Home भ्रष्टाचार सहकारिता के खेल निराले बेबस हुए जिले के अधिकारी भ्रष्टाचारियों का बोलबाला

सहकारिता के खेल निराले बेबस हुए जिले के अधिकारी भ्रष्टाचारियों का बोलबाला

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उमरिया – जिले में सहकारिता विभाग पर किसी की लगाम नही है या यूं कहें कि सहकारिता विभाग पूर्ण रूप से निरंकुश है तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी।
यहां करोड़ों के घोटाले करने के बाद भी ईमानदारी का चोला ओढ़े प्रभारी एआरसीएस और निरीक्षक बैठे हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं जिले की इंदवार शाखा की कहानी यहां एक राज धर तिवारी हैं जो वर्तमान में शाखा प्रबंधक के पद पर शोभायमान हैं। इनकी भी अजब कहानी है ये महाशय लगभग 20 से 25 वर्ष से एक ही जगह पर जमें हैं, पूर्व में कैशियर के पद पर रहे और अब जी एम शहडोल संतोष कुमार यादव एवं सहकारिता विभाग के संरक्षण में शाखा प्रबंधक इंदवार के पद पर बैठे हैं, इतना ही नहीं ये महाशय ऋण माफी घोटाले में भी शामिल हैं। इनके बारे में जब जी एम शहडोल संतोष कुमार यादव के मोबाइल नंबर 7582097823 पर फोन किया गया तो उनके द्वारा फोन ही नही उठाया गया।
अब आगे चलते हैं सहकारिता विभाग के प्रभारी एआरसीएस अभय सिंह की तरफ तो जब से यहां प्रभार ग्रहण किये हैं तब से वो अपने चहेतों को ही सहकारी समितियों का प्रशासक बनाये हैं और किसी भी तरह की शिकायत आने पर अपने ही चहेते गुर्गों को जांच दे देते हैं एवं सभी जांच में दोषी कोई नही पाया जाता है। इससे बड़ा राम राज्य कहाँ मिलेगा।
अब इनके कुछ नमूने देखिए किस तरह भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देते हैं।


शुरुआत करते हैं विभाग के सबसे बड़े सबसे बड़े भ्रष्टाचारी सहकारिता निरीक्षक चन्द्र मणि द्विवेदी से, जब ये पाली, कोटरी, इंदवार, चिल्हारी, अमरपुर और कुम्हरवाह के प्रशासक रहे तब हर समिति में करोड़ो रूपये के घोटाले किये और जब उन घोटालों की आवाज उठने लगी तब उनको छोड़ कर दूसरी समितियों का प्रभार ले लिए। बिरसिंहपुर पाली का प्रशासक रहते समय सूखा, धौरई, सरवाही, सलैया जैसे गांव के ग्रामीणों के नाम पर फर्जी ऋण वितरित कर सारी रकम डकार गए और आरोप प्रबंधक पर लगा दिए, जबकि बिना प्रशासक के सहमति और हस्ताक्षर के कोई भी कार्य नही हो सकता है। जब पाली का घोटाला उजागर हुआ और ग्रामीण शिकायत किये तो उस समिति से दूर हो गए। इसके बाद कोटरी, इंदवार, अमरपुर, चिल्हारी और कुम्हरवाह में भी ऋण मुक्ति और ब्याज जैसे मामले में करोड़ो का हेरफेर करना शुरू कर दिए जब वहां भी बड़े स्तर पर वही घोटाला कर लिए और जांच की मांग उठने लगी तो उनको भी छोड़ दिये, कोटरी में तो प्रबंधक रजनीश दत्त तिवारी और प्रशासक दोनो मिल कर बड़े घोटाले किये हैं जिसकी शिकायत जिले के कलेक्टर से लेकर सभी के पास है, प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी के पास भी रजनीश दत्त की फर्जी नियुक्ति और घोटालों की जानकारी होने के बाद भी 3 समितियों का खरीदी प्रभारी बना दिया गया।
अब चन्द्र मणि द्विवेदी के पास बल्हौण्ड, सिगुड़ी, कोठिया, गढ़पुरी, कुम्हरवाह, बड़खेरा 16, पथरहटा, उमरिया, मानपुर, कौड़िया(सलैया) जैसी समितियों का प्रभार है, इनमें भी घोटाला करने की तैयारी है।

