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मौत पर हंगामा – सुरेन्द्र त्रिपाठी

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मौत पर हंगामा

उमरिया 03 अक्टूबर – जिले में महिला की मौत पर हुआ हंगामा, वहीँ महिलाओं के शव का हुआ अपमान, पुरुष चिकित्सक ने किया दो महिलाओं के शव का पोस्ट मार्टम | नेतागिरी चमकाने डाक्टर पर लगाये आरोप कि गलत ईलाज से हुई मौत, शव को रख कर बाजार में किये हंगामा | एस डी एम कि समझाईश पर ले गए अंतिम संस्कार के लिए, डाक्टर ने लगाया नेता पर पैसे माँगने  का आरोप | प्रशासन ने कहा मामले की होगी जांच, जांच में जो सामने आयेगा उस पर होगी कार्यवाई |

उमरिया जिले के ग्राम चंदवार निवासी लक्ष्मी साहू की मौत बीमारी से हो गई, उसके पति और जेठ ने बताया कि काफी दिनों से रही बीमार, जिला अस्पताल में और डाक्टर बंगाली के यहाँ भी ईलाज करवा चुके हैं लेकिन ठीक नहीं हुई, कल देर शाम को निजी चिकित्सक डाक्टर गुप्ता के यहाँ भी लेकर गए तो डाक्टर खून जांच करने को लिखे और फिर हालत ठीक नहीं देख कर जिला अस्पताल ले जाने को कह दिए, जहाँ लाये तो इंजेक्शन लगने के कुछ देर में मौत हो गई |

इधर कांग्रेस के नेता मृतक के परिजन को समझा कर अपनी नेतागिरी चमकाने को कहवाने लगे कि डाक्टर गुप्ता के ईलाज से महिला की मौत हो गई, हालाँकि इस पूरे मामले में पति और उसके बड़े भाई ने कुछ नहीं बोला बस रिश्तेदार ही बोलते रहे वह भी ठीक ढंग से नहीं बता पाए, मृतिका के रिश्तेदार राम बहोर साहू ने बताया कि उनकी तबियत ख़राब थी मैं वहां से लेकर आया गुप्ता डाक्टर के पास तो मेरे को बोले कि जूस लेकर आओ, मैं जूस लेकर आया तो खून जांच के लिए लिखे लगता है सुई भी लगाये हैं मेरे को दवा लिख कर दिए तो मैं लाया 210 रुपये का था फिर दुबारा अस्पताल में आये तो जो कागज लिखे थे वो मेरे से ले लिए और खून जांच का रिपोर्ट दे दिए |

सबसे बड़ी बात तो यह रही कि एक और महिला की मौत जलने से हो गई, दोनों के शव का पोस्ट मार्टम एक पुरुष चिकित्सक के द्वारा किया गया जबकि जिला अस्पताल में 6 महिला चिकित्सक मौजूद हैं फिर भी अस्पताल प्रबंधन को अपने बजट की हेरा – फेरी करने से फुरसत न होने के कारण महिलाओं के शव का अपमान किया गया, जबकि नियमानुसार महिल के शव का पोस्ट मार्टम महिला चिकित्सक के द्वारा किया जाना चाहिए लेकिन उमरिया जिले में प्रदेश सरकार के किसी नियम का पालन नहीं किया जाता है खास कर जिला अस्पताल में पूर्ण रूप से मनमानी का राज्य है यहाँ  किसी के आदेश – निर्देश का कोई असर नहीं होता है | शव का पोस्ट मार्टम करने आये चिकित्सक डाक्टर सरफराज बताये कि दो दिन में रिपोर्ट दे दी जायेगी, वहीँ जिला पंचायत सदस्य सावित्री सिंह जिला अस्पताल प्रबंधन के इस कृत्य पर घोर आपति जताईं कि जब जिले में महिला चिकित्सक मौजूद हैं तो महिलओं के शव का पोस्ट मार्टम महिला चिकित्सक द्वारा किया जाना चाहिए |

इस मामले में कांग्रेस नेता महिला के शव को नगर के मुख्य चौक गाँधी चौक में रख कर नारेबाजी करते रहे कि हमको न्याय चाहिए झोला छाप डाक्टर को गिरफ्तार किया जाय, काफी नारेबाजी कर भीड़ जुटाने का प्रयास किया गया लेकिन भीड़ भी नहीं जुट पाई, हाँ पुलिस जरूर मौके पहुँच कर समझाने का प्रयास करने लगी लेकिन नेता जल्दी मानने को तैयार नहीं थे तब बांधवगढ़ एस डी एम को मौके पर बुलाया गया जिनकी समझाईस के बाद शव को ले जाया गया | एस डी एम नीलाम्बर मिश्रा का कहना है कि जैसा इनका कहना है कि डाक्टर के द्वारा गलत इंजेक्शन लगाने से मरीज की मौत हुई है, जब तक पूरी तरह से जांच नहीं हो जायेगी और तथ्य स्पस्ट नही हो जायेंगे तब तक यह नहीं कहा जा सकता कि किस कारण मृत्यु हुई है, किन्तु जांच के बाद यह तथ्य स्पष्ट होता है कि डाक्टर के द्वारा दिए गए इंजेक्शन से मौत हुई है तो जो भी वैधानिक कार्यवाई होगी किया जायेगा, शासन के द्वारा अंत्येष्ठी सहायता राशी दिलवाने का जो भी प्रावधान होगा उसके तहत हम जल्दी दिलवाने का प्रयास करेंगे, |

इस मामले में डाक्टर गुप्ता का कहना है कि मेरे पास एक सीरियस मरीज आया उसको बल्ड टेस्ट लिखा गया और रिपोर्ट आने के पहले और सीरियस हो गई तो मैंने जिला अस्पताल रिफर कर दिया उसी समय मेरे एक दो मित्र भी बैठे थे वो लोग भी बोले कि रिफर कर दो तो मैंने रिपोर्ट आने के पहले रिफर कर दिया, वो रस्ते में कहाँ और कैसे ख़त्म हो गई मेरे को जानकारी नहीं है, और हमसे 20 हजार रुपये की मांग करता था नेता सकील खान, जब हम नहीं दिए तो कहा कि मैं तुम्हारी क्लीनिक बंद करवा दूंगा, षडयंत्र के तहत वो प्रशासन के ऊपर दबाब बना रहा है और हमको धमकी से रहा है कि क्लिनिक बंद करवा दूंगा |

जब एस डी एम से पुरुष चिकित्सक के द्वारा शव के पोस्ट मार्टम करने के बारे में बात किया गया तो उनका कहना है कि इस बारे में मेरे को अभी जानकारी नहीं है मैं देखूंगा | वहीँ जब झोला छाप डाक्टरों के बारे में बात किया गया तो उनका कहना है कि एक अभियान बना कर कार्यवाई हम लोग करेंगे, एक टीम बनायेंगे और टीम के साथ जो भी ऐसे डाक्टर हैं जैसे बिना मान्यता प्राप्त या झोला छाप कार्यवाई की जायेगी |

गौरतलब है कि जिले में झोला छाप डाक्टरों की भरमार है और सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों द्वारा मरीज की अनदेखी किये जाने से इनका धंधा भी फल – फूल रहा है, झोला छाप पर कार्यवाई करने के साथ – साथ जिला प्रशासन को चाहिए कि सरकारी अस्पतालों में पदस्थ डाक्टरों पर भी नकेल कसा जाय कि मरीज को ठीक से देखें और उनको रिफर करने की जगह इलाज करें |

 

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