Home क्राइम रंगे हांथो पकडे गये रिश्वत लेते सिविल सर्जन – सुरेन्द्र त्रिपाठी

रंगे हांथो पकडे गये रिश्वत लेते सिविल सर्जन – सुरेन्द्र त्रिपाठी

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उमरिया 10 अक्टूबर – जिला चिकित्सालय में पदस्थ प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. वेद  प्रकाश पटेल को 20 हजार की रिश्वत लेते रंगे  हाथो गिरफ्तार किया रीवा लोकायुक्त ने  वहीँ शिकायत कर्ता की माने तो शिकायतकर्ता ने पहले अपनी नौकरी से स्तीफा देने के बाद अपना इस्तीफा वापस लेने के मामले में सी एम एच ओ ने 40 हजार रूपए मांगे थे तो 20 हजार रुपये सिविल सर्जन के माध्यम से देने की बात पर लोकायुक्त ने फरियादी की  शिकायत पर छापा मार कर  रंगे हाथ पकड़ा |

उमरिया जिला चिकित्सालय में जैसे ही लोकायुक्त की टीम पहुंची और सिविल सर्जन के कार्यालय में छापा  पड़ा तो अफरा तफरी का माहौल बन गया और सिविल सर्जन को रंगे  हाथ 20 हजार की राशि लेते गिरफ्तार कर जमानत पर रिहा किया गया, फरियादी राज कुमार शुक्ला ने बताया कि 24 सितम्बर का एक पत्र मेरे को सी एम एच ओ का हस्ताक्षर किया हुआ 26 सितम्बर को प्राप्त हुआ कि आपको वीरेंद्र कुमार त्रिपाठी के साथ काम करना है तो मैंने अपनी असहमति व्यक्त किया तो मुझे यह कहा गया कि यदि आप उसके साथ काम नहीं कर सकते हैं तो अपना त्याग पत्र सौंप दें तब मैंने अपना त्याग पत्र 27 सितम्बर को दे दिया उसके बाद 02 अक्टूबर को सिविल सर्जन साहब ने मुझसे कहा कि तुम अपना काम करते रहो और सी एम एच ओ साहब कहते हैं कि उनको कुछ पैसे चाहिए तो मुझे दो उनको देना है और 40 हजार रुपये की मांग किया तब मैंने कहा कि मैं खुद दे दूंगा तो उन्होंने कहा कि सी एम एच ओ आपसे पैसे नहीं लेगा मुझे दे दो और भी कई बातें उन्होंने कहा तो मजबूर होकर मुझे यह कार्रवाई करना पड़ा |

इस मामले में जब सी एम् एच ओ डाक्टर राजेश श्रीवास्तव से बात किया गया तो उनका कहना है कि मैं कोर्ट गया हुआ था तो मुझे कुछ लोगों ने फोन पर बताया कि सिविल सर्जन रिश्वत लेते हुए पकडे गए हैं इसकी जानकारी मेरे पास नहीं है यदि मेरे ऊपर आरोप लगा रहे हैं तो प्रमाण प्रस्तुत करें, सिविल सर्जन मेरे कोई मीडिएटर तो हैं नहीं उनकी अपनी अलग स्थापना है उनकी तनख्वाह वो देते हैं मैं तो तनख्वाह भी नहीं देता हूँ, अब कोई कुछ बोल रहा है तो जब कोई चोर पकड़ा जाता है तो दुनिया भर के बहाने बताता है मुझे कुछ पता नहीं जब जांच होगी तो पता चलेगा |

इस मामले में डाक्टर वेद प्रकाश पटेल प्रभारी सिविल सर्जन अपनी सफाई देते हुए कहते हैं कि हमारे यहाँ एक स्टोर कीपर थे राज कुमार शुक्ला, उन्होंने रिजाईन कर दिया था पिछले महीने, उससे पहले हमारा पैसा 20 हजार रूपये चाह रहे थे मैंने वाही उनसे माँगा था तो पता नहीं क्या हुआ दिए और ट्रैप की कार्रवाई करवा दिए, मैंने तो अपना पैसा माँगा था जबकि वहीँ एक व्यक्ति सामने न आने की शर्त पर बताया कि मेरे से भी आपरेशन के लिए 10 हजार रुपये मांगे हैं, उस पर भी पानी सफाई देते हुए कहे कि नहीं ऐसा कुछ नहीं है | गौरतलब है कि सिविल सर्जन लोकायुक्त के चक्कर में फंसने के बाद साहूकार भी बन गए और पैसा उधार देने की बात करने लगे |

इस मामले में लोकायुक्त डी एस पी बी के पटेल का कहना है कि राज कुमार शुक्ला अपने घरेलू समस्याओं के चलते स्तीफा दे दिया था कुछ दिन बाद घर में चर्चा हुई होगी कि अभी नौकरी करना चाहिए तो कुछ दिन बाद पुनः एक आवेदन दिया गया कि में जो सेवा निवृत्त हो गया था तो पुनः सेवा करना चाहता हूँ उस सम्बन्ध में डाक्टर व्ही पी पटेल द्वारा 20 हजार रुपये की मांग की गई थी | शुक्ला द्वारा एस पी लोकायुक्त को आवेदन दिया गया, जानकारी सही पाई जाने पर योजना बना कर आज टैप कार्रवाई की गई 20 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया अभी जांच चल रही है |

गौरतलब है जिला अस्पताल भर नहीं ऐसे कई विभाग हैं जहां खुले आम पैसों का लेन – देन होता है यदि वहां भी इसी तरह की कार्रवाई की जाय तो असलियत सामने आ जायेगी और भ्रष्टाचार में अंकुश लगेगा वहीँ इन डाक्टर साहब के सम्पति की भी जांच हो तो उनकी साहूकारी भी सबके सामने आ जायेगी कि किसको – किसको कर्ज दिए हैं |

 

 

 

 

 

 

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