Home राज्य डाक्टर की लापरवाही से गई युवक की जान – सुरेन्द्र त्रिपाठी

डाक्टर की लापरवाही से गई युवक की जान – सुरेन्द्र त्रिपाठी

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उमरिया 16 मार्च – जिला अस्पताल में फिर डाक्टर की लापरवाही से गई युवक की जान | परिजनों ने लगाया गलत ईलाज का आरोप, डाक्टर मौके से गायब, परिजनों ने डाक्टर पर अपराध दर्ज करने की किया मांग, पुलिस ने मर्ग कायम कर किया जांच शुरू |

उमरिया जिला मुख्यालय स्थित सिग्नल टोला निवासी 25 वर्षीय युवक दीपक सिंह का विवाह 28 फरवरी 2019 को हुआ और 10 – 11 दिन बाद अचानक पेट में दर्द शुरू हुआ तो जिला अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन और सर्जन डाक्टर बी के प्रजापति से इलाज शुरू करवा दिए लेकिन 3 दिन बाद तकलीफ ज्यादा बढ़ जाने पर जिला अस्पताल में भरती करवाए तो वहां मौजूद डियूटी डाक्टर देख कर पूंछे किसका इलाज चल रहा है तो परिजनों ने बताया कि डाक्टर प्रजापति जी का तब अपने सीनियर का नाम सुन कर डाक्टर उनसे सलाह लिए तो डाक्टर ने उनको ड्रिप लगाने की सलाह दिए और ड्रिप लगते ही दीपक सिंह को ठण्ड लगने लगी तब खुद डाक्टर प्रजापति पहुँच गए और देखे, दीपक सिंह के परिजन मनीष सिंह बघेल बताये कि उन्होंने एक इंजेक्शन लिखा जिसको हम तुरंत मेडिकल स्टोर्स से खरीद कर  लाये और इंजेक्शन लगते ही 5 मिनट के भीतर ही आँख पलट गई, मुंह से सफ़ेद झाग निकलने लगा और खून की उल्टी होने लगी तब हम लोगों ने इंजेक्शन की परची माँगा तो उसको गायब कर दिया गया, उस इंजेक्शन का नाम एलर्गान था, उसको हम लोगों ने गूगल में सर्च किया तो वो हाईली बैक्टीरिया को मारने के लिए उपयोग किया जाता है और उसके बहुत साईड इफेक्ट हैं तब कटनी रिफर कर दिए और डाक्टर प्रजापति गायब हो गए हम लोग कटनी लेकर गए वहां डक्टर नीलेश जैन देखे और कहे कि इसका उपयोग नहीं करना चाहिए था, दीपक सांस नहीं ले पा रहा था, उसके शरीर में इतना जहर फ़ैल गया था जी उस इंजेक्शन की वजह से था उसके प्लेटलेट्स कम हो गए थे, खून की उल्टी हो रही थी नाक से खून निकल रहा था, एच बी एकदम से घट गया था हलकी सी खांसी में खून निकल रहा था यह देख कर वहां के  डाक्टर भी हाथ खडा कर दिए तब हम लोग जबलपुर लेकर जा रहे थे लेकिन हम लोग उसको खो दिए, कटनी की जो रिपोर्ट आई है उसमें डेंगू के लक्षण है अगर मलेरिया होता तो 3 दिन में कंट्रोल हो जाता लेकिन वहां की जांच में बताये कि मलेरिया नहीं है डेंगू है और प्लेटलेट्स कम है उन्होंने बताया कि पीआरपी थेरेपी होती है जो हमारे यहाँ उपलब्ध नहीं है वो प्लेटलेट्स कवर करती है वो सुविधा मैट्रो हॉस्पिटल में है लेकिन हम लोग नहीं बचा पाए, गौरतलब है कि उमरिया जिला अस्पताल में डेंगू यूनिट की हकीकत पहले दिखाई जा चुकी है लेकिन आज अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही ने एक परिवार का दीपक बुझा दिया |

इस मामले में एडिशनल एस पी रेखा सिंह का कहना है कि दीपक सिंह बघेल 25 वर्ष का है सिग्नल टोला का रहने वाला है बीमार था जिला अस्पताल में डाक्टर प्रजापति हैं उनके यहाँ इलाज चल रहा था 3 दिन से चल रहा था कल तबियत ज्यादा ख़राब हो गई तो जिला अस्पताल लाये थे डाक्टर प्रजापति ने उसको  इंजेक्शन लगाया ऐसा परिजनों का कहना है इंजेक्शन लगाते ही उसकी हालत ख़राब हो गई तो कटनी के लिए रिफर कर दिया गया था वहां से जबलपुर रिफर कर दिया गया जहां रास्ते में उसकी मौत हो गई, परिजनों का कहना है कि डाक्टर द्वारा इंजेक्शन लगाने से मौत हो गई है, मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है पोस्ट मार्टम के लिए भेजा जा रहा है |

हालाँकि मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने जिला अस्पताल को तो छावनी में तब्दील कर दिया था लेकिन जिला प्रशासन भी इन मौत के सौदागरों को सबक सिखाने में नाकाम साबित हो रहा है, परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि डाक्टर प्रजापति एमवे की दवाईया बेचते हैं और इधर कुछ दिनों से वेस्टीज नामक किसी कम्पनी के दलाल बने हैं और उसकी दवाइयां बेचते हैं चाहे मरीज मरे या जिए उससे उनको कोई लेना – देना नहीं है हालाँकि उनका यह कोई पहला मामला नहीं है उनकी लापरवाही और गैरजिम्मेदारान बरताव के चलते कई घर सूने हो चुके हैं | वहीँ जिला उमरिया के सी एम एच ओ डाक्टर राजेश श्रीवास्तव भी अपना फोन बंद कर गायब रहे | ऐसे में आवश्यकता है निष्पक्ष जांच कर दोषी को सख्त सजा देने की ताकि दुसरे घर का चिराग न बुझने पाए |

 

 

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