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बांधवगढ़ बन रहा बाघों की कब्रगाह! सुरेंद्र त्रिपाठी

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बांधवगढ टाइगर रिज़र्व में फिर हुई एक बाघिन की मौत, T-23 नामक बाघिन मार्च के महीने में करंट लगने से घायल हुई थी, पार्क प्रबंधन मामले को छिपाते हुए अधिक उम्र का हवाला दे कर सामान्य मौत बता रहा है।
उमरिया 8 अगस्त – जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघिन T-23 की मौत हो गई है। लेकिन टाइगर रिज़र्व स्वाभाविक मौत बता कर पल्ला झाड़ रहा है, सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मार्च महीने में धमोखर रेंज के दुगबार बीट में करंट का शिकार हुई थी यह बाघिन, तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर मृदुल पाठक इस बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर टाइगर रिज़र्व के बठान कैम्प में लाकर उसका इलाज करवाना शुरू कर दिया था लेकिन ठीक से देखरेख न होने के कारण बाघिन की मौत हो गई, हालांकि बाघिन की मौत को उम्र पूरी होने के कारण स्वाभाविक मौत होने का ढोंग पार्क प्रबंधन द्वारा किया जा रहा है, एक तरफ प्रदेश को टाइगर स्टेट के दर्जे की बात चल रही है इस बीच बाघ की चौथी मौत होने से सभी सकते में हैं लेकिन पार्क प्रबंधन कान में तेल डाल कर अपने में मस्त है, जिसमे सबसे पहले टी-63 और उसके शावक की मौत, उसके बाद पाली उप वन मंडल अंतर्गत आने वाले घुनघुटी रेंज अंतर्गत ग्राम मड़वा के पास कक्ष क्रमांक 214 में बाघ की मौत,

इस तरह प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिलते ही लगातार हो रही है बाघों की मौत। वैसे इसकी उच्च स्तरीय जांच होना आवश्यक है, यदि देखा जाय तो अभी बांधवगढ़ में हुई 2 मौत के बाद टी-62 की बच्ची का कहीं पता नही है और वह बाघ टी-33 का भी पता नही है जिसने बाघिन और उसके शावक को मारा था।
सुरेन्द्र त्रिपाठी
उमरिया

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