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भीषण गर्मी से बालरूप रामलला पसीने से हुए तार-तार

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हमारी परंपरा और संस्कृति में पत्थरों को भी भगवान का स्वरूप मानकर उनकी पूजा अर्चना की जाती है। हमें हमारे पूर्वजों से ये विरासत में मिला है कि आदि काल से मंदिरों में विराजमान पत्थर की मूर्ति को भी भगवान की तरह सजीव मान कर पूजा जाता है, उनकी उसी तरह से देखभाल की जाती है जिस तरह से कोई इंसान की करता है।

ऐसा माना जाता है कि जिस प्रकार मनुष्य अपने परिवार को हर सुख-सुविधा देने के लिए हर तरह के साधन जुटाता है उसी तरह मंदिरों में और वहां बिराजे भगवान के लिए भी मौसम के अनुसार तरह-तरह की सुविधाएं देने का कार्य उनके पुजारी करते हैं।इसी कारण गर्मी का मौसम आते ही हर मंदिरों में एसी कूलर पंखे लगा दिए जाते हैं, जिससे भगवान को भी गर्मी से बचाया जा सके।

गर्मी के मौसम में चिलचिलाती धूप से और भीषण गर्मी से राहत के लिए अयोध्या के मंदिरों एंव मंदिरों के गर्भगृहों में एसी व कूलर लगा दिये गये हैं लेकिन इस भीषण गर्मी में राम जन्मभूमि परिसर के अंदर विराजे बाल रूप में रामलला सिर्फ एक पंखे के सहारे रह रहे हैं। उन्हें अभी तक एसी और कूलर की हवा नसीब नहीं हुई है। जबकि अयोध्या के सभी मंदिरों में बिराजे भगवानों के लिए एसी व कूलर का इंतजाम कर दिया गया है।

रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का कहना है। आयोध्या विवादित परिसर में रामलला एक बाल रूप में विराजमान हैं उनकी सेवा एक बच्चे की तरह होनी चाहिए लेकिन रामलला के लिए कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही है। दरअसल बताया जा रहा है कि इस मंदिर में जो कुछ भी सुविधायें दी जाती हैं वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही होती हैं जिसके चलते इस भीषण गर्मी में रामलला को एसी और कूलर भी मुहैया नहीं हो पा रहा है।

वहीं दूसरी तरफ अयोध्या के अन्य दूसरे मंदिरों में भगवान के सामने कूलर एसी लगा दिए गए हैं इतना ही नहीं मौसम के अनुसार उनके भोग में भी परिवर्तन हो रहा है। ताकि उनके भोग की तासीर ठंडी बनी रहे। भगवान को सुबह ठंडे पानी से स्नान कराया जाता है। और सूती हल्के वस्त्र पहनाये जाते हैं। यदि किसी कारण वश मंदिरों में बिजली की सप्लाई बाधित होती है तो जनरेटर की भी व्यवस्था होती है ताकि भगवान को हमेशा भीषण गर्मी में ठंडी हवा मिलती रहे। इसके ठीक विपरीत बेचारे बालरूप रामलला को सिर्फ एक पंखा देकर मुंह बंद कर दिया है।

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