Home राज्य पानी को तरसते ग्रामीण, प्यास बुझाते शिक्षक

पानी को तरसते ग्रामीण, प्यास बुझाते शिक्षक

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उमरिया 16 जून – सरकार लाख दावे करे लेकिन जिलों में पेय जल की उपलब्धता निश्चित नहीं कर पा रही है कुछ तो जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते और कुछ भ्रष्टाचार के कारण, ऐसा ही मामला है ग्राम पंचायत ओबरा का, यहाँ पी एच ई विभाग के अधिकारीयों के मनमानी के चलते ग्रामीण पानी को तरस रहे हैं, ओवर हेड टैंक बना सफ़ेद हाथी, कुंए और हैण्ड पम्प सूखे पड़े हैं, विधायक बांधवगढ़ भी लोगों को दिए झूठा आश्वासन |

उमरिया जिले के करकेली जनपद अंतर्गत आने वाली  पंचायत ओबरा जिले की सबसे बड़ी पंचायत है इसमें 1 हजार  घर की बस्ती ग्राम बेलमना और 1 हजार घर की बस्ती ग्राम ओबरा शामिल है वहीँ लगभग 70 घर की बस्ती इंदिरा आवास कालोनी भी है, यहाँ के हैण्ड पम्प सूखे हुए हैं और जो बोर पाईप की कमी से बंद हो गए उसमें पाईप डालने की जगह पी एच ई विभाग के लोग हैण्ड पम्प और पाईप निकाल कर ले गए | यहाँ वाटर सप्लाई बेलमना के नाम से ओवर हेड टैंक बनाया गया जो बनते के साथ लीक हो गया और जो पाईप लाईन बिछाई गई है वह भी कहीं पर मोटी और कहीं पर पतली जिसके चलते पानी सप्लाई नहीं हो पा रहा है इतना ही नहीं आये दिन मोटर भी जलती रहती है जिससे महीनों पानी सप्लाई बंद रहता है | 2 किलोमीटर दूर से पानी लेने आये बली राम कोल का कहना है कि हमारे मोहल्ले के लोग दिन रात पानी यहीं स्कूल के हैण्ड पम्प से ढोते हैं | इस मामले में जब सरपंच पुत्र राजा राम दाहिया से बात किया गया तो उनका कहना है कि पानी की बहुत समस्या है पी एच ई वाले आकर खुद देखे हैं 2015 में हम कार्य भार सम्हाले हैं इसके पहले 2012 में टंकी बन कर तैयार हो गई थी लेकिन एक भी घर में पानी नहीं जा रहा था, हमने टंकी चालू करवाया 50 परिवार इससे लाभान्वित हो रहे हैं बेलमना में 3 – 4 सौ परिवार को पानी देना है, बाकी के लिए कहे कि कहाँ से दे पायेंगे पाईप लाईन ही उल्टी दिशा में बिछे हैं, पी एच ई से हमने कहा आवेदन भी दिए हैं हमारे पास पावती भी है, मौखिक, लिखित सभी रूप से दिए हैं हैण्ड पम्प सूखे हैं हवा उगल रहे हैं उनका रख रखाव पी एच ई नहीं कर रहा है ठेकेदार नहीं सुनता है और विभाग कोई सहयोग नहीं करता है |

वहीँ गाँव के ही युवक चन्दन शुक्ला ने बताया कि गाँव में विधायक जी शिव नारायण सिंह आये थे तो हम लोगों ने उनसे कहा कि गाँव में पानी की बहुत समस्या है आप निराकरण कीजिये तो कहे कि अभी हमारे पास बजट नहीं है जैसे ही आयेगा मैं कुछ कोशिश करूंगा फिर भी आप 10 दिन बाद उमरिया पंहुचिये मैं तत्काल आपकी समस्या का निराकरण कर दूंगा, हम लोग वाहन लेकर गए थे कि शायद कुछ व्यवस्था हो पायेगी लेकिन हमें वहां असफलता मिली, सरपंच के साथ गए कुछ नहीं मिला खाली गाडी वापस लेकर चले आये बोले कि चुनाव हो जाएगा तो हम कुछ व्यवस्था कर देंगे लेकिन चुनाव भी हो गया उसके बाद अब फोन भी नहीं उठाते हैं वो इस समस्या का निराकरण करने को तैयार ही नहीं हैं हमारे ओबरा गाँव में पेय जल की कोई सुविधा नहीं है एक पी एच ई का जो टैंक चलता था वह भी बंद है हमें कोई शासकीय पेय जल की व्यवस्था नहीं है जो भी थी वह सूख चुकी है |

