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बाहुबली समिति प्रबंधक पहुंचा जेल तक

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उमरिया – जिले का बाहुबली समिति प्रबंधक घोटाले करने के बाद भी खुद को शहंशाह समझता रहा। आखिर सभी का समय एक जैसा हमेशा नही रहता, गरीबो, किसानों की आह, कभी न कभी लगती ही है। मामला है सेवा सहकारी समिति मर्यादित चिल्हारी के तत्कालीन प्रबंधक जगदीश प्रसाद तिवारी का।


तत्कालीन समिति प्रबंधक जगदीश प्रसाद तिवारी

जगदीश प्रसाद तिवारी चिल्हारी समिति प्रबंधक बनने के बाद करोड़ो की संपत्ति अर्जित किये और किसानों के साथ धोखाधड़ी, फर्जी लोन, फर्जी खाद बीज सभी कुछ करने लगे। गरीब अनपढ़ किसान उनके खेल को नही समझने के कारण उनके चंगुल में फंस कर कंगाली की कगार तक पहुंच गए। हालांकि इसकी जांच अभी ईओडब्ल्यू रीवा के पास लंबित है। वहीं जगदीश प्रसाद तिवारी तत्कालीन समिति प्रबंधक चिल्हारी और तत्कालीन समिति प्रबंधक अमरपुर राम लखन चतुर्वेदी दोनो ने मिल कर वर्ष 2021 में 1 अप्रैल 2021 से 31 मई 2021 के बीच पीएसएस की गेंहू खरीदी में लगभग 2200 क्विंटल सरकारी गेंहू गायब कर दिए जिसमे 686 क्विंटल गेंहू चिल्हारी समिति प्रबंधक जगदीश प्रसाद तिवारी ने गायब किया।

गेंहू खरीदी

जिसकी शिकायत मिलने पर तत्कालीन कलेक्टर सजीव श्रीवास्तव ने जांच दल गठित कर जांच करवाया जो सत्य पाया गया। उस पर कलेक्टर के निर्देश पर अमरपुर चौकी में खाद्य अधिकारी द्वारा दिनांक 19/01/2022 को अपराध क्रमांक 22/22 धारा 420, 409, 34 आईपीसी और 3/7 ईसी एक्ट का प्रकरण समिति प्रबंधक चिल्हारी और समिति प्रबंधक अमरपुर के ऊपर दर्ज कराया गया। जिसकी जांच अमरपुर चौकी द्वारा की गई सत्य पाए जाने पर दोनो के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया और दोनो फरार हो गए। अमरपुर चौकी प्रभारी कोमल दीवान द्वारा एस पी उमरिया प्रमोद कुमार सिन्हा के निर्देश पर जगदीश प्रसाद तिवारी को सतना जिले के थाना रामनगर के ग्राम देवरा से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया जहां से जेल भेज दिया गया। अभी इनके विरुद्ध ईओडब्ल्यू की जांच भी चल रही जिसमे जांच पूरी होते ही चालान पेश किया जाएगा।

समिति चिल्हारी


वहीं अभी तत्कालीन समिति प्रबंधक अमरपुर राम लखन चतुर्वेदी की भी तलाश पुलिस द्वारा की जा रही है।

वहीं अगर देखा जाय तो बहुत सी सहकारी समितियां ऐसी हैं जिनके प्रबंधक लाखों का घोटाला करके ईमानदार बने है। इनकी जांच जिला आपूर्ति अधिकारी को सौंप दी जाती है और वो अपने सहायक आपूर्ति या कनिष्ट आपूर्ति अधिकारी को सौंप देते हैं। जबकि जांचकर्ता जो मिलता है उसको यथावत लाकर जिला आपूर्ति अधिकारी को रिपोर्ट सौंप देते हैं और ये उसमें हेरफेर कर जिले के कलेक्टर तक को बरगला कर झूठी जानकारी दे कर समिति प्रबंधकों और विक्रेता को बचाने का कार्य बाखूबी निभाते है। यही कारण है कि प्रदेश के मुखिया की जन कल्याणकारी योजनाओं को खुले आम पलीता लगाया जाता है। यदि देखा जाय तो कई मामलों को ये दबा कर सभी मे लोगों को क्लीन चिट दे दिए हैं। चाहे वो मिलिंग के चावल का मामला हो या पीडीएस की दुकानों का हो या पीएसएस की खरीदी का। यही कारण था कि तत्कालीन कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव इनसे सारे प्रभार लेकर अपर कलेक्टर को सौंप दिए थे। अब देखना है कि चुनावी वर्ष में प्रदेश के मुखिया क्या एक्शन लेते हैं।

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