पूरा जीवन भाजपा के लिए खपा दिया, लोकसभा, विधानसभा का कार्यकर्ता उनके साथ है पूरा साथ देगा, पार्टी टिकट परिवर्तित कर पुनर्विचार कर ज्ञान सिंह जी को टिकट दे, यहाँ बूथ कार्यकर्ता काम करता है, पन्ना प्रभारी काम करता है, अभी हम लोग उमरिया बैठक में गए थे वहां मध्य प्रदेश के लोक सभा प्रभारी और उत्तर प्रदेश के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह जी आये थे, जब हम लोग अपनी बात रखने लगे तो नहीं सुने तो अब हम लोग भी उनकी बात नहीं सुनेंगे इस पर पुनर्विचार करें नहीं तो भाजपा को इसका खामियाजा भुगतना पडेगा |

भाजपा कार्यकर्ता गेंद लाल नामदेव ने कहा की अभी विधान सभा चुनाव हुए जो उमरिया जिला की दोनों सीटें भाजपा के ही खाते में जाती हैं, अनूपपुर की तीनो सीटें कांग्रेस के खाते में चली गई जबकि हिमाद्री के पति नरेन्द्र मराबी खुद पुष्पराजगढ़ से प्रत्याशी रहे, जो अपने पति को नहीं जिता पाई हिमाद्री जी वो आज स्वयं प्रत्याशी बन कर उभर कर आई हैं, जो सांसद जी ज्ञान सिंह जी पांचो सीटों को जीत कर दिखाया आज उन्हें टिकट से अलग किया जा रहा है, इसलिए इसका खामियाजा भारतीय जनता पार्टी को भुगतना पडेगा, जितने मतों से भाजपा जीतती थी आज उसका नुकसान उसको उठाना पडेगा इसलिए ज्ञान सिंह जी को टिकट दिया जाय ताकि किसी भी प्रकार से भाजपा को नुकसान न हो |

ये तो रहा घुलघुली क्षेत्र का हाल अब ज़रा उमरिया जिला मुख्यालय का हाल देखें, यहाँ नगर की ह्रदय स्थली गाँधी चौक में भाजपा के वरिष्ट नेता कैलाश द्विवेदी एवं बुद्धिजीवियों ने मिल कर हाथ में तख्ती लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से टिकट के मामले पर पुनर्विचार करने की मांग किये वहीँ भाजपा के वरिष्ट नेता कैलाश द्विवेदी कहे कि हम लोग पार्टी हाई कमान से मांग करते हैं कि इस टिकट पर पुनर्विचार करे ज्ञान सिंह को दुबारा टिकट देकर हमारा प्रतिनिधित्व कराये या भाजपा के हमारे बहुत से कर्मठ कार्यकर्ता संसदीय क्षेत्र में हैं जो संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम हैं, उन सबको दरकिनार करके एक ऐसे आदमी को जो सर्वथा हमारे क्षेत्र से अपरिचित है हमारे लोगों से, हमारे कैडर से, हमारे ऊपर लादा गया है उसके लिए आज हम रोते हुए अपनी पार्टी के निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए यहाँ खड़े हैं, वहीँ जब पूंछा गया की यदि पार्टी पुनर्विचार नहीं करती है तो क्या करेंगे, तब कहे कि हम लोग बैठ कर तय करेंगे नहीं तो नोटा दबायेंगे |

गौरतलब है कि क्षेत्र की जनता के इस आक्रोश को देखते हुए लग रहा है की भाजपा की इस लड़ाई का फ़ायदा दूसरे को अवश्य मिलेगा |

                               सुरेन्द्र त्रिपाठी

                                     उमरिया

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