Home राज्य धार्मिक सौहार्द्र पेश किया आई पी एस स्कूल ने – सुरेन्द्र त्रिपाठी

धार्मिक सौहार्द्र पेश किया आई पी एस स्कूल ने – सुरेन्द्र त्रिपाठी

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गरबा महोत्सव

उमरिया 20 अक्टूबर – जिला मुख्यालय में स्थित आईपीएस इंटरनेशनल स्कूल में जहां अच्छी शिक्षा के साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए समय-समय पर अनेक कार्यक्रम होते हैं इसी कड़ी में विजयादशमी के उपलक्ष्य में आईपीएस स्कूल में गरबा, डांडिया के कार्यक्रम का आयोजन किया गया | स्कूल के संचालक डाक्टर उस्मान मंसूरी ने धर्म निरपेक्षता की मिशाल पेश किया |

उमरिया जिला मुख्यालय में स्थित आईपीएस इंटरनेशनल स्कूल में जहां अच्छी शिक्षा के साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए समय-समय पर अनेक कार्यक्रम होते हैं इसी कड़ी में विजयादशमी के उपलक्ष्य में आईपीएस स्कूल में गरबा, डांडिया के कार्यक्रम का आयोजन किया गया इसमें स्कूल के छात्र-छात्राओं ने डांडिया नृत्य कर लोगों का मन मोह लिया, इस मौके पर स्कूल के छात्र-छात्राओं ने एकल नृत्य के साथ समूह नृत्य का भी शानदार प्रदर्शन किया, बच्चों के इन कार्यक्रमों को देख कर सभी ने आई पी एस इंटरनेशनल स्कूल स्कूल के बच्चों की जमकर तारीफ की, कार्यक्रम की शुरुआत में गेस्ट ऑफ ऑनर मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों ने शिक्षा की देवी मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया इसके बाद छात्रा छात्राओं का उपस्थित अतिथियों के समक्ष परिचय कराया गया, इसी कड़ी में गरबा नृत्य जो गुजरात का प्रमुख नृत्य है उसकी प्रस्तुति हुई जिसे देखने वालों को कुछ क्षण के लिए यह महसूस हुआ कि वह मध्यप्रदेश के उमरिया में ना होकर गुजरात में उपस्थित हैं, कार्यक्रमों की कड़ी में छात्र-छात्राओं के एकल नृत्य भी हुए जो फिल्मी गानों पर आधारित थे छात्राओं की मनमोहक प्रस्तुति देखकर सभी दर्शकों व अतिथियों ने जमकर तारीफ की इसके बाद अगली कड़ी के तौर पर छात्राओं के ग्रुप ने डांडिया नृत्य का प्रस्तुतीकरण किया डांडिया में छात्राओं ने अपना कमाल दिखाया ग्रुप डांस में 30 से 40 छात्राएं सम्मिलित हुई, आपको बता दें कि आईपीएस स्कूल धर्मनिर्पेक्षता के मामले उमरिया जिले में अपनी अलग पहचान रखता है, यहां हर धर्मों के पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है जो सौहार्द की मिसाल है। इस मामले में आई पी एस स्कूल के संचालक डाक्टर उस्मान मंसूरी बताये कि हम सब हिन्दुस्तान में रहते हैं यहाँ अलग – अलग धर्म के लोग हैं स्कूल में हर धर्म के कार्यक्रम होते हैं इस समय विजयादशमी का पर्व चल रहा था तो दशहरे का कार्यक्रम और जब जैसा त्यौहार होता है जैसे गणेश चतुर्थी होती है तो बच्चे गणेश जी की प्रतिमा रखते हैं तो हमने सोचा कि यहाँ पर गरबा का कार्यक्रम करें तो हमारे टीचर 10 – 15 दिन से लगातार सिखाते रहे यह तीसरा दिन था इसके पहले भी कार्यक्रम बाजारों में हुआ है, आज इसलिए यहाँ कार्यक्रम रखे हैं |

वहीँ जब उनसे पूंछा गया कि आपको यह स्कूल खोलने की आवश्यकता कैसे महसूस हुई तो उनका कहना है कि यह आदिवासी क्षेत्र है यहाँ कोयले की खदाने भी हैं यहाँ ऐसा लगा कि अशिक्षा की वजह से लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है और यहाँ ऐसी स्कूल की व्यवस्था होनी चाहिए कि लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और कुछ ऐसी बाते बताई जाय जो इस क्षेत्र में नही बताई जाती है जैसे यूसीमॉस वगैरह की कमी थी जिसके कारण हमारे मन में आया कि ऐसी स्कूल खोली जाय जिससे पढाई के अलावा यूसीमास, कोचिंग, ट्यूशन आदि सुविधा मिल सके और अभिभावक के पैसे की बचत हो अच्छी से अच्छी शिक्षा बच्चो को मिल सके |

गौरतलब है कि डाक्टर उस्मान मंसूरी कोल इंडिया से अच्छे पद से रिटायर होने के बाद समाज के उस वर्ग के लिए विचार किये जो कमजोर वर्ग कहलाता है और क्षेत्र के बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए कम खर्च में व्यवस्था देने का प्रयास कर रहे हैं, अपनी बचत को दरकिनार कर यह सराहनीय कार्य कर रहे हैं |

 

 

 

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