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आम आदमी पार्टी ने जिला प्रशासन पर धरना समाप्त कराने का लगाया आरोप

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सर्किल प्रभारी सुनीता यादव ने बताया कि धरना खत्म करने का बनाया जा रहा है दबाव जिला प्रशासन कि निरंकुशता

उमरिया – जिला मुख्यालय में कलेक्टर कार्यालय के सामने आम आदमी पार्टी द्वारा दिनांक 24 जुलाई से लगातार केन्द्रीय विद्यालय निर्माण की भूमि के लिए धरना दिया जा रहा है, हालांकि इस अच्छे कार्य के लिए अन्य राजनैतिक दल चुप्पी साधे बैठे हैं।
गौरतलब है कि जिले में केंद्रीय विद्यालय भवन का निर्माण हो जाने पर 11वीं और 12वीं की भी कक्षाएं संचालित होने लगेंगी उसके लिए विद्यार्थियों को अन्यत्र भटकना नही पड़ेगा। जिले के नागरिक आम आदमी पार्टी द्वारा चलाये जा रहे हस्ताक्षर अभियान में भाग ले रहे हैं। विद्यालय भवन का निर्माण हो जाने के बाद जिन राजनैतिक दलों के लोग अभी चुप्पी साधे बैठे हैं वही अपने बच्चों और अपने चहेतों का एडमिशन करवाने आगे आ जायेंगे लेकिन अभी किसी का पता नही है।


आम आदमी पार्टी की सर्किल प्रभारी सुनीता यादव जिला प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहीं कि जिला प्रशासन द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से जनता की मांग को दबाने का प्रयास लगातार हो रहा है। यह मांग सिर्फ आम आदमी पार्टी की नहीं बल्कि उमरिया जिले के आम नागरिकों छात्र और अभिभावकों की है शीघ्र अति शीघ्र केंद्रीय विद्यालय भवन निर्माण का कार्य हो जो कार्य प्रशासन और सरकार को करना चाहिए वह काम आम आदमी पार्टी कर रही है।


शासन द्वारा जनता की आवाज को दबाने का काम लगातार प्रशासन द्वारा किया जा रहा है और उनकी मांगों के प्रति संवेदनहीनता बरती जा रही है। जिला प्रशासन महत्वपूर्ण विषयों को लेकर कितना संवेदनशील है, यह सामने नजर आ रहा है। गौरतलब है कि भवन निर्माण हेतु विगत 2 महीने से उमरिया जिले के आम नागरिक और अभिभावक जिला प्रशासन से लगातार मांग कर रहे हैं कि शीघ्र अति शीघ्र भवन निर्माण का कार्य प्रारंभ किया जाए जिससे 11वीं एवं 12वीं कक्षा का संचालन हो सके शायद ही किसी और जिले में जिले वासियों को शिक्षा को लेकर इतना संघर्ष करना पड़ा हो जितना उमरिया जिले के नागरिकों को करना पड़ रहा है जो दिन प्रतिदिन जिला प्रशासन और नागरिकों के बीच संघर्ष का विषय बनता जा रहा है। महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि जिला प्रशासन ऐसे कौन से दबाव में है कि वह पूर्व में आवंटित भूमि पर भवन निर्माण नहीं होने दे रहा है इतना ही नहीं भूमि की दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं कर पा रहा है। इस तरह जिला प्रशासन की उदासीनता निश्चित रूप से जिले को शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़ेपन की ओर ले जाने का मुख्य कारण बनेगी अगर नागरिक जागरूक नहीं हुए और उन्होंने प्रशासन सरकार पर दबाव नहीं बनाया तो आने वाले बच्चों का भविष्य निश्चित ही अंधकार में हो जाएगा।

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