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भ्रष्टाचार का गढ़ बना मानपुर जनपद नही मिले आभूषण

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मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में नकली आभूषण का मामला विधानसभा में उठने के बाद संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने जांच का दिया था भरोसा

उमरिया – जिले के जनपद पंचायत मानपुर में 25 फरवरी 2023 को 86 जोड़ों के हुए सामूहिक विवाह योजना में गड़बड़ी की जानकारी खुद मंत्री मीना सिंह ने सबके सामने कही थी। उन्होंने भी यह माना था कि नकली चांदी के आभूषण दिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं बल्कि विधानसभा मे प्रश्नकाल के दौरान
महेश्वर से कांग्रेस विधायक विजयलक्ष्मी साधो ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में नकली जेवर बांटने का मुद्दा भी उठाईं थी।

पर हैरानी की बात तो अब आती है जब संसदीय कार्य मंत्री एवं गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस चीजों के लिए जांच का भरोसा दिया था लेकिन वह जांच अब ठंडे बस्ते में चली गई है या तो अधिकारी उनकी बातों को नहीं सुन रहे हैं। क्योंकि ना तो अभी तक कोई कार्रवाई की गई है और ना ही अभी तक हितग्राहियों को पैसे या तो उनके जेवर मिले हैं।

यह था पूरा मामला

दरअसल यह पूरा मामला उमरिया जिले के जनपद पंचायत मानपुर में आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का है जिसमें बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी। जहा जिले में आयोजित सामूहिक कन्या विवाह में जोड़ो को नकली आभूषण दिए जा रहे थे। वही जिसकी जानकारी के बाद आयोजन में मौजूद जनजातीय कार्य मंत्री मीना सिंह ने स्वयं इसको लेकर आपत्ति दर्ज कराई और आभूषण वापस करवाकर नकद राशि दिए जाने के निर्देश मंच से दिये थे। इसके साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाई भी लगाई थी। जहा हम आपको बता दें कि जनपद पंचायत मानपुर में मुख्य मंत्री कन्यादान योजना के तहत 86 जोड़ों का विवाह सम्पन्न हुआ था। हालांकि यह अलग बात है कि बहुत से शादीशुदा जोड़ों को पुनः बैठा कर सामूहिक विवाह की खानापूर्ति कर दी गई थी।

नकली निकले सभी आभूषण

वही नगर पंचायत मानपुर में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 86 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ था वहीं नियमानुसार वर-वधू को बारह हजार नौ सौ पचास रुपये मूल्य के आभूषण प्रदान किये जाने थे। जहां आयोजकों ने जब सोने चांदी के आभूषण वर-वधू को प्रदान किए तो पता चला कि अधिकांश जेवर नकली लाये गए हैं।

मंत्री मीना सिंह ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई

जिसके बाद आयोजन में ही मौजूद जनजातीय कार्य मंत्री मीना सिंह ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाते हुए वर-वधू के जोड़े को 12950 रुपये नकद प्रदान करने के निर्देश दिए थे। लेकिन आज दिनांक तक कुछ भी कार्रवाई नहीं हो पाई है।

विधानसभा में उठाया गया था इसका मुद्दा

वही प्रश्नकाल के दौरान महेश्वर से कांग्रेस विधायक विजयलक्ष्मी साधो ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में नकली जेवर बंटने का मुद्दा उठाया। संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने जांच का भरोसा दिया था, पर वह अभी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।

इस मामले में जिले के कलेक्टर कृष्ण देव त्रिपाठी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के जो अधिकारी हैं उनसे क्लियर करना पड़ेगा।

उप संचालक पंचायत एवं समाजिक निशक्त जन कल्याण विभाग अधिकारी राजीव गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने कहा कि 86 नही 95 जोड़ों का विवाह हुआ था। जनपद पंचायत और नगर पंचायत ने हमसे मार्गदर्शन मांगा था हमने उन्हें मार्गदर्शन दे दिया है। जब उनसे पूंछा गया कि आभूषणों की सप्लाई किसने किया था तो वो सारा ठीकरा खंड स्तर पर फोड़ते हुए बोले कि मात्र बजट निर्धारण से हमारा मतलब था और खण्ड स्तर पर समिति गठित कर टेण्डर काल किया गया था, सप्लायर कौन था इसकी जानकारी हमको नही है। यह सब जानकारी खण्ड स्तरीय समिति ही दे पाएगी।

इस मामले में जब जनपद पंचायत मानपुर के सीईओ राजेन्द्र प्रसाद शुक्ला से बात किया गया तो उनका कहना है कि सप्लाई आर्डर जिले के अधिकारी बता सकते हैं, हमारा उससे कोई लेना देना नही है, खण्ड स्तर पर तो मात्र आभूषणों के परीक्षण करने के निर्देश थे जो यहां की समिति ने किया और गलत पाए जाने पर आभूषण नही लिया गया। सप्लायर से जब आभूषण लिया ही नही गया तो किस बात की कार्रवाई। रही बात हितग्राहियों को आभूषण देने की तो शासन स्तर पर भेज गया है वहां से जैसा निर्देश प्राप्त होगा वैसी कार्रवाई की जाएगी।

वहीं जब प्रभारी सीएमओ मानपुर राजेश पारस से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हितग्राहियों को आभूषण के पैसे 11000 नहीं दिए गए हैं वहीं अन्य सामग्री के पैसे दे दिए गए हैं शासन से बात चल रही है जैसे ही आदेश होगा वैसे ही यह पैसे भी दे दिए जाएंगे वही सप्लायर की कार्यवाही पर उन्होंने कहा कि जब हम सप्लायर से सामान ही नहीं लिए हैं तो कार्रवाई किस बात की, उसे वैसे ही नुकसान हुआ है।

कांग्रेस नेता राहुल द्विवेदी ने बताया कि इस कार्यक्रम में नगर परिषद के द्वारा बुलाये गए जोड़ों को वापस लौटा दिया गया था, जिन 86 जोड़ो का विवाह हुआ है वह जनपद पंचायत मानपुर की तरफ से पंजीकृत रहे। रहा सवाल नकली आभूषण का तो मेरी जानकारी के अनुसार आभूषण नकली नही थे, सामाजिक न्याय विभाग द्वारा टेंडर आमंत्रित किये गए थे और कोई महिला मंदसौर जिले से आभूषण लेकर आई थी उसको महज इसलिए लौटाया गया कि उसने कमीशन नही दिया था और यह सारा खेल मंत्री मीना सिंह का था। यदि आभूषण नकली थे तो अब तक उस सप्लायर के ऊपर एफआईआर क्यों नही करवाया गया।

जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष पुष्पराज सिंह ने बताया कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ धोखधड़ी या छल कपट का मामला बनता है, क्योंकि उसने सप्लाई किया है वो तो हल्ला मचने के बाद सामान वापस किया गया।

सारे मामले में सवाल यह उठता है कि मानपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक और प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री मीना सिंह के नजरों के सामने सारा खेल हुआ और वो खुद आदिवासियों की हिमायती सरकार में आदिवासी विकास मंत्री हैं फिर भी सप्लायर पर कोई कार्रवाई नही हुई और इतना ही नही मंच से खुद घोषणा की थीं कि इन लोगों के खाते में 12900/- की राशि भेज दी जाएगी लेकिन 25 फरवरी से अब तक किसी भी तरह की राशि उन जोड़ों के खाते में न पहुंचना बहुत कुछ बयां कर रहा है।
ऐसे में तो लगता है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री और अजाक मंत्री का आदिवासी प्रेम मात्र वोट बैंक की राजनीति तक ही सीमित है।

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