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मामा के आगमन से यात्री परेशान बसें नदारद

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प्रदेश के मुखिया को आना हो या देश के किसी बड़े नेता को सरकार किसी की भी हो सत्ता पक्ष के किसी भी नेता को आसपास के 100, 200, 300 किलोमीटर दूर तक के जिलों में यदि आने का कार्यक्रम बनता है तो आम जनता को ले जा कर वहां शक्ति प्रदर्शन किया जाता है, क्षेत्रीय नेता अपने अपने क्षेत्र से जनता ले जाकर अपना वर्चस्व बताने का प्रयास करते हैं, हम अपने क्षेत्र से इतनी जनता को बटोर कर लाए हैं चाहे खेती का सीजन हो चाहे शादी ब्याह का नेताओं को किसी से कुछ भी नहीं लेना देना उनको तो बस अपना परिचय और अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए भीड़ जुटाना ही है। शासन स्तर से भी निर्देश दिए जाते हैं सत्ता पक्ष के नेताओं को हमारे माननीय का फलानी जगह आगमन हो रहा है आप अपने क्षेत्र की जनता को लेकर आइए अभी कल अमरकंटक में प्रदेश के मुखिया का आगमन हुआ और कल फिर अर्थात 5 तारीख को फिर व्योहारी में कार्यक्रम है मगर उमरिया जिले के बस स्टैंड पर सवारियों को परेशान होते देखा जा रहा था किस तरह से सवारी अपने गंतव्य तक छोटे-छोटे बच्चे, परिवार, पत्नी, माता-पिता सबको लेकर जाने के लिए साधन के इंतजार में बैठे थे।

साधन के इंतजार में यात्री


बसें तो बस स्टैंड में बहुत खड़ी थी मगर कोई भी बस उनके गंतव्य तक जाने के लिए तैयार नहीं थी, क्योंकि सरकार का जो फरमान था कि कल जनता को लेकर के मामा के कार्यक्रम में जाना है। चाहे कार्यक्रम मामा का हो या विपक्ष के किसी बड़े नेता का हो पिसना तो जनता और बस मालिकों को ही है।

बस स्टैंड का दृश्य

बस मालिक भी दबी जुबान में कहते हैं कि हमारा दो पैसे कमाने का जब सीजन होता है तभी बड़े-बड़े नेताओं का आगमन होता है चाहे सीधी आना हो, चाहे ग्वालियर आना हो चाहे वो व्योहारी हो या अमरकंटक हो कहीं भी हो जबलपुर हो या सतना हो हर जगह पिसना बस मालिक ही हैं और उनकी बसों को यदि सड़क पर चलाना है तो मजबूरी है शासन और प्रशासन के निर्देश का पालन करना होगा मगर प्रदेश के मुखिया हो या कोई नेता आम जनता की समस्याओं को नहीं देखते। इस समय तो गेहूं की कटाई चना मसूर की कटाई बच्चे बच्चियों की शादी का सीजन वही बच्चों की परीक्षाएं सभी कुछ इसी समय है मगर सरकार हो या नेता किसी को कोई मतलब नहीं बस उनको तो बड़े नेताओं के सामने भीड़ जुटाने के लिए संसाधन चाहिए जनता परेशान हो या कुछ हो बाद में वही जनता के दरवाजे पर पहुंच जाएंगे कि हम आपके शुभचिंतक हैं जबकि आने वाले बड़े नेताओं को चाहिए कि विशेष वाहनों की व्यवस्था कर जनता को बुलाएं सड़कों पर चलने वाली बसों को ना डिस्टर्ब किया जाए, ना बुलाया जाए ताकि सवारियों का भी आवागमन सुचारू रूप से होता रहे।

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