अब दूसरे सहकारिता निरीक्षक संजय सराफ के कारनामे देखें तो ये भी कम नही हैं। इनके पास 19 सहकारी समितियों का प्रभार है, जिसमें ये भरौला का प्रभार मिलते ही नियम विरुद्ध विक्रेता भूपेन्द्र सिंह को प्रबंधक पद पर एआरसीएस से मिल कर नियुक्त करने का आदेश जारी करवा दिए जबकि उनके ऊपर शासकीय राशि की रिकवरी होना बाकी है। गौरतलब है कि जब तक पूरी रकम की रिकवरी नही हो जाती तब तक उसको प्रभार नही दिया जा सकता हालांकि सहकारिता विभाग इतना भ्रष्ट है कि यहां किसी अधिकारी के आदेश नही चलते, यहां सभी लोग स्वयंभू भगवान हैं। यह अलग बात है कि जब ईमानदारी से जांच होती है तो जेलयात्रा के अलावा कोई विकल्प नही रहता है। जिसका उदाहरण पूर्व प्रबंधक रमेश सिंह और जगदीश तिवारी हैं तो वहीं अंजनी श्रीवास्तव अभी भी अदालत के चक्कर लगा रहे हैं, ऐसे एक नही कई उदाहरण हैं।

हां तो बात कर रहे थे संजय सराफ की, इनके पास वर्तमान में 19 समितियों का प्रभार है जिसमे भरौला, मालाचुआ, चौरी, घुनघुटी, पाली, निपनिया, रहठा, कंचनपुर, कौड़िया 22, पिनौरा, छादा कला, कल्दा, करकेली, पडवार, चिल्हारी, कोटरी, अमरपुर, भरेवा, और इंदवार शामिल हैं, और सभी समितियों में संजय सराफ का जादू चल रही है।
अब तीसरे सहकारिता निरीक्षक संदीप साकेत की बात करें तो इनके पास पूर्व में भरेवा और पडवार रही जहां ये भी घोटाला करके किनारा काट लिए हालांकि दो दिग्गजों चन्द्र मणि द्विवेदी और संजय सराफ के कारण इनको मात्र 7 समितियों का ही प्रभार दिया गया है जो इस प्रकार हैं – कठार, नौगँवा, मजमानी, मझौली खुर्द, चंदिया, ददरौंडी और डोंगरगंवा शामिल हैं।


अब बची चौथी महिला निरीक्षक उषा कापसे जिनको अभी तक प्रभारी एआरसीएस अभय सिंह द्वारा इन बाहुबली भ्रष्टाचारियों के चलते कोई प्रभार न देकर कार्यालय में बैठा कर रखा गया था लेकिन भ्रष्टाचार उजागर होता देख तसल्ली के लिए पिण्ड्रा और बिलासपुर का प्रभार 3 दिन पहले देकर औपचारिकता निभा दी गई।
अब सवाल यह उठता है कि विश्वास सारंग जैसा अनुभवी नेता को सहकारिता मंत्री बनाया गया है और अनुभवी सचिव राज्य स्तर पर बैठे हैं उसके बाद उनके नाक के नीचे छोटे से जिले में करोड़ो के खेल एक – एक समितियों में हो रहे हैं और उनको पता नही है या पता है भी तो क्या वो भी फीलगुड कर रहे हैं, जबकि प्रदेश में डॉक्टर मोहन यादव की सरकार में भ्रष्टाचारियों को तत्काल हटाया जा रहा है और जहां इनको खुला संरक्षण मिला हुआ है वहीं गरीब जनता पिस रही है।

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