Home पलायन विकास के दावों की पोल खोलती एक रिपोर्ट

विकास के दावों की पोल खोलती एक रिपोर्ट

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बेरोजगारी के चलते हो रहा मजदूरों का पलायन, पंचायत में नही मिल रहा काम, और न ही कोई लाभ, भूखों मरने की कगार पर आदिवासी मजदूर

प्रदेश की भाजपा सरकार रोजगार के बड़े – बड़े दावे करते नही थकती। मुफ्त के पैसे और अन्य सुविधाओं को देने का बड़ा दम्भ भरते नही थकती। सोशल मीडिया एवं अन्य प्लेटफार्म पर जन हितकारी योजनाओं के बड़े – बड़े पोस्टर, बैनर दिखते हैं।
प्रदेश की जन हितैषी सरकार, आदिवासियों के मसीहा कहलाने वाले प्रदेश के मुखिया हर समय और हर मंच से अपनी बड़ाई करते नही थकने। लाडली बहनों के एकलौते भाई, भांजियों के एकलौते मामा की सरकार में कैबिनेट मंत्री, मानपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक के विधानसभा क्षेत्र में मामा की आदिवासी बहने, भांजे, भांजियाँ बेरोजगारी के चलते प्रतिदिन सैकड़ों की तादात में पलायन करने को मजबूर हैं।

उमरिया रेल्वे स्टेशन पर रात के 9 बजे जब वहां पहुंचे तो एकाएक भीड़ देखकर कुछ समझ में नहीं आया कि अचानक इतने सारे लोग बाहर जाने के लिए कैसे तैयार हो गए हैं।

जब उनसे बात किया गया तो पता चला कि ये सब आदिवासी, हरिजन गरीब मजदूर वर्ग के लोग जनजातीय कार्य मंत्री के विधानसभा क्षेत्र मानपुर 90 के ग्राम छापड़ौड़, नौगमा, कटहार, डोडका से आये हैं और अपना एवं अपने परिवार का पेट पालने के लिए मजदूरी करने के उद्देश्य से पलायन कर रहे हैं।

टोल्ली बाई बैगा, भूरी बाई बैगा, नान बाई बैगा, मैकी बाई बैगा, रीना चौधरी, अगसिया बाई अगरिया बताई की हमको न तो पोषण आहार, का पैसा मिलता है न ही लालड़ी बहना योजना का लाभ मिलता है और न ही हमको प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है, इतना ही हम लोग जो सीसी रोड, मुरम रोड में काम किये हैं उसका भी पैसा नही मिला है। हमारे यहां कोई काम नही चल रहा है। हमारे सामने रोजी रोटी का संकट है इसलिए हम लोग अपना परिवार पालने जिले से बाहर मजदूरी करने जा रहे हैं।


हम लोग मानपुर जनपद सीईओ, एसडीएम, सरपंच सभी से कहते हैं तो कोई सुनता ही नही है, इतना ही नही जब हम अर्जी देने जाते हैं तो हमसे 100 – 100 रुपया भी ले लिया जाता है। हम लोग एक बार उमरिया पोषण आहार के पैसे के लिए कलेक्टर साहब के यहां आए थे तो जिस आफिस में हमको अर्जी जमा करने के लिए कहा गया था वहां बाबू हमसे 100 – 100 रुपया ले लिया और हमको पैसा भी नही मिला। तो साहब हमारे पास इतना पैसा नही है कि हम बार – बार उमरिया आएं और हर बार पैसा दें। हम मीना दीदी से भी कहे थे तो वो भी नही सुनी कह दीं कि तुम लोग जाओ हम कह देंगे पैसा मिल जाएगा।


हमसे रोजगार सहायक और सचिव, सरपंच कागज ले लेते हैं और कह देते हैं कि जो तुहारा ईकेवाईसी हो गया है। हम लोग जिला पंचायत अध्यक्ष के घर भी गए थे वो कह दीं की हां तुम्हारा काम हो जाएगा। वहीं बैगा महिलाओं द्वारा बताया गया कि 3 – 4 माह से पोषण आहार अनुदान राशि भी नही मिली है।
दूसरी तरफ प्रदेश सरकार और जनजातीय कार्य मंत्री के कसीदे पढ़ने में जिला प्रशासन व्यस्त है। हालांकि मानपुर विधानसभा क्षेत्र के अधिकारी जिला प्रशासन की बात नही सुनते हैं, अगर वो किसी की बात मानते हैं तो मात्र अपने विधायक की।
जिसके परिणामस्वरूप विधानसभा क्षेत्र की जनता पलायन कर रही है और कम मतदान का भी यही कारण बनेगा।
अब वहीं अगर देखा जाय तो मजदूरों का यह पलायन मानपुर विधानसभा के विकास की कलई खोलता नजर आ रहा है, जो भाजपा सरकार के झूठे दावों की पोल खोल रहा है।
यदि प्रदेश सरकार के दावों में सच्चाई होती तो मजदूरों को पलायन नही करना पड़ता। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्षेत्र का 18 वर्षों में कितना विकास हुआ होगा जब 18 वर्षों से लगातार एक ही विधायक वहां हैं। हालांकि क्षेत्र की जनता इस विकास से इतना खुश है कि इस बार विधायक बदलने का पूरा मन बना ली है।

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