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उमरिया कलेक्टर की सराहनीय पहल – सुरेन्द्र त्रिपाठी

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कलेक्टर की पहल

उमरिया 23 सितम्बर – कलेक्टर की सराहनीय पहल, जिले की बच्चियों को दिलवा रहे हैं पी एस सी की निःशुल्क कोचिंग, जन सहयोग से कर रहे हैं व्यवस्था | 140 लड़कियाँ ले रही हैं लाभ, सभी वर्ग की लड़कियाँ सीख रही हैं प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने के गुण | रहना – खाना और आना – जाना भी करवा रहे हैं निःशुल्क | देश के अच्छे संस्थानों से शिक्षक बुलवा कर दिलवा रहे हैं कोचिंग | वहीँ जिले के अधिकारी और शिक्षक भी दे रहे हैं निःशुल्क सेवा |

उमरिया कलेक्टर माल सिंह का कहना है कि हमने उमरिया जिले में यह महसूस किया है कि यहाँ कि लड़कियाँ शासकीय सेवा में बहुत कम हैं, बड़े पदों में तो बहुत कम हैं, हमने महसूस किया कि बच्चियां तो प्रतिभाशाली हैं, यदि इनको सही ढंग से गाईड किया जाय और परफार्म किया जाय तो सफल हो सकती हैं, इसी को ध्यान रख कर मैंने यह छोटा सा कोचिंग चलाया है, जो कि पूरा निःशुल्क है करीब 140 बच्चियों का पंजीयन करवाया है जिसमें उमरिया भर की नहीं बल्कि अन्य जिलों की बच्चियां भी आ रही हैं, जो बहुत गरीब और दूर की बच्चियां हैं उनके रहने खाने की भी व्यवस्था निःशुल्क किये हैं, जन सहयोग से हमने सारी व्यवस्था किया है और जो बच्चियां बाहर रहती हैं उनके आने – जाने के लिए बस की व्यवस्था किये हैं, बस के लिए एक स्कूल से समझौता किये हैं और उनको ईधन की व्यवस्था करते हैं |

वहीँ दिल्ली से सेन्ट्रल फार एकेडमिक एंड एडमिनिस्ट्रेटिव स्टडीज से आये प्रबंधक अंकित श्रीवास्तव बताये कि यहाँ कलेक्टर साहबी ने हमें आमंत्रित किया था, यहाँ के बच्चों को एक्जाम ओरिएंटेड जानकारी देने आये हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं को कैसे दिया जाय कैसे सफल हों, पिछले साल हमने यहाँ एक कार्यक्रम किया था, सफलता एक नई पहल, उसमें हमने बच्चों को एस एस सी और बैंकिंग के लिए तैयार किया था तो हम यह देखना चाहते थे कि बच्चों का सिलेक्शन कैसा हुआ है, हमने यह देखा है कि बच्चों में पढ़ने की चाहत तो बहुत है लेकिन उन्हें सही दिशा, सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाता, इस बार कलेक्टर सर ने हमने आमंत्रित किया था तो इस बार हम फिर से आये हैं कि उन्हें परीक्षा कैसे पास करें बताएं, मुख्य रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं में ज्ञान ही सब कुछ नहीं होता है, तरीका बहुत महत्वपूर्ण होता है, ट्रिक से ही परिक्षा निकाली जा सकती है, ज्ञान से सब कुछ नहीं होता है यदि ज्ञान के भरोसे रहेंगे तो उतना समय नहीं होता है, परीक्षा पास करना काफी कठिन होता है |

जब यहाँ कोचिंग ले रही बच्ची शालिनी वर्मा से बात किये तो उसका कहना है कि पहले तो कुछ भी नही मालुम था कि प्रतियोगिता क्या होती है, यहाँ आने के बाद पता चला कि प्रतियोगिता क्या होती है, अब अपने आप में आत्म विश्वास जागने लगा है कि हम कुछ समय अपने – आप को देंगे तो पी एस सी भी निकालना कोई बड़ी बात नहीं है | वहीँ बताई कि यहाँ डाक्टर असित सर एस पी साहब, सी ई ओ जिला पंचायत वशिष्ट सर आई ए एस भी आ चुके हैं, कलेक्टर सर तो आते रहते हैं और भी गुप्ता मैडम भी आ चुकी है और हमारे जिले के लगभग सभी अधिकारी आ चुके हैं उनके अलावा बाहर से दिल्ली से जैसे अभी आये हैं और भी आते रहते हैं | वहीँ दूसरी छात्रा पूजा त्रिपाठी का कहना है हम लगभग 1 माह से यहाँ आ रहे हैं सारी सुविधाएं हैं, पढाई अच्छी हो रही है सबसे बड़ी बात यह है कि यहाँ अच्छे – अच्छे लोगों से मिलने का मौक़ा मिलता है | वहीँ जब पूंछे कि पी एस सी की परिक्षा निकल जायेगी या नहीं तो कही कि सब कुछ हमारे ऊपर निर्भर करता है शिक्षक तो मेहनत कर रहे हैं, हमें भी मेहनत करनी होगी और हम मेहनत करेंगे तो साफ है कि सफल हो जायेंगे, कलेक्टर सर की बहुत अच्छी पहल है मुझे बहुत खुशी होती है मैं तो कभी अपनी क्लास भी मिस नहीं करती |

वहीँ कलेक्टर माल सिंह का कहना है कि लोकल स्तर पर जो हमारे शिक्षक और अधिकारी हैं उनका हम सहयोग ले रहे हैं, जैसे एस पी साहब हैं, सी ई ओ जिला पंचायत, महिला सशक्तीकरण अधिकारी, डी पी सी और भी अन्य लोग हैं जो बच्चों के प्रति समर्पित हैं इसके साथ हम बाहर से भी फैकल्टी बुलाते हैं जैसे आज दिल्ली से आये हैं, और भी जगहों में हमारी बात चल रही है और बुलाएँगे, इन बच्चों के प्रति जितना अच्छा कर सकते हैं करेंगे |

इस मामले में जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी  दिव्या गुप्ता का कहना है कि यहाँ पर हम एम पी पी एस सी की तैयारी लड़कियों को करवा रहे हैं, यहाँ गेजुएट और अंडर ग्रेजुएट लड़कियाँ भी हैं, पी एस सी के साथ साथ अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की भी तैयारी करवा रहे हैं, यहाँ हमने बच्चियों को हर प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करवाए हैं जैसे 20 कंप्यूटर, इंटरनेट के साथ, यहाँ पानी की व्यवस्था के लिए आर ओ, खाने के लिए रसोइया लगाये हैं, सुबह नाश्ता और दोनों टाईम खाना देते हैं, लाइब्रेरी के साथ दिल्ली से नोट्स और भी कई प्रकार की सुविधाएँ दे रहे हैं, हर जरूरी चीजों की व्यवस्था करने का प्रयास किये हैं, यहाँ पर लगभग 70 लड़कियाँ डाईट परिसर में रह रही हैं उनमें से कुछ लड़कियाँ डी एड वाली भी हैं वो भी तैयारी कर रही हैं, उमरिया जिले के साथ कुछ लड़कियाँ शहडोल और कटनी जिलों की भी हैं |

गौरतलब है कि जिल के कलेक्टर की यह पहल जिले के बच्चियों के लिए सराहनीय तो है ही साथ ही यदि 50 लड़कियाँ भी सफल हो गई तो जिले का नाम प्रदेश भर नहीं देश में भी रोशन हो जाएगा |

 

 

 

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