इस मामले में जब बांधवगढ़ विधायक शिव नारायण सिंह से बात किया गया तो वो सरपंच को ही दोषी बना दिए कहे कि मैं सरपंच जी को कहा था कि मेरे पास विधायक मद नहीं है जैसे ही 2019 का मेरे पास आयेगा आप एस्टीमेट बना कर मेरे को दे देना, मैं पात्र लिख दूंगा आप स्वीकृत करा कर पाईप लाईन के माध्यम से जनता को पानी उपलब्ध करा दीजिएगा, लेकिन आज तक सरपंच जी न कोई प्रस्ताव लाये न कुछ किये बस फोन से ही हैलो हाय करते हैं |

इस मामले में जिले के कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी से बात किया गया तो उनका कहना है कि इस विशेष प्रकरण के बारे में मेरे को अभी संज्ञान में आया है लेकिन समान्य रूप से हम लोगों ने पेय जल की समीक्षा किया है और पञ्च परमेश्वर मद से 10 प्रतिशत राशि पेय जल के लिए उपयोग करने के निर्देश हैं इसका रिव्यू किया गया है लेकिन जो आप बता रहे हैं यह बहुत ही गंभीर विषय है इस ग्राम पंचायत में मैं विशेष टीम भेज कर जांच करवाता हूँ और कोई लापरवाही हुई तो कार्यवाई भी करूंगा और इसको ठीक भी करवाउंगा |

यह तो रही ग्राम पंचायत ओबरा की पेय जल समस्या अब ज़रा देखें वहीँ के एक शिक्षक राम खेलावन द्विवेदी क्या करते हैं अपने गाँव वालों के लिए | ये अपने स्कूल में भी शासन को पत्र लिख कर परेशान हो ने के बाद गाँव वालों से सहयोग लेकर और अपने पास से पैसे लगा कर बोर करवाए और वहां की पानी की समस्या हल किये |

इतना ही नहीं ये रहने वाले ओबरा के हैं लेकिन स्वभाव से सरल होने के कारण अपने गाँव वालों की समस्या इनसे नहीं देखी जाती जिसके चलते 5 वर्ष से लगातार गाँव में पानी की कमी होने कारण लगभग 150 घरों को पानी की व्यवस्था अपने निजी बोर से करते है वह भी निःशुल्क | गांव के ही लोग जो पानी लेने आते हैं उनमें से जय प्रकाश गुप्ता, कस्तूरी बाई, राम नारायण बताते हैं कि हम लोगों के घरों को यदि मास्टर साहब पानी न दें तो 2 किलोमीटर दूर खेतों के ट्यूब वेल में पानी लेने जाना पडेगा और पूरा दिन जब भी जरूरत होती है निःस्वार्थ भाव से और निःशुल्क पूरा उपयोग का पानी देते हैं ये भर नहीं इनके घर के सभी लोग सेवा भाव से पानी देते हैं, हमारे यहाँ शादी व्याह कुछ भी होता है तो पानी की कमी नहीं होने देते हैं | हम लोग कई बार शिकायत कर चुके हैं कोई सुनता ही नहीं है |

चलिए अब ज़रा वाटर मैन शिक्षक राम खेलावन द्विवेदी से बात करें ये क्या कहते हैं, इनका कहना है 5 वर्ष से दे रहे हैं गाँव में पानी की समस्या है लोगों को कष्ट होगा वह कष्ट देखा नहीं जाता तो हम सबको पानी देते हैं निःशुल्क देते हैं शासन की व्यवस्था के नाम पर कहे कि यहाँ पेय जल की कोई व्यवस्था नहीं है बोर भी अगल – बगल  नहीं है कुंए सब सूख गए हैं, ये प्रक्रिया सुबह 5 बजे से लेकर रात में 9 – 10 बजे तक चालू रहता है, हम भी हर काम छोड़ कर पानी देते रहते हैं, हमारे घर के लोग भी पानी की समस्या को दूर करने के लिए लगे रहते हैं, मोटर भी 1 – 2 बार जल गई तो हम ही बनवाते हैं किसी से नहीं लेते हैं गाँव के 55 प्रतिशत लोग यहीं से पानी लेते हैं पानी भी बहुत लगता है, भैंस और गाय बैल भी रखे हैं, उन अको भी पानी लगता है सब पानी की पूर्ती यहीं से होती है गाँव में किसी तालाब में पानी नहीं है और न ही यहाँ नदी है जिसके कारण यहाँ से पानी लेते हैं और न कोई ऐसा ट्यूब वेल है जिससे कोई व्यवस्था हो सके |

गौरतलब है कि एक तरफ पी एच ई के अधिकारियों की अनदेखी और नकारापन दूसरी तरफ ऐसे शिक्षक जो बच्चों को शिक्षा देने के साथ – साथ गाँव के लिए जल दाता भी बने हैं | वहीँ पी एच ई के अधिकारी जिले के कलेक्टर को भी झूठी जानकारी देकर अपनी पीठ थपथपाते हैं | ऐसे में तो आवश्यकता है झूठे अधिकारी के खिलाफ कार्यवाई करने की और ऐसे वाटर मैन शिक्षक को सम्मानित करने की ताकि लोगों को इनसे सीख मिले और आम जन की मदद कर सकें |

 

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