Home भ्रष्टाचार कलेक्टर के आदेश पर भारी जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी

कलेक्टर के आदेश पर भारी जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी

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उमरिया – जिले के जनजातीय कार्य विभाग में पदस्थ भ्रष्टाचारी बाबू सहायक वर्ग 2 बृजेन्द्र सिंह के कारनामे तो आपको पूर्व में बताया ही जा चुका है और यह भी मालुम है कि इस विभाग की मंत्री कौन हैं, शायद भूल गए होंगे, चलिए एक बार फिर से बता देते हैं, इस विभाग की मंत्री मानपुर 90 विधानसभा क्षेत्र से विधायक मीना सिंह हैं जो प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। वैसे तो इनका विभाग घोटालों के लिए बदनाम हैं, यदि देखेंगे तो इस विभाग के हर कार्य मे भारी घोटाला है। चाहे वह छात्रावासों, आश्रमों में गद्दा, कम्बल सप्लाई का हो या निर्माण कार्य का हो या फिर बस्ती विकास योजना मद से विद्युतीकरण करण का हो, कहाँ तक गिनाएंगे हर क्षेत्र में घोटाला है, हालांकि इस विभाग का उद्देश्य आदिवासी हित का कार्य करना है, वैसे देखेंगे तो पैरामेडिकल कालेजों में भी विभाग की मिलीभगत से आदिवासी छात्र – छात्राओं के वजीफा की राशि संचालक और अधिकारियों के बीच बंदरबांट हो जाती है, इतना ही नही पैरामेडिकल कालेजों में न कोई उपकरण है न कोई पढ़ाई होती है, बस परीक्षा दिलवा कर पास की अंकसूची दे दी जाती है।
खैर कहाँ तक विभाग, मंत्री और अधिकारियों का बखान करें, सीधे मुद्दे की बात पर आते हैं। जिले में पदस्थ सहायक वर्ग 2 बाबू बृजेन्द्र सिंह का जादू ऐसा चल रहा है कि मंत्री के नाक के नीचे कलेक्टर के आदेश को हवा में उड़ा दिया गया है। दिनांक 16/06/2023 को जिले के कलेक्टर डॉक्टर के डी त्रिपाठी बाबू की हरकतों को जान कर सहायक आयुक्त कार्यालय से परियोजना कार्यालय में स्थानांतरित कर रिलीव करउमरिया – जिले के जनजातीय कार्य विभाग में पदस्थ भ्रष्टाचारी बाबू सहायक वर्ग 2 बृजेन्द्र सिंह के कारनामे तो आपको पूर्व में बताया ही जा चुका है और यह भी मालुम है कि इस विभाग की मंत्री कौन हैं, शायद भूल गए होंगे, चलिए एक बार फिर से बता देते हैं, इस विभाग की मंत्री मानपुर 90 विधानसभा क्षेत्र से विधायक मीना सिंह हैं जो प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। वैसे तो इनका विभाग घोटालों के लिए बदनाम हैं, यदि देखेंगे तो इस विभाग के हर कार्य मे भारी घोटाला है। चाहे वह छात्रावासों, आश्रमों में गद्दा, कम्बल सप्लाई का हो या निर्माण कार्य का हो या फिर बस्ती विकास योजना मद से विद्युतीकरण करण का हो, कहाँ तक गिनाएंगे हर क्षेत्र में घोटाला है, हालांकि इस विभाग का उद्देश्य आदिवासी हित का कार्य करना है, वैसे देखेंगे तो पैरामेडिकल कालेजों में भी विभाग की मिलीभगत से आदिवासी छात्र – छात्राओं के वजीफा की राशि संचालक और अधिकारियों के बीच बंदरबांट हो जाती है, इतना ही नही पैरामेडिकल कालेजों में न कोई उपकरण है न कोई पढ़ाई होती है, बस परीक्षा दिलवा कर पास की अंकसूची दे दी जाती है।
खैर कहाँ तक विभाग, मंत्री और अधिकारियों का बखान करें, सीधे मुद्दे की बात पर आते हैं।

जिले में पदस्थ सहायक वर्ग 2 बाबू बृजेन्द्र सिंह का जादू ऐसा चल रहा है कि मंत्री के नाक के नीचे कलेक्टर के आदेश को हवा में उड़ा दिया गया है। दिनांक 16/06/2023 को जिले के कलेक्टर डॉक्टर के डी त्रिपाठी बाबू की हरकतों को जान कर सहायक आयुक्त कार्यालय से परियोजना कार्यालय में स्थानांतरित कर रिलीव करने का आदेश कर दिए और परियोजना कार्यालय में बाबू बृजेन्द्र सिंह द्वारा आमद भी दी गई लेकिन 5 दिनने का आदेश कर दिए और परियोजना कार्यालय में बाबू बृजेन्द्र सिंह द्वारा आमद भी दी गई लेकिन 5 दिन बाद ही प्रभारी सहायक आयुक्त भरत सिंह राजपूत बिना जिले के कलेक्टर को बताए पुनः सहायक आयुक्त कार्यालय में बुला कर वही कुर्सी फिर से सौंप दिए जिस पर बैठ कर ये करोणों का घोटाला किये थे। ऐसा लगता है कि प्रभारी सहायक आयुक्त को भी इनके बिना घोटाले करने में मजा नही आता था, भले ही उसमें कलेक्टर के आदेश की खुली अवहेलना होती रहे। हां कहावत ही है कि सैंया भये कोतवाल तो डर कहे का, जब विभाग के मंत्री का हाथ सर पर हो तो कलेक्टर की गिनती ही क्या होती है, फिर अगर मुख्यमंत्री की भी मूक सहमति हो तो सोने में सुहागा वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है।
एक तरफ तो मुख्यमंत्री लोगों के घर गिराने, भ्रष्टाचार समाप्त करने और भ्रष्टाचारियों को सख्त सजा देने की बड़ी बड़ी बात करते हैं लेकिन उमरिया जिले में उनके सारे वादे, सारी घोषणाएं शिथिल क्यों हो जाती हैं, समझ से परे है।

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