Home राज्य नही रुक रहा बाघों की मौत का सिलसिला – सुरेन्द्र त्रिपाठी

नही रुक रहा बाघों की मौत का सिलसिला – सुरेन्द्र त्रिपाठी

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उमरिया 17 अगस्त – विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ शावक की मौत से बाघ संरक्षण के प्रयासों को लगा झटका।
विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक बार फिर बाघ शावक की मौत की बुरी खबर आई है बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व वैसे तो बाघों  की घनी आबादी के लिए दुनिया भर में मशहूर है दुनिया भर से सैलानी बाघ देखने के लिए बांधवगढ़ पहुंचते हैं बाघ की सबसे घनी आबादी होने के कारण बांधवगढ़ दुनिया के नक्शे पर बाघ संरक्षण के लिए काफी प्रसिद्ध है लेकिन विगत कुछ अरसे से लगातार बाघों की हो रही मौत से पर्यावरण और वन्य जीव संरक्षक चिंतित हैं बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जिस बाघ शावक की मौत हुई है उसकी उम्र 4 से 5 माह बताई जा रही है। टाइगर रिजर्व के संचालक बिसेन्ट रहीम से मिली जानकारी के मुताबिक बाघिन टी 5 ने बच्चे को छोड़ दिया था बीमार हालत में 11 अगस्त को मगधी रेंज के कक्ष क्रमांक आर एफ 293 मुड़धोवा तालाब में बीमार हालत में बाघ शावक दिखा जिसे टाइगर रिजर्व की टीम उठाकर बहेरहा इनक्लोजर में आई, यहां टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञ डॉक्टर नितिन गुप्ता ने शावक का इलाज भी किया, फील्ड डायरेक्टर विसेंट रहीम ने बताया कि शावक को मीट भी खाने को दिया गया लेकिन उसकी हालत बिगड़ती गई और अंत में 16 अगस्त को शाम 5 बजे उसकी मौत हो गई। जिसका पोस्टमॉर्टम करके अंतिम संस्कार कर दिया गया। अब इंतज़ार है पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आने का, उसके बाद ही बाघ शावक की मौत के कारणों का खुलासा हो पाएगा। हलांकि यदि गौर किया जाय तो टाइगर रिजर्व के लिए नियुक्त डॉक्टर नितिन गुप्ता ने जिस किसी भी टाइगर का ईलाज किया है उसकी मौत अवश्य हुई है। ऐसे में वन्य जीव प्रेमियों का कहना है कि टाइगर रिज़र्व प्रबंधन को चाहिए कि दूसरा डॉक्टर नियुक्त करें जिससे होने वाली घटनाओं से घायल बाघों को बचाया जा सके।

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