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लुट रहा किसान – सुरेन्द्र त्रिपाठी

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उमरिया 11 मई – जिले में किसानों को समिति प्रबंधकों द्वारा जम कर लूटा जा रहा है, मानपुर जनपद अंतर्गत पनपथा, चिल्हारी, बकेली गेंहू खरीदी केन्द्रों में 51 किलो गेंहू लिया जा रहा है वहीँ किसानों को हम्माली भी नहीं दिया जा रहा है | जिला आपूर्ति अधिकारी जांच करवाने की बात कर रहे हैं |

उमरिया जिले में किसानों का खून चूसने में सहकारी समितियां पीछे नहीं हैं | शासन प्रशासन लाख दावे करे कि किसानों को हर सुविधा देंगे और किसी तरह शोषण नहीं होने देंगे लेकिन सहकारी समितियों के प्रबन्धक सभी आदेशों को अपनी जेब में रखते हैं और उसका कहीं भी पालन नहीं करते, अपना घर भरने में पीछे नहीं रहते ऐसा ही मामला सहकारी समिति पनपथा, चिल्हारी और बकेली में देखने को मिला जहां किसानो से प्रति बोरी 400 ग्राम ज्यादा गेंहू लिया जाता है जबकि शासन स्तर से बोरी सहित 50 किलो 580 ग्राम गेंहू लेनेका निर्देश है लेकिन यहाँ 51 किलो लिया जा रहा है वहीँ किसानों को पूरी सुविधा देने का भी निर्देश है जिसमें किसान अपना गेंहू खरीदी केंद्र में लाकर रख देगा और तुलाई, भराई, सिलाई सभी काम समितियां करवाएंगी लेकिन किसान खुद हम्माली करता है और यदि अपना मजदूर लगता है तो उसका भुगतान भी खुद करता है | इस मामले में खरीदी केंद्र में मौजूद किसान कमलेश कुशवाहा का कहना है कि हम उनरिया बकेली समिति में गेंहू बेचे हैं हमसे 51 किलो की भरती लिए हैं कहते हैं कि 7 सौ ग्राम की बोरी कटती है और जो झर जाता है उसके बदले में अतिरिक्त लेते हैं अब कर्ज लिए हैं इअसलिये देना पड़ता है | वहीँ ग्राम चंदवार के बुजुर्ग किसान बलदेव प्रसाद मिश्रा का कहना है कि हमसे 50 किलो 8 सौ ग्राम ले रहे हैं और तौलने बोरी भरने के लिए अपने आदमी लाये हैं समिति पैसा नहीं देती है हम लोग आपस में एक दूसरे का काम कर देते हैं | किसान प्रदीप मिश्रा बताये कि हम अभी आये हैं और तुलवाई शुरू किये हैं हमको जानकारी नहीं है कितना लेते हैं मजदूर हमारे हैं इनकी मजदूरी मैं ही दूंगा |

इस मामले में समिति प्रबंधक पनपथा और बकेली नागेन्द्र मिश्रा से बात किया गया तो वो हर बात को सिरे से नकारते रहे और अपनी ईमानदारी बताते हुए कहे कि 50 किलो 7 सौ 8 सौ ग्राम लेते हैं शासन के निर्देश 7 सौ ग्राम के हैं कु छ बोरी झर जाता है इसलिए 7 सौ 8 सौ ग्राम लेते हैं तुलाई, भराई सिलाई के लिए अगर किसान अपनी लेबर ले आते हैं तो हम उनका भुगतान कर देते हैं किसान को सरासर झूठा बनाते हुए अपनी ईमानदारी बताते रहे |

गौरतलब है कि इस मामले में जिले के कोई भी अधिकारी निरिक्षण नहीं करते हैं जिसके चलते किसान लुट रहा है वहीँ जब जिला आपूर्ति अधिकारी बलमेंद्र सिंह परिहार से बात किया गया तो उनका कहना है कि खरीदी केंद्र स्तर पर नोडल अधिकारी बनाये गए हैं विकास खंड स्तर पर, अनुभाग स्तर पर निगरानी समिति बनाई गई है खाद्य, राजस्व विभाग के अधिकारी उपार्जन केन्द्रों पर लगातार निगरानी कर रहे हैं फिर भी आप जो बता रहे हैं हम उसके लिए खाद्य निरीक्षक को विशेष रूप से भेजेंगे और जो अनियमितता पाई जायेगी तो कड़ी कार्यवाई की जायेगी |

गौरतलब है कि प्रदेश सरकार लाख दावे करे किसानों को हर सुविधा देने की लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है चाहे कर्ज का मामला हो या गेंहू खरीदी का किसान के किस्मत में बस मेहनत ही है और मलाई खाने को नागरिक आपूर्ति निगम, विपणन संघ और सहकारी समिति के प्रबंधक साथ में सहकारिता से जुड़े सभी लोग हैं, ऐसे में प्रदेश सरकार के सभी दावे खोखले साबित हो रहे हैं | यदि सहकारी समितियों के प्रबंधकों के संपत्ति की जांच करवाई जाय तो सारी हकीकत सामने आ जायेगी |

 

 

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