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सहकारी समिति चिल्हारी के प्रबंधक पर ई ओ डब्ल्यू की कार्यवाई

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उमरिया 22 जून – जिले के इन्दवार सहकारी बैंक की शाखा अंतर्गत आने वाली सभी समितियों में करोड़ों का घोटाला प्रबंधकों द्वारा किया गया है जिसमें सहकारी समिति चिल्हारी में तो अत्यधिक घोटाला प्रबंधक जगदीश प्रसाद तिवारी द्वारा किया गया है, शिकायत पर जांच करने पंहुची रीवा ई ओ डब्ल्यू की टीम ने दस्तावेज जप्त कर किसानो के लिए बयान, कहे कि जांच के बाद होगी ऍफ़ आई आर |

उमरिया जिले के इन्दवार सहकारी बैंक अंतर्गत आने वाली सहकारी समिति चिल्हारी में भूमिहीनों के नाम पर भी कर्ज दर्ज किया गया है, वहीँ अपात्रों के नाम पर भी अधिकतम कर्ज दिया गया है इतना ही नहीं जो 20 वर्ष पूर्व मर चुके हैं वो भी आज कर्जदार हैं | यहाँ के प्रबंधक जगदीश प्रसाद तिवारी का वेतन आठ सौ रुपये महीने है और यदि इनका घर देखा जाय तो करोड़ों रुपये की लागत का है जमीन भी करोड़ों की है गाड़ियों की तो पूँछिये ही मत, स्कार्पियो, टबेरा, बुलेट, स्विफ्ट सभी वाहन हैं, गर्मी के मौसम में मैनेजर साहब आफिस में रहते हैं और गाडी स्टार्ट एसी चालू कर बाहर खडी कर देते हैं, और हो भी क्यों न यहाँ पदस्थापणा के पूर्व भालूमाडा में भी तो करोड़ों का गबन कर चुके हैं वहां से इनकी सेवा समाप्त कर दी गई थी बाद में इनके रिश्तेदार रिटायर्ड इन्दवार सहकारी बैंक के शाखा प्रबंधक फिर से इनको नौकरी में लगा दिए तब से ये पीछे मुड कर नहीं देखे और आज फिर से करोड़ों का गबन कर बैठे जिसकी जांच ई ओ डब्ल्यू रीवा कर रही है | इनके गबन और भ्रष्टाचार की कहानी समिति के किसान बताते हैं, हरी शंकर पटेल, ज्ञानेंद्र पटेल, हिरामन बाई, राम बिशाल, राम अवतार तिवारी, राम गोपाल पटेल, सुदामा पटेल, प्रमोद पटेल बताते हैं कि गेंहू खरीदी में सभी को 1 क्विंटल कम की परची दिए, जिनके पास जमीन नहीं है उनको भी कर्जदार बना दिए, प्रदेश सरकार जय किसान ऋण माफी योजना के तहत 50 हजार तक का ऋण माफ़ कर चुकी है उसमें किसी को ऋण माफी प्रमाण पत्र नहीं दिए बल्कि उलटे कर्ज वसूली चालू किये हैं, जिन किसानो ने कर्ज अदा कर दिया उनके खाते में रकम ही नहीं पोस्टिंग की गई, गेंहू खरीदी में किसानो से हम्माली का पैसा ले लिए जबकि सारा पैसा शासन देती है, किसानो को धमकी देते हैं कि शिकायत मत करो हम तुम्हारा पैसा दे देंगे, कर्ज पटाने के बाद भी इनकी समिति में किसान कर्जदार हैं | ऐसे में ये समिति प्रबंधक कई गाड़ियाँ न रखेंगे तो कौन रखेगा |

जब सहकारी समिति चिल्हारी के प्रबंधक जगदीश प्रसाद तिवारी से किसानों द्वारा लगाये गए आरोपों के बारे में पूछा गया की अभी तक किसानो को ऋण मुक्ति प्रमाण पत्र क्यों नहीं दिया गया तो कह दिए कि प्रमाण पत्र में सी ई ओ साहब के दस्तखत नहीं हो पाए हैं उनके पिताजी बीमार है इसलिए नहीं बाटे  हैं, जो एक क्विंटल का आरोप लग रहे हैं जब दिए थे तो नहीं लगाये अब लग रहे हैं तो मैं क्षमा चाहूँगा, जब भूमिहीन किसान के कर्ज के बारे में पूंछा गया तो आहे कि 8 – 10 साल पहले उनके नाम जमीन थी और उस समय कर्ज लिए थे तो जमीन रही होगी, जबकि राम बिशाल के नाम पर पूरी जमीन है और उसके लड़कों के नाम पर कर्ज है वहीँ बाहुबली प्रबंधक के हौसले तो इतने बुलंद हैं कि मीडिया को 5 हजार में और ई ओ डब्ल्यू को 20 हजार में खरीद कर मामला को रफा दफा करने की बात करते है जब कैमरे के सामने पूछा गया तो कहने लगे कि ऐसा कोई भी गवाह हो तो बताएं और कोई झूठा आरोप लगता है तो मैं क्षमा चाहता हूँ और मैं क्या कर सकता हूँ | गौरतलब है कि यदि बोले नहीं तो क्षमा माँगने का काम क्या है |

इस मामले में रीवा ई ओ डब्ल्यू की निरीक्षक प्रवीण चतुर्वेदी बताये कि समिति प्रबंधक चिल्हारी के विरुद्ध अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायत हुई थी जिसके संबंध में आज पूरा ई ओ डब्ल्यू का टीम चिल्हारी समिति पर आया हुआ था और कृषकों के कथन बयान लिए गए दस्तावेजों का परीक्षण किया गया, दस्तावेज जप्त किये गए आगे की कार्यवाई दस्तावेजों के विश्लेषण के उपरांत की जायेगी प्रथम दृष्टया प्रकरण का अध्ययन किया जा रहा है दस्तावेज जप्त किये जा रहे हैं और उनसे जो परिणाम निकल कर आयेगा वैसी वैधानिक कार्यवाई की जायेगी, कृषकों के बयान पर समिति प्रबंधक के ऊपर गम भीर आरोप लगाये गए हैं अब दस्तावेजों का परीक्षण कर उनका मिलान किया जाएगा |

गौरतलब है कि ऐसे भ्रष्ट समिति प्रबन्धक को तत्काल बर्खास्त कर सारी राशियों की वसूली करने के साथ जेल भी भेज देना चाहिए ताकि गरीबों और मेहनतकश किसानो का खून चूसने वाले ऐसे जोंक को सजा मिल सके, सबसे बड़ी बात तो यह है कि सहकारिता विभाग में ये भर नहीं कई ऐसे भ्रष्ट प्रबन्धक हैं जो कई बार गबन के आरोप में बर्खास्त हो चुके हैं उसके बाद भी फिर से सेवा में हैं यदि यह कहा जाय कि सहकारिता बनाम भ्रष्टाचार तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी |

 

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