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प्रकृति का सबसे बड़ा दुश्मन बना इंसान, तेजी से कर रहा है पहाड़ों का दोहन

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कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भारत शानदार पहाड़ो से घिरा हुआ है। जिनमें कई तरह की सुंदर, मनोरम घाटियां हैं। पहाड़ को जीवंत रखने के लिए जरूरी मुख्य तत्वों में पेड़ और पानी- दोनों का सबसे बड़ा योगदान होता है। वृक्ष से पानी, पानी से अन्न तथा अन्न से जीवन मिलता है। जीवन को परिभाषित करने के लिए जीव और वन- दोनों जरूरी हैं। जहां वन होता है वहीं जीव होते हैं। इनके बिना पहाड़ अधूरा और कमजोर है। दूसरी ओर पहाड़ों के कारण ही नदियों का बहना जारी है। मानव एक ओर जहां पहाड़ काट रहा है वहीं नदियों पर बांध बनाकर उनके अस्तित्व को मिटाने पर तुला है तो दूसरी ओर अंधाधुंध तरीके से पेड़ काटे जा रहे हैं।
बायपास सड़क और रेत-गिट्टी के लिए कई छोटे शहरों के छोटे-मोटे पहाड़ों को काट दिया गया है और कइयों को अभी भी काटा जा रहा है। दरअसल, पहले किसी भी पहाड़ के उत्तर में गांव और शहर को बसाया जाता था ताकि दक्षिण से आने वाले तूफान और तेज हवाओं से शहर की रक्षा हो सके। मनुष्य के जीवन में पहाड़ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


प्राचीन ऋषियों को मालूम था कि ईश्वर के द्वारा रची गई इस संरचना का दोहन करने में मनुष्य प्रजाति का ही सबसे बड़ा हाथ होगा। एक दिन ऐसा आयेगा जब वो पहाड़, नदी और वृक्षों का सबसे बड़ा दुश्मन बन जाएगा। वह अपने निजी स्वार्थ एंव जरूरत से ज्यादा उपभोग को पूरा करने के लिये तेजी से इनका खात्मा करने लगेगा। आज लोग नदी के प्रदूषित और लुप्त होने की बातें करते हैं लेकिन नदियों की तरह पहाड़ों को भी बचाने की जरूरत है। जब हम भारत को बचाने की बात करते हैं तो भारत एक भूमि है। यहां की भूमि के पहाड़ों, नदियों और वृक्षों के साथ ही यहां के पशु, पक्षियों और जलचर जंतुओं को बचाया जाना चाहिए। जो लोग इनको नष्ट कर रहे हैं वे ही भारत के ही नही बल्कि इस धरती के असली दुश्मन हैं। जो लोग पहाड़ों और वृक्षों को काटते देख रहे हैं उनका भी अपराध लिखा जाएगा।
एक दिन मिलेगी पहाड़ काटने की सजा :
प्राचीन समय की बात की जाये तो यही पहाड़ ऋषिमुनियों और देवताओं की तपोभूमि हुआ करती थी। और लोग इसकी पूजा करते थे पहाड़ के देवता को वेदों में मरुतगण कहा गया है जिनकी संख्या प्रमुख रूप से 49 है। पर शायद आज का इंसान अपने स्वार्थ में इतना पलिभूत हो चुका है कि लोग इसको नुकान पहुचानें में थोड़ा भी नही कतरा रहे है। पर क्या आप जानते है कि पहाड़ों को किसी भी तरह से नुकसान पहुंचाने वाले पर ये मरुतगण भी नजर रखते हैं। मौत के बाद ऐसे लोगों की दुर्गति होना तय है। जीते जी ही ऐसे लोगों का जीवन नर्क बना ही दिया जाता है। वैदिक ऋषियों ने पहाड़ों के गुणगान गाए हैं। उन्होंने पहाड़ों के लिए कई मंत्रों की रचनाएं की हैं।फिर यदि जब उन्के द्वारा रचित की गई चीजों का दोहन किया जायेगा।  तो ऐसे लोगों के पाप की सजा निश्चित है जिसे कोई अदालत या कानूून उनके किये गए पापों की सजा से बचा नही पायेगी।

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