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ये पब्लिक है सब जानती है, अब इमोशनल अत्याचार चालू

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उमरिया – जिले भर नही प्रदेश में जबरन खरीद फरोख्त कर सरकार बनाने वाले नेता साढ़े तीन वर्ष में हर योजनाओं में घोटाला, भ्रष्टाचार करते रहे। अब जब फिर से चुनाव की बारी आई तो जनता की फिर याद आई। एक से बढ़ कर एक लोक लुभावन घोषणाओं की झड़ी लगा दिए। कोई बिना चुनाव के अपने क्षेत्र में मतदान करवाने लगा तो कोई हर सभाओं में आम जनता से पूंछने लगा कि मैं चुनाव लड़ूँ या न लड़ूँ। इतना भर नही 15 वर्षों से लगातार जनता का खून चूस कर उनकी बातों को अनसुना करने वाली नेत्री, विधायक, मंत्री अपनो को दूर करने वाली, सैकड़ों करोड के घोटाले करने वाली जितना अत्याचार करते बना, करने के बाद, अब फिर से इमोशनल अत्याचार शुरू कर दी। अब चंद दिनों बाद मतदान होना है इसलिए टिकट मिलने की प्रत्याशा में जनता की याद आने लगी है।

अभी एक दिन की ही सभा मे अपने भाषण में बोलती नजर आईं कि
अगर मेरे को वोट नही भी देंगे भाइयों तो मेरे अकेले का क्या मोल है, मैं कहीं भी 2 रोटी खा लूंगी, इतना बड़ा विधानसभा क्षेत्र है, मैं नत्थू दादा के यहां आऊंगी तो दो रोटी दे देंगे, लक्ष्मण भाई के यहां जाऊंगी तो 2 रोटी दे देंगे
हालांकि ये पब्लिक है सब जानती है, कि लाखों रुपये पेंशन मिलने के बाद दो रोटी की बात करने वाली विधायक द्वारा 4 दिन के लोक लुभावन भाषण और जनता को इमोशनल ब्लैकमेल कर फिर से 5 साल वही अत्याचार, वही घोटाला होना है। अब तो हर क्षेत्र में एक से बढ़ कर एक इमोशनल ब्लैकमेलिंग होनी है, चिल्हारी क्षेत्र की जनता तो खास नाराज है, उनकी तहसील को अमरपुर स्थानांतरित करवा दिया गया, वह भी कटनी जिले की सीमा के नजदीक। बिजली के लिए जनता रो रही है, पनपथा से इंदवार रोड आज तक पूरी नही हुई। बम्हनगंवा से चिल्हारी रोड 10 वर्षों से खराब होने के बाद अपनी कुर्सी हिलती देख काम प्रारंभ करने का दिखावा शुरू हो गया, वहीं चंसुरा से चिल्हारी रोड की भी याद अब आई है, भूमिपूजन तो कर दिया गया लेकिन बनेगी कब कोई ठिकाना नही है। बिजली की तो कोई बात ही नही है, चाहे किसान की फसल भले ही सूख जाय, बच्चे पढ़ें या न पढ़ें कोई मतलब नही। यही हाल प्रदेश के मुखिया का है,

घोषणा पर घोषणा करते जाओ, आदेश अगली पंचवर्षीय में होंगे, हालांकि अभी पिछली पंचवर्षीय की घोषणा ही पूरी नही हुई है, ज्यादा क्या कहें जिला मुख्यालय में एस्ट्रोटर्फ बनाने की तीन बार घोषणा हो चुकी, 2 पंचवर्षीय बीत गए लेकिन अभी कुछ पता नही है।
इसीलिये तो कहते हैं ये पब्लिक है सब जानती है।

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